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कला और साहित्य

नन्ही दुनियाः कहानी – अनोखा भिखारी

उनसे वह डलिया का किराया वसूल लेता है। अब मां भी खुश है, वह भी और दूसरे बच्चे भी। संतराम युवक के साथ उसकी...

शख्सियत: काजी नजरुल इस्लाम

काजी नजरुल इस्लाम धार्मिक कट्टरता के सख्त विरोधी थे। वे कवि, संगीतज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे।

संस्कृति: टूटना एक साझे पुल का

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव के बावजूद जो शख्सियत एक साझे पुल का काम कर रही थी, उसने भी कुछ दिनों...

विमर्श: कहानियों में दलित अस्मिता

युवा दलित कहानीकार टेकचंद की कहानी ‘मोर का पंख’ में दलितों के लिए दोयम दर्जे के व्यवहार को गंभीर तरीके से उठाते हैं।

कहानीः वंश

महिला सिपाही के तेवर देख कर वह रहम की भीख मांगने लगी, पर तब तक महिला कॉन्स्टेबल ने उसे धकियाते हुए जीप में ठूंस...

कविताएं: ‘देह दोहरी हो रही’ और ‘वृद्धाश्रम’

दो कविताएंः वृद्धाश्रम जिंदगी का यतीमखाना है

किताबें मिलीं: ‘उसी के नाम’ , ‘हाशिए पर उगते सूरज’ और ‘अहिंसा श्रम-दर्शन’

गांधीजी की समस्त वैचारिकी का आधार अस्तित्व मात्र के प्रति एकत्व का विचार है, जिसमें मम तथा ममेतर/ स्व और पर के बीच प्रेमपूर्ण...

नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते...

नन्ही दुनियाः कहानी – दस में दस

लू लू ने थोड़ा सोचा और कहा- ‘हमारे पेट में।’ और फिर थोड़ा और सोच कर कहा- ‘अब मैं हमेशा ठीक समय पर नाखून...

शख्सियतः सुमित्रानंदन पंत

छायावाद के प्रमुख कवि सुमित्रानंदन पंत ने सात वर्ष की उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। वे निराला, जयशंकर प्रसाद, महादेवी...

संदर्भ: अस्मिता विमर्श के स्वर

साहित्य में वास्तविक मुद्दा हमेशा मानवीय मुक्ति और विशाल जनजीवन के जनतांत्रीकरण का रहा है। जब तक रचनाकार का आंतरिक संघर्ष स्पष्ट, मुखर और...

कहानी: पराजय

देवनाथ के पिता विद्याधर पंडित यानी पंडीजी, धर्मभीरु, डरपोक, जिद्दी, क्षणजीवी और आत्ममुग्ध व्यक्ति हैं। अपने गांव के मूर्खों के बीच वे परम ज्ञानी...

किताबें मिलींः ‘डरी हुई लड़की’, ‘जब नील का दाग मिटा’, ‘दुख नाम दिया है मैंने’ और ‘भरतकालीन कलाएं’

प्रस्तुत कृति ‘भरतकालीन कलाएं’ में लेखक ने उपर्युक्त पृष्ठभूमि में नाट्यशास्त्र में प्रतिपादित कला की अवधारणा और विभिन्न कलाओं के नाट्य में विनियोग पर...

कान फिल्म समारोह ‘सर’ : संवेदनाओं का संवाद

युवा फिल्मकार रोहेना गेरा की पहली हिंदी फीचर फिल्म ‘सर’ की 71वें कान फिल्म समारोह में काफी तारीफें हो रही हैं।