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मनोज कुमार के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे- छीजते अहसास

बढ़े खर्च पर वे कहते थे कि बाप की नहीं, जब खुद की कमाई से खर्चोगे तब समझ में आएगा कि पैसे कित्ती मेहनत...

दुनिया मेरे आगे- बुद्ध और युद्ध

इसके बावजूद मैं निराश नहीं हूं। मुझे लगता है कि एक दिन वह साल भी आएगा जब हम अच्छाई का पर्व मना रहे होंगे।...

दुनिया मेरे आगे- गिनती के दिन

थोड़े दिनों पहले एक दोस्त आया था। चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसकी नब्बे साल पार दादी कई दिनों से बिस्तर...

तराजू पर भरोसा

आमतौर पर पत्रकारिता या मीडिया के लिए टिप्पणी की जाती है कि अब उसकी विश्वसनीयता घट गई है।

सपनों के बाजार में

जिंदगी में सपने और सच उन रेल की पटरियों की तरह है जो साथ-साथ तो चलते हैं, लेकिन आपस में मिल नहीं पाते हैं।

सपनों से परे

मां-बाप धन कमाने की मशीन बन गए हैं। बच्चों को शीर्ष पर पहुंचाने की चाहत में वे इस बात से बेखबर हैं कि उनके...

बाजार में पानी

अभी सूरज की तपिश बढ़ी नहीं है, लेकिन हौले-हौले उसकी गरमी का अहसास होने लगा है और इसी के साथ पानी का संकट बढ़ने...

धर्म, समाज और सरोकार

‘मत बनाओ मंदिर, मस्जिद, गिरजे, आश्रम संघ वगैरह। धर्म भावना मूलत: परित्यागी है। भारतीय धर्म और दर्शन एकांत में पनपा है, वह आरण्यक है।