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कला और साहित्य

कविताः मैं देख सकती हूं तुम्हें

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की कविता

प्रसंगः आधुनिक चेतना का विकास और भारतेंदु

भारतेंदु अपने युग की चेतना के अनुरूप परिवर्तित हो रहे साहित्यिक मूल्यों, प्रतिमानों और उद्देश्यों को ध्यान में रख कर कविता में नए भावबोध...

कविताः नदी स्त्री है

नीरज नीर की कविता

कविताः लव का लैम्पपोस्ट

संजय स्वतंत्र की कविता

किताबें मिलीं: ‘नान्या’, ‘दस कालजयी उपन्यास’, ‘पढ़ि-पढ़ि के पत्थर भया’ और ‘सृजन-रंग’

‘नान्या’ की यह कथा अपने भीतर के एकांत में घटने वाले आत्मसंवाद का रूप ग्रहण करती हुई इतनी पारदर्शी हो जाती है कि पाठक...

कविताः आखिर हम कब तक अबला कहलाएंगे..

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की कविताएं

कहानीः फटा जूता

सारा सामान रख लिया, कुछ रह तो नहीं गया! सोलंकी ने एक दृष्टि जमीन पर बिछी बोरी पर डाली। हां, सब कुछ रख लिया,...

किताबें मिलींः ‘अशोक राजपथ’, ‘अनुभूति और अभिव्यक्ति’ और ‘अनंतिम मौन के बीच’

अशोक राजपथ अवधेश प्रीत का यह उपन्यास बिहार के कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षण-परिवेश को उजागर करता है कि किस तरह प्राध्यापक अपनी अतिरिक्त...

कविताः उठो, कि सुबह हो गई है

संजय स्वतंत्र की कविता

नन्ही दुनिया: कहानी – घमंडी धोलू

रूकरा गांव में एक बहुत पुराना नीम का पेड़ था। उस पर कई प्रकार के पंछी रहते थे। उनमें आपस में बहुत प्रेम था।...

ललित प्रसंगः सही जवाब की शिनाख्त

हम जो कुछ भी देख रहे हैं, देख पा रहे हैं, वह वास्तविकता नहीं है। वास्तविक नहीं है है। वह सब किसी की महत्त्वाकांक्षा...

कहानीः नुक्कड़ नाटक

सड़क के दार्इं तरफ देखते ही पिंकी की सांस की नली में डाट-सा लग गया। इससे पहले उस युवा स्त्री का दिल इतना तेज...

कविताएं: रोशनी में अंधेरा

मिथिलेश श्रीवास्तव की कविता

किताबें मिलींः ‘देस बिदेस दरवेश’, ‘पंचकोण’, ‘बात से बात’ और ‘कद आवैला खरूंट’

यह तो सच्चाई है कि ज्ञान और अनुभव के लिए देशाटन बहुत आवश्यक है। हमारे पुराने देश और समाज में तीर्थाटन की परंपरा रही,...

शख्सियतः मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद का जन्म बनारस के लमही में हुआ था। विकट परिस्थितियों के बावजूद प्रेमचंद ने अपनी रुचियों को मरने नहीं दिया।

अमन का अलख जगाता कवि

लाहौर के पंजाबी शायर उस्ताद दामन ने, आम आदमी के बीच जो जगह बनाई थी, उसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती। दशकों तक यह...