Jansatta Editorial

संपादकीयः संकट और सवाल

बैंकों से जुड़े हर मामले की जांच और उन पर निगरानी की जिम्मेदारी बैंकिंग नियामक यानी भारतीय रिजर्व की है। हर बैंक का समय-समय पर ऑडिट होता है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व का अपना ऑडिट विभाग है जो बैंकों का ऑडिट करता है।

राजनीतिः इलाज को तरसते गांव

देश के अस्पतालों में चौदह लाख से ज्यादा डॉक्टरों की कमी है जबकि हर साल करीब साढ़े पांच हजार डॉक्टर ही मेडिकल कॉलेजों से तैयार हो पाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक डॉक्टर-मरीज का अनुपात मानक एक हजार तय है यानी हजार लोगों पर एक डॉक्टर। लेकिन हमारे यहां यह अनुपात बेमानी है। ग्रामीण क्षेत्र में तो यह आंकड़ा और भी कम हो जाता है।

संपादकीय:महाबली पर मुकदमा

डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे तभी से उनके बयानों, उनके जीवन से जुड़ी अनेक गतिविधियों, कारोबारी अनियमितताओं, चुनावों में धांधली आदि को लेकर तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं।

साहित्य चर्चाः राजेंद्र जोशी ने कहा, लेखक को कार्यकर्ता होना चाहिए

केंद्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय साहित्योत्सव में बुधवार को रवींद्र भवन में उत्तर-पूर्व और उत्तरी लेखक सम्मेलन हुआ।

संपादकीयः प्रशिक्षण के बजाय

शिक्षा की गुणवत्ता में बेहतरी के लिए शिक्षकों को समय-समय पर नए प्रयोगों से परिचित कराना या प्रशिक्षण देना शिक्षा-पद्धति का एक जरूरी हिस्सा है।

संपादकीयः परीक्षा का पैमाना

पिछले कुछ समय से किसी परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थी सुर्खियों में रहे हैं और उनकी प्रतिभा के बारे में जितनी खबरें आर्इं, वे नए विद्यार्थियों या प्रतियोगियों के लिए उपयोगी थीं।

संपादकीयः अनदेखी की धरोहर

ताजमहल के रूप में भारत की जो धरोहर दुनिया भर के सैलानियों के लिए आकर्षण का विषय है, वह भी हमारी लापरवाही के चलते छीज रहा है।

संपादकीय : हरित आदेश

मार्च में आयोजित ‘विश्व सांस्कृतिक महोत्सव’ के लिए नियम-कायदों को ताक पर रख कर यमुना के जीवन की घनघोर अनदेखी की गई थी और आयोजन के बाद वहां बड़े पैमाने पर गंदगी को यों ही छोड़ दिया गया था।

घर तक गंगा

सरकार का मानना है कि गंगा का शुद्ध पानी देश की सांस्कृतिक जरूरत है और लोग अपनी आस्था के निर्वाह के लिए इसे लाने कई बार बहुत दूर भी चले जाते हैं।

परिहास बनाम उपहास

यह वीडियो कॉमेडियन तन्मय भट्ट का रचा हुआ है, जो आॅनलाइन कॉमेडी समूह एआइबी के सदस्य भी हैं। वीडियो को लेकर आम राय यही है कि इसमें या इसके जरिए लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर का मजाक उड़ाया गया है।

दुनिया मेरे आगे : ढलती सांझ का दुख

मेरी नजरें लगातार उन्हें ढूंढ़ रही थीं। अपनी बात रखते हुए अंत में मैंने सभी वृद्धों का अभिवादन किया। मेरी बातें शायद कुछ ज्यादा भावुक हो गई थीं, क्योंकि वहां बैठे लगभग सभी बुजुर्गों की आंखों में आंसू थे।

संपादकीयः आरक्षण की कसौटी

आखिरकार पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार द्वारा बनाई गई पिछड़ा वर्ग-सी श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी।

राजनीतिः बोतलबंद पानी का विकल्प

बोतलबंद पानी प्लास्टिक कचरे के रूप में पर्यावरण को और पेयजल के रूप में व्यक्ति के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है। ऐसे में एक अहम सवाल यह उठता है कि सरकार अगर बोतलबंद पानी पर प्रतिबंध लगा देती है तो क्या उसके स्थान पर सरकार के पास कोई हर तरह से सुरक्षित विकल्प है? बिल्कुल है और कहीं बेहतर विकल्प है।

संपादकीयः कोचिंग का इलाज

किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों की भूमिका आज किसी से छिपी नहीं है। आज हालत यह है कि शिक्षा जगत के दायरे में इसे कोचिंग उद्योग के नाम से जाना जाने लगा है।

संपादकीयः मिलावट का रोग

जिस दौर में संसद हंगामे के चलते बाधित होने के लिए ज्यादा जानी जाने लगी हो, वैसे समय में आम नागरिकों की सेहत से जुड़े एक अहम मसले पर सांसदों के चिंतित होने की खबर राहत पहुंचाती है।

राजनीतिः सम-विषम का दम

दिल्ली में आॅड-ईवन यानी सम-विषम के दूसरे चरण के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसकी सफलता के लिए यहां के नागरिकों को धन्यवाद जरूर दिया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि यह योजना वायु प्रदूषण का कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकती।

संपादकीयः मौसम की मार

हर साल गरमी में बढ़ते तापमान के साथ लू के थपेड़ों से बड़ी तादाद में लोगों के बीमार होने और मरने की खबरें आने लगती हैं। कई बार इसके असर से मरने वालों की तादाद काफी हो जाती है।

संपादकीयः सूखा और सियासत

सूखे के भयानक असर की व्यापकता रोजाना सामने आ रही है। मसलन, महाराष्ट्र के लातूर में सौ करोड़ की एक इस्पात फैक्टरी सूखे की वजह से बंद हो गई।

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