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कला और साहित्य

कविताएंः अंतिम इच्छा जैसा कुछ भी नहीं है

दिनेश कुश्वाह की कविताएं

किताबें मिलींः ‘वाशिंदा @ तीसरी दुनिया’, ‘देह ही देश’, ‘उन्हीं में पलता रहा प्रेम’ और ‘भोर’

इस पुस्तक में क्रोएशिया प्रवास की घटनाएं और आख्यान हैं। इतिहास के प्रमुख नायक और नायिकाएं आपको इसमें कहीं नहीं मिलेंगे।

कविताः तपती दुपहरी में गुलमोहर तुम

संजय स्वतंत्र की कविता

शख्सियत: गुरुदत्त

प्यासा’, ‘साहब बीबी और गुलाम’, ‘चौदहवीं का चांद’ जैसी फिल्मों से अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके गुरुदत्त बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। मनमौजी...

कहानीः कबूलनामा

अगर साहित्य का कहीं गिरजाघर होता, तो मैं कभी का कन्फेशन कर लेता। कहीं और मुझे वह बात नजर नहीं आती है, जो गिरजाघर...

स्मृति: कविता का विस्तृत और विश्वसनीय संसार

नागार्जुन ने अपनी एक कविता में स्वयं को ‘तरल आवेगों वाला हृदयधर्मी जनकवि’ कहा है। उनका यह कथन एक ऐसे समय में सुनाई पड़ता...

पंख खोने की सनक

समाज में आधुनिकता आ गई। लोगों की आत्म-चेतना जाग गई। पर आधुनिक और आत्म-सजग हुए लोगों पर परंपरा-ध्वंस की ऐसी धुन सवार हुई कि...

किताबें मिलीं: ‘कलम के सेनापति’, ‘भोर के अंधेरे में’ और ‘भारतीय मुसलमान: इतिहास का संदर्भ’

परिचित पत्रकार और संपादक आलोक मेहता की पुस्तक ‘कलम के सेनापति’ भारतीय पत्रकारिता की भीतरी दुनिया का वह दर्पण है, जिसमें हम सन 1970...

विज्ञान और जीवन: अमरता की खोज

अमरता की संभावना ने एक ओर उत्कट उत्तेजना, तो दूसरी ओर धर्म, दर्शन और नीतिशास्त्र जैसे कई क्षेत्रों में व्याकुलता भी पैदा कर दी...

किताबें मिलीं: ‘रेत समाधि’, ‘दंतक्षेत्र’ और ‘फिर… और फिर’

बस्तर संभाग का सर्वाधिक चर्चित जिला दंतेवाड़ा, मुख्य रूप से दंडामि माफियाओं की भूमि, जिसकी सदियों से पहचान गौर सींग मुकुट तथा नृत्य रहे...

भूले बिसरे साज

किसी भी सभ्यता और संस्कृति के लिए उसकी सांस्कृतिक गतिविधियां जरूरी हैं और इसके लिए आवश्यक है संगीत। संगीत या तो कंठ पर निर्भर...

किताबें मिलीं: ‘बाजार के अरण्य में’, ‘प्रयोग चंपारण’ ‘दृश्यांतर’ और ‘राग-विराग और अन्य कहानियां’

अच्युतानंद मिश्र की इस पुस्तक की मूल प्रतिज्ञा आज के पूंजीवाद-निर्मित समाज को मार्क्सवाद से अनुप्राणित चिंतकों के संदर्भ से विश्लेषित करना है।