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कला और साहित्य

‘बाला सरस्वती का नृत्य साहित्य और जीवन का समन्वय’

शताब्दी समारोह के अगले चरण में नृत्यांगना नंदिनी रमणी और साथी नृत्यांगनाओं ने नृत्य रचनाओं को पेश किया, जिसे टी बाला सरस्वती अपनी प्रस्तुतियों...

संस्कृति: रूहानी रिश्तों की मिसाल

शालीमार बाग के बगल में शाह हुसैन की मजार है, जहां ‘मेला चरागां’ मनाया जाता है। यह एक दिलचस्प बात है कि शाह हुसैन...

प्रसंग: दलित उत्पीड़न का सिलसिला

गैर-दलितों को यह बात समझने की जरूरत है कि उनके दुख-सुख के सच्चे साथी दलित ही हैं। राजनेता अपने स्वार्थों के मद्देनजर आपके जख्मों...

ललित प्रसंग: यही तो है हमारा भारत, मेरे तात!

राजे-रजवाड़े चले गए। पर लोकतंत्र जो पहले समाज परिवर्तन की इच्छा से उभरा था, धीरे-धीरे एक नए प्रकार के सामंतवाद में तब्दील हो गया,...

द लास्ट कोच: यहीं कहीं है खुशियों की चाबी

खुशी की तलाश में हम सभी भटकते हैं। फिर भी कितना इतराते हैं। झूठ ही सही, मगर जब लोग पूछते हैं-आप कैसे हैं, तो...

ललित प्रसंग: डालियों के रूप अनेक, रंग अनेक

कभी-कभी देखता हूं किसी वृक्ष की डालों को इस तरह, मानो, उन्हें ‘पढ़’ रहा होऊं, या उन्हें किसी चित्र में चित्रित होता देख रहा...

साहित्य का स्वधर्म

महाभारत में ही राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम-कथा है। गंधर्व विवाह करने के बाद जब शकुंतला कुछ समय बाद राजा दुष्यंत के दरबार...

संस्कृति: असम का जातीय पर्व बिहू

असम में बिहू मनाने की प्रथा आज भी परंपरागत रूप से चल रही है। गांव और बस्तियों में थोड़ी बहुत नाचती-गाती बिहू टोली नजर...

ललित-प्रसंग: सांस्कृतिक समृद्धि का संवत्सर

ब्लर्ब: नव संवत्सर आते ही लगता है जैसे शुभ्र चांदनी नहीं, वरन स्वर्ग की स्वर्णमुखी अप्सराएं ही खेतों में लहलहाती जौ-गेहूं की बालियों में...

द लास्ट कोच: तुझको चलना होगा

स्त्री नदी की तरह होती है। वह चलती है तो कई जिंदगियां चलती हैं। वह हंसती हैं तो फूल झरते हैं। उसकी मुस्कान से...

लघु कविताएं: ‘घूंघट के पार’ और ‘मौन संवाद’

सांत्वना श्रीकांत की दो लघु कविताएं

चेहरे और भी हैं…

बाल श्रम ने एक नया रूप ले लिया है। सड़कों पर बच्चे भीख मांग रहे हैं। कभी पेन बेचते हैं तो कभी करतब दिखाते...

नामवर सिंह: तब मैं रहियू अचेत…पर, साहित्य के चेतन जगत में सदैव शिखर पुरुष रहेंगे

नामवर सिंह अनंत में विलीन होकर अमर हो गए। उनसे जुड़ी अपनी यादों को साझा कर रहे हैं विराग गुप्‍ता।

द लास्ट कोच: तमाचा

मैं इस वक्त लास्ट कोच में सफर कर रहा हूं। यह कहानी है मेरी मित्र डॉ. उज्ज्वला की सहेली सुनंदा की, जो इस समय...

कविता: सपनों का गुलमोहर

पढ़ें डॉ. सांत्वना श्रीकांत की कविता 'सपनों का गुलमोहर'

कविता: कैसे जन्म दूं कविता?

पढ़ें डॉ. सांत्वना श्रीकांत की कविता 'कैसे जन्म दूं कविता?'

साहित्य चर्चाः राजेंद्र जोशी ने कहा, लेखक को कार्यकर्ता होना चाहिए

केंद्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय साहित्योत्सव में बुधवार को रवींद्र भवन में उत्तर-पूर्व और उत्तरी लेखक सम्मेलन हुआ।...