गोवा की राजधानी पणजी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए एक विरोध प्रदर्शन के एक हफ्ते बाद पुलिस ने अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह मामला दुश्मनी को बढ़ावा देने, शांति भंग करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर दर्ज किए गए हैं। एक हफ्ते पहले पुलिस ने सीजेपी के प्रदर्शनस्थल आजाद मैदान से 7 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

पुलिस ने यह एफआईआर एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर दर्ज की है, शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने एक समुदाय के खिलाफ नारे लगाए। साथ ही यह प्रदर्शन शांति और सौहार्द बिगाड़ने के लिए आयोजित किया गया था।

जांच शुरू कर दी गई- पुलिस अधिकारी

नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “मामले में जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ के बाद आरोपियों की पहचान की जाएगी।”

प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर सांप्रदायिक नारे लगाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इसके बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि मामले की जांच की जाएगा और बाहरी लोगों द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द बिहाड़ने की किसी भी कोशिश को सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।

कोर्ट ने दिया था रिहा करने का आदेश

11 अक्टूबर को गोवा में सीजेपी से जुड़ी एक संस्था ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। हिरासत में लिए गए सात प्रदर्शनकारियों की रिहाई के लिए ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच में दायर की गई है, इस पर कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे उन सभी को 11 अक्टूबर की रात को ही रिहा कर दें। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हो सकता है कि हिरासत अधिकृत न रही हो।

पुलिस ने नहीं दी अनुमति

आयोजकों ने 7 अक्टूबर को अधिकारियों से अनुमति के लिए आवेदन दिया था। उत्तर गोवा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के 9 अक्टूबर के एक आदेश में कहा गया कि 11 अक्टूबर को आजाद मैदान में सार्वजनिक सभा करने की अनुमति खारिज कर दी गई। यह फैसला उत्तर गोवा के एसपी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया, जिसमें सार्वजनिक सभा के लिए अनुमित न देने की सिफारिश की गई।

द इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पुलिस ने अनुमति न देने के पीछे दो कारण गिनाए हैं- पहला प्रदर्शनकारियों का पुराना इतिहास रहा है कि वे अधिकारियों की ओर लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करते रहे हैं। और दूसरा जुलाई में इसी जगह पर नीट से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, एक प्रदर्शनकारी द्वारा उमर खालिद का समर्थन करने का एक खास मामला सामने आया था। इन्हीं कारणों से पुलिस ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों को 11 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के लिए पणजी के आजाद मैदान में जमा होने की अनुमति नहीं दी।

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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को शुक्रवार को पुलिस ने ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। शनिवार को कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। दीपके पहले 10 अक्टूबर की हिरासत के चलते 11 अक्टूबर के बेल बॉन्ड में आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ रिहा हुए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें