तवलीन सिंह, काकरोच जनता पार्टी, अभिजीत दिपके, Rahul Gandhi, वोट चोरी, Vote Chori
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ से आगे क्यों पहुंची ‘काकरोच’ की आवाज, दीपके ने विपक्ष पर उठाए सवाल | विचार

अभी तक दिपके कहते आए हैं कि उनका राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन अपनी तरफ से…

इस्तीफा और इज्जत: चुनाव आयोग पर सवाल उठे तो पुराने किस्से क्यों याद दिलाने लगी भाजपा?

तवलीन सिंह ने चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बीच भाजपा के पुराने उदाहरणों के सहारे किए जा रहे बचाव…

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मलबे पर डांट-फटकार और कागजी जांच, क्या हर हादसे के बाद भूल जाना ही दिल्ली की नियति है? | विचार

Delhi Building Collapse: दिल्ली में अवैध PG इमारत हादसे ने छात्रों की सुरक्षा, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं की कमी…

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आजादी के 8 दशक बाद भी बदहाल सरकारी स्कूल: क्या खोखली देशभक्ति के पीछे छिप रही है कड़वी सच्चाई?

Tavleen Singh Article: स्वतंत्रता दिवस पर ट्रैफिक लाइट पर तिरंगा बेचते कुपोषित बच्चे देश की कड़वी सच्चाई हैं। बदहाल सरकारी…

जंतर-मंतर आंदोलन और लोकतंत्र पर तवलीन सिंह के विचार दर्शाती फीचर इमेज, जिसमें उनकी तस्वीर के साथ विरोध-प्रदर्शन का सांकेतिक दृश्य दिखाया गया है।
‘लोकतंत्र का असली मतलब है कि सत्ता हिलाई जा सकती है’, तवलीन सिंह के विचार – आंदोलन ने नई ऊर्जा दिखाई है

लेखिका लिखती हैं कि काकरोच जनता पार्टी ने उस प्रधानमंत्री को भी ‘घुटनों पर ला दिया’, जो अपनी ’56 इंच…

तवलीन सिंह के विचार लेख के लिए बनाई गई फीचर इमेज, जिसमें तवलीन सिंह, नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के साथ 'चुप्पी के खामियाजे' शीर्षक दर्शाया गया है।
‘पहली बार मोदी से बड़े राजनेता साबित हुए राहुल गांधी’, तवलीन सिंह के विचार- लेकिन क्या इसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा?

जंतर-मंतर के आंदोलन में उमड़ी युवाओं की भीड़ केवल एक घटना का नतीजा नहीं थी, बल्कि पेपर लीक और शिक्षा…

प्रदर्शन कर रही भीड़ की पृष्ठभूमि पर बड़े अक्षरों में लिखा "घटते भरोसे के बीच", जो व्यवस्था, जवाबदेही और जनविश्वास पर उठते सवालों का सांकेतिक चित्रण करता है।
लोगों के घटते भरोसे के दौर में शायद देश को नई राजनीति और नए नेतृत्व की तलाश है | विचार

काकरोच जनता पार्टी पैदा हुई है अपनी आवाज बुलंद करने के लिए, ताकि कभी न कभी प्रधानमंत्री के दफ्तर तक…

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