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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्जः घाटी में खतरे की घंटी

अजीब बात है कि भारतीय जनता पार्टी के एक प्रधानमंत्री के दौर में कश्मीर घाटी में शांति बहाल रही और भाजपा के दूसरे प्रधानमंत्री...

वक्त की नब्जः झूठ के सहारे

गलतियां और भी गिनवाई जा सकती हैं मोदी के दौर की, लेकिन इनके बारे में न वामपंथी राजनेता कभी बोलते हैं और न ही...

वक्त की नब्जः दिल्ली पहुंचने का रास्ता

जब उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने देखा कि परिवर्तन और विकास के बदले उनको हिंदुत्व ही मिला है, तो भारतीय जनता पार्टी को छोड़...

वक्त की नब्जः विकास का झुनझुना

प्रधानमंत्री बहुत बार कह चुके हैं गर्व से कि उनके दौर में व्यवसाय करना इतना आसान कर दिया गया है कि विदेशी निवेशक भागे-भागे...

वक्त की नब्जः यह कैसा लोकतंत्र है !

लोकतंत्र का मजाक अगर उड़ा है कर्नाटक चुनावों के बाद, तो सिर्फ इसलिए कि दो राजनीतिक दल, जो एक-दूसरे के जानी दुश्मन थे कल...

वक्त की नजर: गरिमा के प्रतिकूल

अब स्थिति यह है कि आम चुनाव इतने करीब आ गए हैं कि नई दिशा की बातें भी करना बेकार है। शायद नई दिशा...

वक्त की नब्जः कश्मीर में गलतियां

जगमोहन ने कश्मीर की पेचीदा राजनीतिक समस्या को सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या समझा, सो कश्मीर घाटी का हाल सुधरने के बदले बिगड़ता ही गया,...

वक्त की नजर: नफरत के सहारे

विकास और परिवर्तन की जगह मुसलमानों को मोदी के राज में मिली है नफरत और गोरक्षकों के हमले। सो, एक बात जो अभी से...

वक्त की नजर: छवि बिगाड़ने की चालें

इस बदलते माहौल को देखते ही मोदी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस अपनी चालें चल रही है, ताकि अगले आम चुनाव तक प्रधानमंत्री...

वक्त की नब्जः दरिंदगी पर चुप्पी

जिस तरह कठुआ गैंगरेप पीड़िता की हत्या के बाद मोदी सरकार के मंत्री पेश आए हैं, उससे तकरीबन साबित हो गया है कि हिंदुत्व...

वक्त की नब्जः जाना था कहीं, पहुंच गए कहीं

भारतीय राजनीति भी विचित्र है। जिस मकसद को लेकर चलते हैं हमारे राजनीतिक दल और राजनेता, उसका कई बार बिलकुल उलटा हो जाता है।

वक्त की नजर: ऊंची आवाज की दरकार

सच तो यह है कि इस अधिकार से भारत के बच्चों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। सरकारी स्कूल वैसे के वैसे रहे...

वक्त की नजर: निराशा का हासिल

योगी आदित्यनाथ की इन नीतियों से उनकी लोकप्रियता इतनी कम हो गई है कि अपना गढ़ गोरखपुर हार चुके हैं अब। ऐसा होना ही...

वक्त की नजर: नतीजों के संकेत

मोदी सरकार के लिए राजनीतिक मौसम अब इतना खराब होने लगा है कि सोनिया गांधी के हौसले बुलंद हो गए हैं एक मुद्दत के...

वक्त की नजर : इतिहास बदलने की बेकली

अगर नई समिति ने इतिहास को सुधारने के बहाने हिंदुत्ववादी प्रचार और झूठ लिखना शुरू किया तो वह और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता...

वक्त की नजर : जब सत्ता का नशा चढ़ता है

मोदी की गलतियां गिनाने में ये लोग माहिर हैं शुरू से, लेकिन कभी अपनी गलतियों को स्वीकार करते नहीं दिखे हैं। सो, आज भी...

वक्त की नजर : निजीकरण की जरूरत

बैंकों के निजीकरण के साथ प्रधानमंत्री को उन सरकारी कंपनियों के निजीकरण के बारे में भी सोचना चाहिए, जो शुरू से घाटे में चल...

वक्त की नजर: सच का सामना करें

आपकी चुप्पी का फायदा उठा कर विपक्षी दल खूब प्रचार कर रहे हैं कि आपने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है। न...