अश्विनी भटनागर

अश्विनी भटनागर के सभी पोस्ट 77 Articles

तीरंदाज: ज्ञानमार्ग, भक्तिमार्ग!

संन्यासी आंदोलन और बंगाल अकाल की पृष्ठभूमि पर लिखी बाकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कालजयी कृति ‘आनंदमठ’ की शुरुआत इस प्रकरण से होती है।

तीरंदाज: जन-संवाद ही रास्ता

हाल-फिलहाल मीडिया के प्रचार-प्रसार का जो मॉडल है, उसे तुरंत उलटा नहीं जा सकता। बाजार की ताकत उसके पीछे है और कोई भी प्रत्यक्ष...

तीरंदाजः सहमा हुआ अमेरिकी समाज

वास्तव में अमेरिका का ज्यादातर समाज आज बेहद सहमा हुआ है। उदारवादी दक्षिणपंथियों से सहमे हुए हैं तो दक्षिणपंथी उदरवादियों से सशंकित हैं। दो...

तीरंदाज: अपना मोर्चा

अनाम पंडित कहता है कि जैसे बुरी तरह से घिरा हुआ सैनिक, जिसे बचाव की कोई उम्मीद नहीं है, आखिरी सांस तक लड़ कर...

तीरंदाज: छीजती मेधा के दौर में

अगर हम थोड़ी-सी भी गंभीरता से अपने आसपास देखें तो साफ हो जाएगा कि हमारे बौड़मपन की दर में लगातार वृद्धि हो रही है।...

तीरंदाज: आप मेरे दादू नहीं हो सकते

कुछ देर मैं सुन्न खड़ा रहा। फिर लंबी सांस लेने की कोशिश की। नहीं आई तो पानी में डुबकी मार ली। दम घुट गया।...

तीरंदाज: आ अब लौट चलें

वास्तव में चुनौतियों के डर से हम शहर में आकर छिप जाते हैं। रोटी का बहाना बनाते हैं और उस चूहे की तरह बन...

तीरंदाज: अज्ञानता का आत्मविश्वास

कोई व्यक्ति जितना अक्षम होगा उसका आत्मविश्वास उतना ही ज्यादा होगा। ज्ञान का भ्रम उसको अति-आत्मविश्वास देता है। दरअसल, ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु...

तीरंदाज: हिममानव के पदचिह्न

येति को आमतौर पर द्विपाद के रूप में वर्णित किया जाता है, पर अधिकतर वैज्ञानिकों का विश्वास है कि जाइगनटोपिथेकस चौपाया था। कभी-कभी वह...

तीरंदाज: भैंस के गले की घंटी

‘साहब’, उसने मुस्कुरा कर कहा, ‘चोर हमें नारों की घंटी सुना कर असली मुद्दों को कभी का गायब कर चुके हैं। हमारी भैंस तो...

तीरंदाज: तरक्की बनाम लड्डू

दीवाना राजा बन कर ऐश करने लगा। राजकाज की उसको समझ तो थी नहीं और न ही कुछ करने के चाह थी। उसे यकीन...

तीरंदाज: भीड़ हांकने का हुनर

ग्रीक दार्शनिक सुकरात का कहना था कि सार्वजनिक जीवन में सफल होने के लिए बहुत जरूरी है कि नायक उत्तेजित गतिविधि में लिप्त रहे...

तीरंदाज: वर्चस्व की सियासत

चीन सालों से अश्वमेध यज्ञ करने का संकल्प करके धीरे-धीरे अपना प्रभाव हर तरफ बढ़ा रहा था। दुनिया के हर कोने में- यूरोप, अमेरिका,...

तीरंदाज: किसान की जगह

हमें मिलकर सोचना है कि हम निजी और सामूहिक स्तर पर क्या करें, जिससे किसान और किसानी को उचित प्रतिष्ठा मिले और उसके काम...

तीरंदाज: पद और कद

शास्त्रीजी को देख कर मुझे अचंभा हुआ था। मन में उनकी छवि विराट रूप की थी- घर में सभी उनका जिक्र ऐसे करते थे...

तीरंदाज: पलने वाले, पालने वाले

हम सबको किसी न किसी तरीके की देखरेख चाहिए और अगर नहीं चाहिए, तो भी हमारा सामाजिक अनुकूलन इस प्रकार का है कि हमारी...

तीरंदाजः ठांय ठांय दर्शन

वास्तव में, ठांय ठांय राजनीति शास्त्र का महामंत्र है। यह चारों तरफ फैले बियाबान की सांय सांय को शांत करता है। इसका जाप करने...

तीरंदाजः सनातन अविरल धारा

सनातन धर्म की भव्य संरचना मूलत: तीन विशिष्ट स्तंभों पर आधारित है। इसका पहला स्तंभ देवता है, दूसरा पितर और तीसरा स्तंभ ऋता है।