Jansatta Editorial

एक अनार 23 बीमार

कांग्रेस का भारतीय राजनीति में बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहना ही उसके वर्तमान की त्रासदी है। केंद्रीय सत्ता से लेकर राज्यों में कांग्रेस की लिफाफा सरकार का बोलबाला रहा है। सत्ता की प्रतीक बनी देश की ऐतिहासिक पार्टी के साथ ऐसा बहुत बड़ा तबका जुड़ा जिसका कोई जनाधार नहीं था। ये न सिर्फ सत्ता में रहे बल्कि इनके हाथों में कांग्रेस की केंद्रीय कमान भी रही।

राहत के रास्ते

यह अब एक सामान्य जानकारी है कि बाजार में आम उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति डीजलचालित वाहनों पर निर्भर है और डीजल के मूल्य में बढ़ोतरी के साथ ही माल ढुलाई पर ज्यादा खर्च आता है और इसका सीधा असर थोक और खुदरा बाजार पर पड़ता है।

संतुलन की नीति

इसमें कोई संदेह नहीं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों में सामरिक दृष्टि से भारत की स्थिति बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। अमेरिकी हथियारों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और दोनों के बीच अरबों डॉलर के रक्षा करार हुए हैं।

अमन का रास्ता

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सैन्य तैनाती में कोई कटौती नहीं करेगा। फिर आतंकवाद को वित्तपोषण रोकने के लिए उस पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे। यानी पाकिस्तान पर कसे बाकी शिकंजे बरकरार रहेंगे।

बेलगाम महंगाई

देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम जहां लगभग सौ रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं, वहीं डीजल भी अस्सी रुपए प्रति लीटर से ज्यादा के भाव पर बिक रहा है।

अमन के दुश्मन

अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटने के बाद विदेशी प्रतिनिधियों का यह दूसरा दल था, जो कश्मीर मामले का अध्ययन करने और अपनी राय देने के मकसद से वहां गया था।

टीके से डर क्यों

पिछले महीने जब टीकाकरण शुरू हुआ था, तब भी पहले ही दिन दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टरों ने कोवैक्सीन टीका लगवाने से इनकार कर दिया था।

पंजाब का पैगाम

पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे हैरान करने वाले नहीं कहे जा सकते, मगर वहां इस कदर उलट-फेर हो जाएगा, शायद किसी को अंदाजा नहीं था।

संपादकीय: म्यांमा का संकट

म्यांमा का यह राजनीतिक घटनाक्रम मामूली नहीं है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने तख्तापलट के विरोध में कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। न्यूजीलैंड ने तो म्यांमा से सारे रिश्ते ही खत्म कर दिए।

संपादकीय: महंगी उड़ान

हवाई जहाज से बेशक कुछ अधिक पैसा लगता है, पर समय काफी बच जाता है, इसलिए लोग हवाई यात्रा को प्राथमिकता देते देखे जाते हैं। मगर कोरोना की वजह से बंदी होने के कारण हवाई सेवाओं को काफी घाटा उठाना पड़ा।

संपादकीय: मंदिरों की दुर्दशा

पाकिस्तान में मंदिरों सहित दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की देखभाल के लिए 1960 में इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) बनाया गया था। लेकिन यह बोर्ड सिर्फ दिखावे भर का ही है।

संपादकीय: बातचीत का रास्ता

शुरू में लगा था कि किसान इसलिए भी नाराज हैं कि प्रधानमंत्री खुद इस विषय पर बातचीत में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाते। मगर जब प्रधानमंत्री ने बातचीत की मंशा जाहिर कर दी तब भी किसानों में कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नजर नहीं आई, तो स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठने शुरू हो गए।

संपादकीय: तेजी के उपाय

रिजर्व बैंक को इस बात का भरोसा है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दर साढ़े दस फीसद देखने को मिल सकती है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि अब बाजारों में मांग निकलने लगी है।

संपादकीय: राहत के बावजूद

अगर बचाव के घोषित उपायों पर सही तरीके से अमल जारी रहा तो उम्मीद की जानी चाहिए कि देश जल्दी ही इस खतरे से पार निकल कर फिर से विकास की सामान्य रफ्तार पकड़ लेगा।

संपादकीय: विरोध की बुनियाद

यों लालकिले पर हुई घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। उस घटना की तस्वीरों और पुलिस कार्रवाई में शिथिलता आदि को लेकर प्रशासन भी सवालों के घेरे में है।

संपादकीय: हैरानी भरा रुख

अमेरिका से भारत के रिश्ते काफी मजबूत रहे हैं, दोनों के बीच कारोबारी संबंध हैं, सैन्य करार हैं और पिछले कुछ समय में अरबो डॉलर के हथियारों के सौदे भी हुए हैं

संपादकीय: कल की चुनौतियां

इस साल कृषि को छोड़ अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में जैसी गिरावट देखने को मिली है, उसे देखते हुए अगर भारत अगले वित्त वर्ष में दस फीसद से ज्यादा की वृद्धि दर हासिल करने में कामयाब रहता है तो यह कम बड़ी उपलब्धि नहीं होगी

संपादकीय: पाक का चेहरा

पाकिस्तान के सामने तात्कालिक चुनौती यह खड़ी होगी कि वह विश्व समुदाय के सामने आतंक से निपटने के मोर्चे पर अपनी गंभीरता को कैसे विश्वसनीय तरीके से पेश कर पाएगा।

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