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अश्विनी भटनागर के सभी पोस्ट

तीरंदाजः पहचान और पता

हम अपना ‘घर’ उसी जगह को मानते हैं, जहां हमारी यादें बसी हैं- पुश्तैनी यादें। इनके साथ जुड़े हुए हैं ‘अपने’ लोग, जिनकी हमारे...

तीरंदाज: मुक्त इच्छा से मुक्ति

निजी जीवन हो, धर्म हो, व्यवसाय हो या फिर लोकतंत्र, मुक्त-इच्छा के त्याग में मोक्ष प्राप्ति निहित नहीं हो सकती है, क्योंकि भक्ति अपने...

तीरंदाजः भाषा भेद न कीजै

महात्मा गांधी ने कहा था राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। यह बात सच है। राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति के लिए एक भाषा का...

तीरंदाज: निगहबान पूंजीवाद का अंधा कुआं

निगहबान पूंजीवाद मतदाता को बरगला कर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर रहा है। चुनाव को डिजिटल तरीके से फिक्स या तय करके अपने...

तीरंदाज: झूठ का बोलबाला

विचारकों ने अगाह किया है कि झूठ में लिप्त नागरिक अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति शिथिल होते जा रहे हैं और उन्होंने...

तीरंदाज: स्वाद महिमा

स्वाद से जिंदगी का हर पहलू जुड़ा हुआ है। हमारे अनुभव खट्टे-मीठे होते हैं। हम अकसर किसी घटना या आयोजन को यह कह कर...

तीरंदाज- भय से अभय की ओर

हमारी उमंग भय-मुक्त होने की भी है। धर्म से टकराव और धर्मों में टकराव का कारण हमारे भय से अभय की ओर जाने की...

तीरंदाज- हमें गांव जाना है

‘बाउजी, हमें गांव वापस जाना है। हमको गांव भिजवा दीजिए। यहां हम जी नहीं पा रहे हैं। इतने साल हो गए हैं, पर अब...

तीरंदाज- है और होने के बीच

ब्राह्मण होने से कोई हिंदू नहीं हो जाता, भाई साहब। हां, मैं ब्राह्मण परिवार में पैदा जरूर हुआ था, इसलिए नाम के साथ चतुर्वेदी...

तीरंदाज- आशा नहीं रही

आशा खत्म हो गई है। कुछ अरसे से बीमार चल रही थी। बीच-बीच में ऐसा लगता था कि शायद उसकी तबीयत सुधर जाएगी, पर...

तीरंदाज- भाषण के आका

वास्तव में नेहरू की सोच की खास बात यह थी कि वह व्यक्ति से निकल कर सामाजिक इंद्रधनुष को मुखरित करती थी, उसके...

तीरंदाज- नागरिक बनाम मतदाता नागरिक

बातचीत के दौरन यह साफ उभर कर आया कि मतदाता अपना फायदा पहले देख रहे थे, चाहे उससे अन्य नागरिकों का नुकसान क्यों न...

तीरंदाज- जहां जीवन का अर्थ खुलता है

लक्षद्वीप के साथ नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली स्थिति नहीं है। इसके विपरीत यह एक ऐसी जगह है, जो लाखों में एक होने...

तीरंदाज- वास्तविकता पर आभासी की बढ़त

अन्य पुराने कालों की तरह यह नवजात काल भी नई चुनौतियां हमारे सामने पेश कर रहा है, पर बीते कालों से कहीं ज्यादा तेज...

तीरंदाज- पत्रकारिता के तकाजे

भारत में पिछले तीस वर्षों में स्वतंत्र पत्रकारिता लगभग समाप्त हो गई है। अखबारों के दफ्तर मीडिया हाउस में परिवर्तित हो गए हैं और...

मिथक और मानस रचना

हाल के बीते इतिहास में भी कई देवी-देवताओं के मिथक जो सुप्त थे, जागृत हो कर हमारी जीवन शैली का ऐसा हिस्सा बन गए...

तीरंदाज- बहुसंख्यकवाद का रास्ता

वास्तव में बहुसंख्यकवाद के जनक राजीव गांधी और कांग्रेस पार्टी है। 1984 से पहले हिंदू वोट को एकजुट करने की कोशिश बड़े पैमाने पर...

निजता का आधार

इधर नौकरी-पेशा होने के नाते पिछले वर्षों में कई पहचान पत्र अलग-अलग संस्थाओं ने बनवा कर दिए हैं, जिनको मशीन पर चिपकाने से कई...