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तवलीन सिंह

तवलीन सिंह के सभी पोस्ट 205 Articles

वक्त की नब्ज़: भारत की तरक्की से घबराता है पाकिस्तान

जब तक निजी निवेशक अर्थव्यवस्था में फिर से निवेश करना शुरू नहीं करेंगे, तब तक मंदी के बादल मंडराते रहेंगे मुंबई के आसमानों में।...

वक़्त की नब्ज़: रास्ता जरा कठिन है

रही बात कश्मीर की खास पहचान को जिंदा रखने की अनुच्छेद 370 के खत्म किए जाने के बाद, तो इस पहचान को कोई खतरा...

वक़्त की नब्ज़: धनवानों को धौंस

मेरी नजर में गलतियों की शृंखला शुरू हुई तब जब मोदी के दूसरे दौर के पहले बजट ने साबित कर दिया कि न आर्थिक...

वक्त की नब्ज: आर्थिक दिशा बदलने की जरूरत

दशकों लंबे समाजवादी दौर ने साबित कर दिया है कि न राजनेता व्यवसाय करने में सफल रहे हैं, न सरकारी अधिकारी। उस दौर ने...

वक़्त की नब्ज़: पाकिस्तान की हकीकत

इमरान खान सिर्फ मुखौटे हैं। इमरान खान इतने कमजोर प्रधानमंत्री हैं कि उनके बारे में कहा जाता है कि वे ‘इलेक्टेड’ नहीं ‘सिलेक्टेड’ प्रधानमंत्री...

वक्त़ की नब्जः वही पुरानी लीक

बेशक कर्नाटक की शुरू से कमजोर, नाकाम सरकार अगले हफ्ते तक गिर जाएगी और भारतीय जनता पार्टी वहां अपनी सरकार बनाने में सफल हो...

वक़्त की नब्ज़: समर्थन का आधार

मोदी के पहले कार्यकाल में ग्रामीण भारत में काफी परिवर्तन आया है। कच्चे घर पक्के करने के लिए सरकारी मदद मिली है। घरों में...

वक्त की नब्ज: हिंसा का सिलसिला

पिछले हफ्ते की हिंसक घटनाओं ने साबित कर दिया है कि कानून को अपने हाथों में लेने से लोग अब डरते नहीं हैं। विधायक...

वक्त की नब्ज: बीमार स्वास्थ्य सेवाएं

उम्मीद करते हैं कि इस बार प्रधानमंत्री नहीं भुलाएंगे उन मासूम बच्चों को, जो मुजफ्फरपुर के उस अस्पताल में मरे हैं। इस बार परिवर्तन...

वक्त की नब्ज: पुराना भारत नया भारत

हकीकत यह है कि भारत के मतदाता बदल गए हैं और हमारे तकरीबन सारे विपक्षी राजनेता इस परिवर्तन को या तो देखना नहीं चाहते,...

वक्त की नब्ज: घाटी का दर्द

पुलवामा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कई बार कि पाकिस्तान से बातचीत का सिलसिला दोबारा तभी संभव होगा, जब पाकिस्तान सरकार...

वक्त की नब्ज: कांग्रेस के दिन

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने बहुत बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता है संगठन को मजबूत करना। सवाल है कि ऐसा...

वक्त की नब्ज: यह जीत उन्हें नहीं पच रही

जिस राजवर्ग को मोदी ने कमजोर किया है प्रधानमंत्री बनने के बाद, वह अभी तक स्वीकार नहीं कर पाया है कि भारत बदल गया...

वक्त की नब्ज: सियासत का खेल और खिलाड़ी

सत्रहवीं लोकसभा की कहानी का अंत जैसे जैसे पास आ रहा है, वैसे वैसे दिखने लगा है कि इस दौड़ में एक ही खिलाड़ी...

वक्त की नब्ज: वार, पलटवार

लगता है, राजीव गांधी को इस आम चुनाव में पात्र बनाया है सोची-समझी रणनीति के तहत। लगता है, ‘चौकीदार चोर है’ इतनी बार चिल्ला...

वक्त की नब्ज: बदलाव के बावजूद

महगठबंधन बना ही है इस डर से कि मोदी अगर दुबारा प्रधानमंत्री बन जाते हैं, तो देश का राजनीतिक चरित्र और बदल डालेंगे। मगर...

वक़्त की नब्ज़: जाएं तो जाएं कहां

उस दौर में गरीबी हटाने के नाम पर अमीरों पर सत्तानबे प्रतिशत टैक्स लगा था। मुंबई में मेरे उद्योगपति दोस्त बताते हैं कि टैक्स...

वक़्त की नब्ज़: नफरत और हिंसा की सियासत

साध्वी प्रज्ञा की जगह लोकसभा में किसी हाल में नहीं होनी चाहिए और न भारत की राजनीति में। भारत की पुरानी परंपरा के मुताबिक...