तवलीन सिंह

तवलीन सिंह के सभी पोस्ट 232 Articles

वक्त की नब्ज: समस्या और समाधान

गरीब दिहाड़ी मजदूरों के लिए अगर प्रबंध नहीं कर पाई है सरकार घर वापस जाने की, तो तब क्या कर सकेगी जब इस बीमारी...

वक्त की नब्ज: भय के इस माहौल में

प्रधानमंत्री का अगला कदम यही होना चाहिए कि वे राज्य सरकारों के स्वास्थ्य मंत्रियों को दिल्ली बुला कर उनके साथ सलाह-मशविरा करें कि कम...

वक्त की नब्ज: चुनौती के बरक्स

जब कोई महामारी का सामना करना पड़ता है तो अक्सर विफल रहती हैं हमारी स्वास्थ्य सेवाएं। याद कीजिए मुजफ्फरपुर के उन बच्चों के अस्पताल...

वक्त की नब्ज: अजीब दौर है यह

पिछली बार न्यूयॉर्क आई थी मैं नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के कुछ महीने बाद। तब जिनसे मिली थी, सबने कहा था...

वक्त की नब्जः हिंसा का हासिल

नफरत का परिणाम यह है कि दिल्ली की कई बस्तियां पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं या उनमें नफरत का जहर इतना फैल गया...

वक़्त की नब्ज: असहमति के बगैर

इस बहुलतावाद पर हमको गर्व होना चाहिए, क्योंकि यह सदियों से हमारी पहचान रहा है। शायद यही कारण है कि हमारी एकता, अखंडता और...

वक्त की नब्ज: किसका नुकसान होगा

अमित शाह के प्रशंसक भी मानते हैं कि उन्होंने चुनाव अभियान का रुख बदल कर भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा किया...

वक्त की नब्ज: दिल्ली की तहजीब और सियासत

बंटवारे के बाद दिल्ली में थोड़ा-बहुत हिंदू-मुसलिम तनाव जरूर रहा होगा, लेकिन कभी इतना नहीं कि राजनेताओं के काम आए चुनावों में। पहली बार...

वक्त की नब्ज: इस मंदी में बजट

मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तो उनकी बातों से ऐसा लगा था कि वे भी नई आर्थिक दिशा में लेकर जाएंगे भारत...

वक़्त की नब्ज़: भय के इस माहौल में

अब आया है ऐसा समय जब आम लोगों को- खासकर मुसलामनों को- अपनी नागरिकता को खतरा दिख रहा है इस नए कानून से। सो,...

वक़्त की नब्ज़: उम्मीद के बरक्स

नरेंद्र मोदी से हम जैसों ने उम्मीद रखी थी कि वह इस तरह की गलत समाजवादी नीतियों को कूड़ेदान में फेंक कर एक नया...

वक्त की नब्जः इस कठिन समय में

कब तक चलेंगे ये प्रदर्शन, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं हम अभी से कि मोदी को निजी तौर पर पहली...

वक्त की नब्जः मुद्दे से अलग

समस्या यह है कि जिन सिद्धांतों को कांग्रेस पार्टी अपने बुनियादी सिद्धांत मानती आई है, उनकी तरफ न राहुल गांधी का ध्यान गया है...

वक़्त की नब्ज़: फीकी पड़ती चमक

जो लोग अवैध तरीके से भारत में आते हैं, वे अक्सर बदकिस्मत, बेरोजगार, गरीब होते हैं। वरना कोई नहीं छोड़ कर जाता है अपना...

वक़्त की नब्ज़: इस भ्रम के माहौल में

अशांति और अराजकता देश के बड़े शहरों में फैलने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक चुनावी भाषण में पिछले हफ्ते कांग्रस पार्टी...

वक़्त की नब्ज़: मंशा पर सवाल

जब किसी कानून में साफ शब्दों में लिखा जाता है कि सिर्फ मुसलिम शरणार्थियों को भारत में पनाह नहीं मिल सकती और सिख, हिंदू,...

वक़्त की नब्ज़: यह दाग बहुत गहरा है

उनकी चमकती छवि पर जो अब दाग लग गया है, उसको हटाना उनका पहला काम होना चाहिए। जैसे-तैसे सरकार बनी है अब महाराष्ट्र में,...

वक़्त की नब्ज़: नए मिजाज की राजधानी

भारत ही एक लोकतंत्र देश है दुनिया में, जहां जनप्रतिनिधियों को गरीब मतदाता ऐसा जीवन जीने का हक प्रदान करती है, जो जनता अपने...

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