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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज- बर्बरता की हद

अफरोजुल की हत्या राजसमंद में इतनी बेरहमी से की गई थी कि वीडियो देखना मुश्किल था।

वक्त की नब्ज- नौकरशाही यानी गले में पत्थर

नौकरी मिलते ही जिंदगी बन जाती है। घर, गाड़ी, बिजली, पानी सब मिल जाता है अपने सरकारी अधिकारियों को और जहां प्रधानमंत्री को हर...

वक्त की नब्ज- खौफ का साया

दो दिन पहले हाफिज सईद को लाहौर की एक अदालत ने रिहा किया इस आधार पर कि उसके खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं हुए...

वक्त की नब्ज- परदेसी मीडिया का पूर्वाग्रह

पहली बार नहीं है कि मैंने ऐसा अज्ञान विदेशी पत्रकारों में देखा है। कुछ वर्षों के लिए मैंने लंदन के संडे टाइम्स के लिए...

तवलीन सिंह का कॉलम, वक्त की नब्ज- नोटबंदी का हासिल कुछ नहीं

दोनों पक्षों का खूब मजाक उड़ाया गया सोशल मीडिया पर। यह भी देखने को मिला पिछले दिनों कि इस देश के आम आदमी को...

वक्त की नब्ज- हकीकत से आंखें चुराने का सबब

गुजरात में नेहरू-गांधी परिवार के वारिस ने नोटबंदी और जीएसटी पर डट कर हमला किया है, यह कह कर कि मोदी के इन दोनों...

तवलीन सिंह का ब्लॉग वक्त की नब्जः कानून जहां कैद है

जब तक कानून-व्यवस्था को राजनेताओं के हस्तक्षेप से सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं है। समस्या यह भी है कि...

वक्त की नब्ज- कुपोषण से लड़ने की जरूरत

संतोषी की मां ने बार-बार कहा कि उसकी बेटी मरते दम तक चावल मांग रही थी, लेकिन एक लाचार, गरीब महिला की कौन सुनेगा,...

वक्त की नब्ज- सियासत का बदलता मिजाज

मैंने जब उनसे पूछा कि उनकी नजर में इस परिवर्तन की वजह क्या है, तो उन्होंने फौरन कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से चोट...

वक्त की नब्ज- कुछ हकीकत कुछ फसाने

याद कीजिए किस तरह पहली कोशिश उनकी थी ईसाई समाज में डर पैदा करने की। इस कोशिश में इतने सफल रहे कि बड़े-बड़े ईसाई...

वक्त की नब्ज- जो करना था, नहीं हुआ

मेरा वास्ता इन गरीब बच्चों से इसलिए है, क्योंकि इनको एक वक्त का सही पोषण देने के मकसद से मैंने कई साल पहले ‘नाश्ता’...

वक्त की नब्ज- तनाव के माहौल में विकास की बातें

मेरठ, मलियाना, हाशीमपुरा, भागलपुर, मुंबई, मुरादाबाद जैसे नाम आज भी अटके हैं मेरे दिमाग में।

वक्त की नब्जः वे वादे वे ईरादे!

अधिकतर भारतवासी मोदी को एक काबिल, ईमानदार और अच्छा राजनेता मानते हैं। उनकी कुछ नीतियों पर जिनको शक है वे भी मानते हैं कि...

वक्त की नब्ज- समस्या कुछ और है

सच यह है कि समस्या ही कुछ और है। असली समस्या यह है कि वामपंथियों का बोलबाला काफी हद तक कम हो गया है...

वक्त की नब्ज: नए भारत का सपना

हाइवे के दोनों तरफ दिख रही थीं बदसूरत नई इमारतें और पुरानी, बेहाल बस्तियां, जिनकी तंग गलियों में दिख रही थीं गंदी नालियां और...

वक्त की नब्ज: समाजवाद बनाम विकास का रास्ता

देश की आर्थिक दिशा अब भी समाजवादी है और आज मोदी उन्हीं शब्दों में गरीबी हटाने की बातें करते हैं, जैसे इंदिरा गांधी...

वक्त की नब्ज- किससे गले मिलें

क्या अमन-शांति लाने के लिए पाकिस्तान से भी मोदी बात करने को तैयार हैं? ऐसा है अगर तो क्या हम अपनी पाकिस्तान नीति...

वक्त की नब्ज- शिक्षा की खोखली बुनियाद पर

आज हाल यह है कि हमारे बच्चे जब कुछ वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय पीसा स्पर्धा में भाग लेने गए तो इतना बुरा हाल रहा उनका...