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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज: अच्छे काम, बुरे काम

मोदी ने चुप रह कर अपना ही नुकसान किया है, इसलिए कि विकास के नाम पर बहुत कुछ करने के बाद भी कलंक-सा लगा...

वक्त की नब्ज: सियासी विरासत, सामंती अहंकार

क्या इन सामंतवादी तरीकों पर सवाल नहीं उठाने चाहिए? क्या उन वारिसों को अस्वीकार करने का साहस नहीं दिखाना चाहिए, जो जनता की सेवा...

वक्त की नब्ज: गरीबी का मकड़जाल

अक्सर ऐसी योजनाओं के पीछे होते हैं ऐसे लोग, जिन्होंने न कभी गरीबी देखी है अपने जीवन में और न ही किसी गरीब भारतवासी...

वक्त की नब्ज: लोकतंत्र के बरक्स

पहलू खान के घर से जब निकली उस दिन, तो मुझे एक गहरी मायूसी होने लगी। इसलिए कि जिन देशों में इस तरह की...

वक्त की नब्ज: सेना के आधुनिकीकरण की जरूरत

हर रक्षा सौदे को घोटाला बनाते रहेंगे हम तो कैसे आधुनिकीकरण होगा हमारी सेनाओं का? समस्या सिर्फ वायु सेना की नहीं है, उतनी ही...

वक्त की नब्ज: नफरत की सियासत

जैसे जैसे चुनाव पास आ रहा है, वैसे वैसे दिखने लगा है कि इस महागठबंधन के पास एक ही चीज है और वह है...

वक्त की नब्ज: जरूरी सख्त कदम

अब समय है पाकिस्तान के इस कायर युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की रणनीति तैयार करने का। ठोस रणनीति तभी बन सकेगी, जब...

वक्त की नब्ज: मातम और सियासत

मातम का माहौल आज तो है देश भर में पुलवामा के शहीदों को लेकर, लेकिन कितने दिन रहेगा यह मातम? जिस दिन खत्म हो...

वक्त की नब्ज: यह आतंकवाद नहीं, युद्ध है

सच तो यह है कि पाकिस्तान बहुत पहले जान गया था कि पुराने किस्म के युद्ध अब नहीं हो सकते हैं दोनों देशों के...

वक्त की नब्ज: गलतियां बनाम उपलब्धियां

नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते लोकसभा में अपने कार्यकाल का आखिरी भाषण दिया। काश कि इस भाषण में उन्होंने अपनी बातें ज्यादा की होतीं...

वक्त की नब्ज: गरीबी बांटने की परंपरा

अच्छा हुआ कि आने वाले आम चुनावों से पहले ही हम जान गए हैं कि राहुल गांधी के राजनीतिक और आर्थिक विचार क्या हैं।...

वक्त की नब्ज: अस्त्र और ब्रह्मास्त्र

कांग्रेस पार्टी की समस्या यह है कि अभी तक वह उत्तर प्रदेश में जीतने की स्थिति में नहीं है, सो प्रियंका का ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाया...

वक्त की नब्ज: अज्ञान और विज्ञान

प्राचीन भारत ने विश्व को बहुत कुछ दिया है कई क्षेत्रों में। इस महान विरासत का विश्लेषण करना बहुत जरूरी है, ताकि इतिहास और...

वक्त की नजर: आरक्षण का झुनझुना

माना कि आरक्षण को हटाना कठिन है, क्योंकि इसके होने से बना है एक विश्वसनीय वोट बैंक, जो कोई भी राजनेता खोना नहीं चाहेगा।...

वक्त की नब्ज: चर्चा कम, तमाशा ज्यादा

शायद वे अंग्रेजी की उस कहावत को ध्यान में रख कर चल रहे हैं कि झूठ को बार-बार बोलने से झूठ सच बन जाता...

वक्त की नजर: किसका साथ, किसका विकास

गौरक्षा के नाम पर ऐसा आतंक फैल चुका है देश में कि गायों का पालना मुश्किल हो गया है, क्योंकि उनको खरीद कर घर...

वक्त की नब्ज: किसके निशाने पर देश

क्या प्रधानमंत्री के कानों तक अभी तक नहीं पहुंची हैं उनके मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की आवाजें? क्या उनको दिख नहीं रहा है कि ऐसी...

वक्त की नब्ज: मसीहा बनाम राजनेता

मसीहाओं की जवाबदेही नहीं होती, न कभी उन्हें अपनी गलतियां स्वीकार करनी पड़ती है। सो, आज तक मोदी ने कभी स्वीकार नहीं किया कि...