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मुकेश भारद्वाज के सभी पोस्ट

बारादरी: कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के कुप्रचार का लाभ मिला पाकिस्तान को

विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का आंदोलन अपनी परिणति तक पहुंच...

बेबाक बोल: राजकाज – शर्मसार

निर्भया के पहले भी हिंसा के ऐसे क्रूरतम मामले हुए थे और बाद भी। 2012 में दिल्ली की सड़क पर हुई बर्बरता ने पूरे...

बेबाक बोलः इम्तिहान

जम्मू के कठुआ से लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव तक जो हुआ उससे दुखद कुछ नहीं हो सकता। लेकिन इन्हीं बर्बरताओं के बीच पता...

बारादरीः जनतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं

भाजपा सांसद और दलित चिंतक उदित राज का कहना है कि सामाजिक न्याय लाने की दिशा में भारत का बौद्धिक वर्ग नाकाम रहा है।...

बेबाक बोलः बिसरि गयो हरि नाम

धर्म और उसका संदेश समाज के पक्ष में सकारात्मक तरीके से लिया जाए तो उसके अनुयायी बड़ी ताकत को झुका सकते हैं। विश्नोई समुदाय...

बेबाक बोलः राजकाज- कहते हैं कि…

अब अपना इख्तियार है चाहे जहां चलें/रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम...। देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राज्यसभा में लोकतंत्र के अभिभावक...

सबरंगः ‘चुनाव से नहीं कोई डर, काम ही कसौटी पर’

भारतीय राजनीति में जब गाय, गीता और गंगा को स्थापित करने की कवायद चल रही थी उस वक्त मध्य प्रदेश एक नजीर बन चुका...

उपचुनावों की हार से सबक ले और मजबूत बनेंगे: शिवराज

‘देखिए इसे आप मेरा अहंकार मत समझिए। लेकिन मैं फिर यही कहता हूं कि उपचुनावों के नतीजों को समग्रता में देखा जाना चाहिए।...

बारादरी: विधाएं भाषा की नहीं, साहित्य की होती हैं

साहित्य, समाज और सत्ता के त्रिकोण में एक अहम भूमिका होती है अकादमियों की। देश की आजादी के बाद सत्ता के केंद्र ने साहित्य...

बेबाक बोलः राजकाज- केदरानाथ

‘किसी को प्यार करना/तो चाहे चले जाना सात समुंदर पार/पर भूलना मत/कि तुम्हारी देह ने एक देह का/नमक खाया है...’। केदारनाथ सिंह भावनाओं को...

बेबाक बोलः राजकाज- साडा हक

मेरी हड्डियां/मेरी देह में छिपी बिजलियां हैं/मेरी देह/मेरे रक्त में खिला हुआ कमल...। कवि केदारनाथ सिंह की इन पंक्तियों के साथ हमने उन किसानों...

बारादरी: नाटक सिर्फ मनोरंजन की वस्तु नहीं

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक और मकबूल रंगकर्मी वामन केंद्रे का मानना है कि सिनेमा और इंटरनेट से जुड़े मनोरंजन के माध्यमों ने आम...

बेबाक बोलः राजकाज- राग दरबारी 2

श्रीलाल शुक्ल की रचना ‘राग दरबारी’ ने पचास साल पूरे कर लिए हैं। इसके लिखे जाने के समय ही पाठकों ने महसूस किया कि...

बेबाक बोलः राजकाज- दुराग्रहों का द्वंद्व

दिल्ली के शासन में आम आदमी पार्टी शानदार जीत के बाद ऐसी मजबूत विधायिका बन कर आई जहां विपक्ष नाम की चीज नहीं थी।...

बेबाक बोल : बड़ी बीमारी

दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा सार्वजनिक बस में चढ़ती है। एक पुरुष उसके साथ अश्लीलता की हदें पार कर देता है। खचाखच भरी बस...

बेबाक बोलः राजकाज- हंसना मना है

मिथिलांचल (वर्तमान में बिहार का हिस्सा) के मंडन मिश्र का आदि गुरु शंकराचार्य से शास्त्रार्थ चल रहा था। निर्णायक थीं मंडन मिश्र की विदुषी...

बारादरी: सीलिंग का व्यावहारिक हल निकालना जरूरी

आम आदमी पार्टी के बीस विधायकों के अयोग्य करार दिए जाने का मामला हो या सीलिंग का, देश की राजधानी से जुड़े इन मुद्दों...

बेबाक बोल : क्रोध काल

हमने अपने पूरे माहौल में गुस्से और अहंकार का जो गुबार रच दिया है वह अब हमारे बच्चों के दिमाग में फूट रहा है।...