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मुकेश भारद्वाज के सभी पोस्ट

बारादरीः चिंता है तो बचा लेंगे लोक संस्कृति को

हमारी फितरत है कि ध्वनि हमें आकर्षित करती है। जितने मन से उस जमाने में लोगों ने पाश्चात्य धुनों पर आधारित गीतों को सुना,...

बेबाक बोल: रुद्रावतार!

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय ‘कर नाटक’ का जो व्यंग्य चल रहा था उसका पटाक्षेप जद (सेकु)-कांग्रेस सरकार का पहला बजट पेश करने के...

राजकाजः बेबाक बोल – भ्रमजाल

अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस के उदारवादी चेहरे 2019 के चुनावी मैदान में नीतियों की बात आते ही परेशान हो जाते हैं।...

बारादरीः पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते ही नहीं केजरीवाल

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी का आरोप है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री आरोप तो लगाते हैं, लेकिन मुद्दे सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर...

बेबाक बोल: बेलाज बादशाह

चुनावी मैदान में जनता के सामने हाथ जोड़ने वाले जनप्रतिनिधि सत्ता का ताज पहनते ही लोकतंत्र की लाज नहीं रखते हैं। जनप्रतिनिधियों का नागरिकों...

बेबाक बोल: दर्द की दवा क्या…

औपनिवेशिक शासन के अंत ने भारत को विभाजन जैसे नासूर के साथ कश्मीर जैसी लाइलाज बीमारी भी दे दी। राजे-रजवाड़ों को आजाद हिंदुस्तान की...

बेबाक बोल : आगे 2019 है…

जंतर मंतर और रामलीला मैदान से एनजीओ, आइआइटी, हाई प्रोफाइल समाज सेवकों के डिजाइनर आंदोलन से आम आदमी पार्टी का ब्रांड निकला था। शहर...

बेबाक बोल : फुटबॉल का ‘खेल’

इंग्लैंड की फुटबॉल टीम के स्वीडिश मूल के मैनेजर स्वेन गोरान एरिक्सन ने कहा था, ‘फुटबॉल में राजनीति से ज्यादा राजनीति है’। आज जब...

बारादरी: सतत मूल्यांकन से पहले समस्या को समझें

इस देश में नीतियों की कमी नहीं है। समस्या है, तो उनके क्रियान्वयन की। अब तक जितनी भी बातें मैंने कीं, उनमें से एक...

बेबाक बोल : मिसाल

मजहब की दीवार लांघ एक लड़की और लड़का प्रेम करते हैं। इस प्रेम और शादी की मांग के खिलाफ लड़के की हत्या कर दी...

बेबाक बोल : कठिन राह

केंद्र की राजग सरकार ने चुनाव सुधारों के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने के लिए कदम उठाने की इच्छा जाहिर की...

बारादरीः मैं लिखती आंखिन की देखी

हिंदी को हर वक्त क्षेत्रीय भाषाओं की जरूरत पड़ती है। हिंदी समृद्ध होती है क्षेत्रीय भाषाओं से। हालांकि बड़े दुख की बात है कि...

बेबाक बोल : खबर जिंदा है

14 मई 2018 को टॉम वुल्फ ने दुनिया को अलविदा कहा। 88 पार की उम्र में अपने खास तरह के फैशन के लिए मशहूर...

बेबाक बोल : कर्नाटक की बोध कथा

‘अब तो ईगलटन रिसॉर्ट के मालिक का भी कहना है कि मैं सरकार बनाऊंगा मेरे पास 117 सदस्यों का बहुमत है’। कर्नाटक में येदियुरप्पा...

बारादरी: सिनेमा को समाज के जिम्मे छोड़ देना चाहिए

फिल्म कलाकार मुकेश त्यागी का कहना है कि कला-माध्यमों पर किसी तरह का बंधन नहीं होना चाहिए। इंटरनेट के इस जमाने में फिल्म सेंसर...

बेबाक बोल: तारीखी तस्वीर

आमार शोनार बांग्ला, आमि तोमाए भालोबाशी (मेरा सोने जैसा बंगाल, मैं तुमसे प्यार करता हूं)। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में यह गीत लिखा था...

राजकाजः बेबाक बोल – बनते देखा है..

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं/आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार...। जब बात अतिक्रमण की आती है तो...

बारादरी: लोकप्रिय हुआ तो लुगदी का ठप्पा लगा दिया

गल्पकार सुरेंद्र मोहन पाठक का कहना है कि टीवी और इंटरनेट की बढ़ती तकनीक ने उनके वे पाठक छीन लिए हैं, जो फुर्सत मिलते...