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कला और साहित्य

कविताएं: रेत पर मछली और तुम

चलो आज-भरते हैं तुम में... ढेर सारी मिठास... उन मुस्कुराहटों के लिए... जिन्हें समय की रेत पर पड़ी... मछली निगल गई है। उसकी आंखों...

जनसत्ता सबरंग: गीत गोविंद की पेशकश

नायिका राधा के विरह भावों को अगले अंश में दर्शाया गया

जनसत्ता सबरंग: ‘अफसाना लिख रही हूं दिले बेकरार का…’

फिल्मजगत की चकाचौंध से बहुत कम ही लोग बच पाते हैं। ऐसे में अगर फिल्मों में सफलता मिल जाए तो फिर फिल्मों से दूर...

प्राचीन ग्रंथों के साथ नवाचार की पहल

अल्पना नायक अक्सर अपनी शिष्याओं को लेकर परंपरागत नृत्य में नवीनता लाने का प्रयास करती हैं, जो युवा शिष्याओं को आकर्षित करता है। उनमें...

सत्रीय नृत्य में आती है पूर्वोत्तर की सुगंध

सत्रीय नृत्य गुरु जतिन गोस्वामी ने कहा कि सत्रीय नृत्य को इक्कीसवीं सदी के आरंभ में बतौर शास्त्रीय नृत्य परंपरा मान्यता प्रदान की गई।...

कविताएं: लाश, एक दीप जला जाओ और आंखों की दीवार

सांत्वना श्रीकांत की तीन लघु कविताएं।

द लास्ट कोच: टूटे न ये रिश्ते की डोर

आज के दौर में जब रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही हो, भाई-भाई का सगा नहीं, भाई-बहन में प्यार नहीं। चचेरे-मौसेरे भाइयों-बहनों में आत्मीय...

नृत्योत्सवः मानसून में मल्हार और नृत्य की प्रस्तुति

समारोह का आगाज जयपुर घराने की कथक नृत्यांगना और गुरू प्रेरणा श्रीमाली के नृत्य से हुआ। जहां उन्होंने परंपरागत कथक की नजाकत भरी प्रस्तुति...

नृत्योत्सवः शिव और पार्वती की सुंदर नृत्य प्रस्तुति

रावण ने शिव तांडवस्त्रोत की रचना की थी। इसमें शिव के रौद्र रूप का विवेचन है, जिसे अक्सर कलाकार गाते और नृत्य में पेश...

कविता: कश्मीर पर भारत का ध्वज नहीं झुकेगा…

अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बीच पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर पर लिखी यह कविता बेहद प्रासंगिक हो...

कविता: वे सदी के महान कवि थे, पिता, और मैंने गढ़ा प्रेम

सांत्वना श्रीकांत की तीन लघु कविताएं

द लास्ट कोच: जरा नज़रों से कह दो जी

सैकड़ों यात्रियों को लादे हुए यह मेट्रो अभी विश्वविद्यालय स्टेशन पहुंची है। भीड़ के चक्रव्यूह को भेदते हुए कालेज के लड़के-लड़कियों ने भी घुस...

युवा कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां

समारोह का आरंभ मल्लारी से हुआ। यह राग नाटई और अट ताल में निबद्ध था। इसकी परिकल्पना प्रिया ने अनन्या नृत्य उत्सव के लिए...

प्रेमचन्द और भारतीय सांस्कृतिक विरासत: …तो उन गोरों को भी सभ्य कहना पड़ेगा… जो शराब के नशे में, छेड़खानी की धुन में मस्त रहते हैं

प्रेमचन्द का साहित्यिक आकर्षण उनके अनुवर्ती लेखकों पर इस कदर तारी है कि वे स्वयं को किसी न किसी रूप में उनकी परम्परा से...

शून्यता से पूर्णता को दर्शाता गौरी दिवाकर का नृत्य

ध्यान की एक विधा यानी नृत्य, जिसमें नर्तक का जीवन घुंघरू होता है और उसकी हर सांस पैरों में बंधी घुंघरू डोर और उसकी...

नृत्योस्तवः कथक की एक नई पौध

कथक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी उभरती हुई कलाकार हैं। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आगाज शिव स्तुति ‘ओमकार महेश्वराय’ से किया। इसमें शिव के रूप को...

पौराणिक कथा पर आधारित नृत्य देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध

कीर्तन ‘श्री कृष्ण गोविंद’ का प्रयोग किया, जो राधा-कृष्ण के भावों से मेल खाता हुआ नजर नहीं आया। यह उचित होता कि कृष्ण के...

कविताएं: दुख को मुखाग्नि, तुम सुनिश्चित हो और मैं स्वर हूं…

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की तीन लघु कविताएं