राकेश बाजिया

राकेश बाजिया के सभी पोस्ट

8 Articles

भावों की भाषा

कहा जाता है कि भाषा मनुष्य को संपूर्ण चराचर जगत से अलग करती है। यह भाषा ही है जिसके चलते मनुष्य अपनी अलग संस्कृति...

दुनिया मेरे आगे: अलाव के इर्द-गिर्द

गांवों में वक्त के साथ आए अनेक बदलावों के बावजूद परंपरा के प्रयोग लगातार चलते रहते हैं।

दुनिया मेरे आगे: सृजन के विकल्प

मनुष्य के लिए प्रकृति एक वरदान की तरह है, जिसके अलग-अलग रूप में सौंदर्य झलकता है।

दुनिया मेरे आगेः धूप धड़ी की सुइयां

एक दौर था जब वक्त को ‘पहर’ के जरिए आंका जाता था। बहुत सारे लोगों ने रेतघड़ी देखी होगी, जिसमें शीशे की एक डमरूनुमा...

दुनिया मेरे आगेः परंपरा के रंग

इक्कीसवीं सदी में भले ही मनुष्य ने विज्ञान की दुनिया में असीम प्रगति कर ली है, पर समाज में रहते हुए उसे अपने ही...

अनुशासन की शिक्षा

ज्यादातर शिक्षक विद्यालय में अनुशासन के सही अर्थों से अनभिज्ञ होते हैं। उन्हें यह कहते सुना जा सकता है कि बिना डर के बच्चे...

कविता का गणित

‘सच्ची कविता’ के सच्चे प्रभाव को रेखांकित करते हुए बालकृष्ण भट््ट ने एक ऐसी ‘चोट’ से अवगत कराया है, जो कोई कविता पढ़ या...

परंपरा का जीवन

काफी पहले ग्रामीण भारत में मेलों के दौरान अक्सर स्त्री-पुरुष अपने हाथों पर नाम या विभिन्न आकृतियां गुदवाते थे जो शायद खो जाने की...

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