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बसने की राह पर स्मार्ट शहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरों को विकास के इंजन के तौर पर विकसित करने के मकसद से गुरुवार को तीन बड़ी शहरी योजनाओं की शुरुआत की।
मेरे सपनों का शहर : नई दिल्ली में गुरुवार को शहरी विकास के श्रेष्ठ उदाहरणों से जुड़ी प्रदर्शनी देखते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरों को विकास के इंजन के तौर पर विकसित करने के मकसद से गुरुवार को तीन बड़ी शहरी योजनाओं की शुरुआत की। मोदी ने पुनरोद्धार व शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (एएमआरयूटी), स्मार्ट सिटी मिशन और सभी के लिए आवास मिशन की शुरुआत करते हुए कहा कि शहरीकरण को एक अवसर और शहरी केंद्रों को विकास के इंजन के तौर पर देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के तहत हम आगे बढ़ सकते हैं और इसे मिलकर (केंद्र व राज्य) कर सकते है। हर साल हिंदुस्तान एक छोटे देश को जन्म देता है। एएमआरयूटी योजना के तहत 500 शहर विकसित किए जाने हैं। 100 स्मार्ट शहर पांच साल के भीतर विकसित किए किए जाएंगे और सभी के लिए आवास योजना के तहत अगले सात साल में दो करोड़ मकानों का शहरी क्षेत्रों में निर्माण कराना है।

स्मार्ट सिटी का चयन शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा के जरिए होगा। जबकि एएमआरयूटी के तहत 500 शहरों की पहचान की जा रही है। प्रधानमंत्री ने स्मार्ट सिटी का हवाला देते हुए कहा कि भारत में पहली बार यह चुनौती रखी जा रही है जिसमें भारत के नागरिक अपने शहरों के विकास का दृष्टिकोण तय करने में योगदान दे सकते हैं। इस प्रतिस्पर्धी व्यवस्था से जन केंद्रित शहरी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

मोदी ने कहा कि ये शहरी योजनाएं सिर्फ सरकार की ओर से तैयार नहीं की गई हैं बल्कि इसमें शायद अब तक की सबसे अधिक परामर्श लेने की प्रक्रिया अंजाम दी गई है। इतना ही नहीं वैश्विक स्तर पर उठाए गए सर्वश्रेष्ठ कदमों की भी पड़ताल शामिल है। मोदी ने सभी शहरी योजनाओं को जनता की भागीदारी के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि शहरी योजना के बारे में समग्र दृष्टिकोण का अभाव है और विस्तार शहर के प्रशासकों द्वारा नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी डेवलपर्स द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एएमआरयूटी के जरिए सरकार का लक्ष्य शहरों को अपने आगे के विस्तार का अवसर प्रदान करना है। यहां कार्यक्रम के लिए एकत्र लोगों पर भारत की उस 40 फीसद आबादी के लिए बेहतर जीवन प्रदान करने की सामूहिक जिम्मेदारी है, जो या तो शहरों में रहते हैं या अपनी आजीविका के लिए शहरों पर निर्भर हैं। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण इलाकों से आए प्रवासियों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की आकांक्षाओं को लेकर भी बदलते वैश्विक माहौल के साथ संतुलन बनाना चाहिए।

उन्होंने स्मार्ट सिटी के लिए सहज दृष्टिकोण पेश करते हुए कहा कि यह लोगों की अकांक्षाओं से एक या दो कदम आगे की बात है। कार्यस्थल तक पहुंचने की सुविधा होनी चाहिए क्योंकि आज के समय में अधिकांश समय दफ्तर तक जाने में लग जाता है और काम के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। परिवहन के अलावा प्रौद्योगिकी भी अहम भूमिका निभाती है और ऊर्जा की बचत के लिए प्रावधान होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में कामकाज की हालत की आलोचना करते हुए कहा कि अगर यह 20-30 साल पहले कर लिया गया होता तो इसके आज अच्छे नतीजे होते। लेकिन देर आए दुरुस्त आए। स्पष्ट दृष्टिकोण वाली और जनता केंद्रित ये योजनाएं समय की जरूरत हैं। देश के विभिन्न भागों के अच्छे चलन को अपनाने की हिमायत करते हुए मोदी ने इस संबंध में हैदराबाद की कर संग्रह व्यवस्था, कर्नाटक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था और खुले में शौच को खत्म करने की दिशा में छत्तीसगढ़ के काम का जिक्र किया।

मौजूदा समय में दो करोड़ मकानों की कमी का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो जाएंगे और उस वक्त तक हर किसी को मकान उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। जन प्रतिनिधि और नेता अपने कार्यकाल में किए गए अच्छे कार्योंं के लिए याद किए जाते हैं।

नगर पालिकाओं के अध्यक्षों और शहरी नगर निकायों के महापौरों से कुछ अच्छा काम करने की अपील करते हुए मोदी ने कहा-आप अपने पोते-पोतियों को दिखा सकते हैं कि कोई इमारत या फिर कुछ और काम आपने 50 साल पहले किया था। सफलता का मापदंड यह है कि आपने अपने लोगों के लिए क्या किया।

विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह, शहरी नगर निकायों के मेयर और अध्यक्ष व सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रांतों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने एएमआरयूटी और स्मार्ट सिटी मिशन के लिए लोगो और टैगलाइन व एएमआरयूटी, स्मार्ट सिटी और सभी के लिए आवास मिशन के दिशानिर्देश जारी किए।

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