कला और साहित्य

द लास्ट कोच: देहदान

अनामिका हमेशा कहती है कि एक दिन हम सब शून्य में बदल जाएंगे। मगर हम क्या देकर जाएंगे। धरती और सूरज को देखिए। कितना...

नई चीजें करते हुए अपने अंदर के कलाकार को खोजें

आप के अंदर भी एक अद्भुत कलात्मक पक्ष हो सकता है जिसके बारे में शायद आपको अब तक पता ही न हो।

पुस्तक अंश: क्या विवाह की संस्था दरक रही है?

निवेदिता मेनन की किताब 'नारीवादी निगाह से' में नारीवादी सिद्धातों की जटिल अवधारणाएं और व्यावहारिक प्रयोग स्पष्ट और सहज भाषा में प्रस्तुत किए गए...

शहंशाह-ए-गजल- मेहंदी हसन

मेहंदी हसन की गायकी पर राजस्थान के कलावंत घराने का रंग चढ़ा था, जो आखिर तक नहीं उतरा। उन्होंने गजल से पहले ठुमरी-दादरा के...

लोक के गीत

लोकगीतों की सबसे खास बात यह रही है कि ये भारतीय समाज का आईना होने के साथ स्त्री या पुरुष के दुख को बहुत...

एक कहावत की आत्मकथा

भाषा और संस्कृति के साझे को समझना खासा दिलचस्प है। यह दिलचस्पी तब और बढ़ जाती है। जब हम भाषाई कहन से जुड़े...

पंजाबी साहित्य का ‘हंस’ नानक सिंह

नानक सिंह का साहित्य पंजाबी कौम की जिंदादिली का अक्षर दस्तावेज है। ‘इक म्यान और दो तलवारें’ उपन्यास के लिए 1962 में उन्हें साहित्य...

राष्ट्रप्रेम का अक्षर सर्ग बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

दिलचस्प है कि जिस सांस्कृतिक धारा की पाल आगे चलकर कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर ने संभाली और जिन्होंने अपने कृतित्व से बांग्ला लोकमानस को ओतप्रोत...

लोकमंगल की साधना

तुलसी ने लोकमंगल की दरकार को हमारी सांस्कृतिक परंपरा के साथ जोड़ा। तुलसी जब अपनी रामकथा को ‘मंगल-करनि कलि-मल हरनि’ कहकर उसे ‘सुरसरि’ के...

अंधविश्वास व आडम्बर के घोर विरोधी कबीर

मध्यकालीन युग के महान कवि संत कबीर दास की जयंती प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है और इस...

कविताएं: एकांतवास और फंतासी

जूही शुक्ला की कविताएं...।

कविताएं: मौन में पलाश और प्रार्थना में उठे हाथ

यहां पढ़िए सांत्वना श्रीकांत की दो लघु कविताएं।

राजा-प्रजा में विकसित समझदारी से टल जाते हैं बड़े से बड़े संकट

महापुरुषों की विराट राष्ट्रीय चेतना को संकीर्णता के दायरे में न समेटें, बता रहे हैं यूपी के संस्कृति विभाग के विशेष सचिव डॉ दिनेश...

आधुनिक कन्नड़ साहित्य के पुरोधा मास्ति वेंकटेश अय्यंगार

सृजन और संवेदना के बीच रचनात्मकता के कई बहुमूल्य प्रयोग करने वाले मास्ति का साहित्यिक नाम ‘श्रीनिवास’ है और इसी नाम से उन्होंने अपना...

स्त्री के मौन से निकला महाभारत

मुकेश भारद्वाज की नई किताब 'सत्ता का मोक्षद्वार : महाभारत' (वाणी प्रकाशन) की समीक्षा पढ़िए।

बेटी से संसार

ना तड़प ना तलाश ना प्यास ना अंधविश्वास, न मैं ना तुम बस हम ही हम। इजहार जब, इकरार तब प्यार अब खास सब,...

द लास्ट कोच: ऐ दिल-ए-आवारा चल…

नीलाभ को एक संत की बात याद आ रही है। उन्हें किसी आयोजन में सुना था। वे कह रहे थे, आपके चेहरे की प्रसन्नता...

विरक्त मन और कुंभन

कुंभनदास की पगड़ी फटी हुई थी, कपड़े मैले थे। फिर भी वे इस आत्मग्लानि में डूब रहे थे कि किस पाप के कारण उन्हें...

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