सब अपनी धुन में हैं और होना भी चाहिए। हम भी अपनी धुन में हैं। पर पैसेंजर को इससे क्या…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजरिए से देखें तो उनको मार्गदर्शक मंडल में होना चाहिए। यह दीगर बात है कि उनकी…
नदियों की प्रदूषण-मुक्ति के नाम पर खर्च बढ़ता जा रहा है, पर सरकारी प्रयास अब भी नतीजा लाते नहीं दिख…
इंटरनेट एक माध्यम मात्र है। इस पर उपलब्ध कोई ऐप या वेबसाइट समाज के भूख, रोग और अशिक्षा को दूर…
पठानकोट जैसे हमले होते रहेंगे भारत में कहीं न कहीं, जब तक हम स्वीकार नहीं करते कि ऐसे हमले एक…
छमाही आर्थिक विश्लेषण की कई बातें उलझन में डालने वाली हैं। मसलन, पैरा 1.4 कहता है ‘‘यह सही है कि…
भारतीय ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठना लाजिमी है कि इस अर्धशतकीय समयांतराल में बदला क्या सिर्फ सरकारें,…
कौशल और जीवन के बीच जो संबंध हैं, उसके कई आयाम हो सकते हैं। किसी में दोनों का सीधा संबंध…
‘मत बनाओ मंदिर, मस्जिद, गिरजे, आश्रम संघ वगैरह। धर्म भावना मूलत: परित्यागी है। भारतीय धर्म और दर्शन एकांत में पनपा…
एक नए साल की शुरुआत कैसे की जा सकती है, बिना गुजरे साल के गिरेबान में झांके। झांकने की कोशिश…
नए साल के संकल्प करना मैं पसंद नहीं करता, लेकिन दूसरों के लिए संकल्प तय करते हुए मैं खुश हूं,…
काफी पहले ग्रामीण भारत में मेलों के दौरान अक्सर स्त्री-पुरुष अपने हाथों पर नाम या विभिन्न आकृतियां गुदवाते थे जो…