अरुण तिवारी

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7 Articles

गाद को बहने दो

प्रत्येक नदी में तीन तरह के कण होते हैं: सैंड, सेडिमेंटेशन और सिल्ट यानी रेत, गाद और तलछट।

कमी पानी की नहीं, प्रबंधन की है

भूजल शोषण नियंत्रण का उपाय भूजल स्रोतों का नियमन, लाइसेंसीकरण या रोक नहीं हो सकता।

‘दुनिया मेरे आगे’ कॉलम में अरुण तिवारी का लेख : ईमान की इज्जत

आइटीओ से लक्ष्मीनगर की दूरी दो किलोमीटर से कम नहीं। कोई आॅटोवाला अधिक पैसे पाने के बाद इतनी दूरी से सिर्फ पैसा लौटाने आए,...

पर्यावरण की कसौटी पर

अमेरिका, दुनिया का नबंर एक प्रदूषक है, तो चीन नंबर दो। फिर भी भारत, उपभोगवादी चीन और अमेरिका जैसा बनना चाहता है। क्यों?

दुनिया मेरे आगेः ओ री गौरैया

तब हमारे दिल्ली वाले मकान में मात्र दो कमरे, रसोई, गुसलखाना, शौचालय और एक बरामदा था। बाहर अमरूद के नीचे आंगन में खाना खाते...

दिल्ली को हरित नियोजन की दरकार

दिल्ली ही नहीं, पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को इन कवायदों के दायरे में लाना होगा। परिवहन, मार्ग, समय, वाहन उपयोग तथा कचरा प्रबंधन संबंधी...

कैसे प्रदूषण-मुक्त हों नदियां

नदियों की प्रदूषण-मुक्ति के नाम पर खर्च बढ़ता जा रहा है, पर सरकारी प्रयास अब भी नतीजा लाते नहीं दिख रहे। आखिर क्यों?

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