ताज़ा खबर
 

अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी के सभी पोस्ट

डिजिटल मीडिया का सच

भारतीय लोकतंत्र की व्यापक परिधि में आज भी वह परिपक्वता नहीं है, जो किसी स्वस्थ समाज और लोक कल्याणकारी राज्य के लिए आवश्यक है।...

व्याकरण की सामयिकता

हिंदी अपने मूल में लोकतांत्रिक भाषा है और स्थानीयता ही इसकी वास्तविक पूंजी रही है।

‘संचार’ कॉलम में अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी का लेख : संवाद में संकुचन

नील थाम्पसन ने कहा था कि ‘भाषा महज शब्दों का प्रयोग नहीं होती, बल्कि यह उस जटिल सरणि को संबोधित करती है, जो संपर्क...

भाषा : भारतीय राष्ट्रवाद और भाषाएं

असल में किसी भाषाभाषी में जब उच्चता का बोध आ जाता है, तो वह दूसरी भाषा नहीं सीखना चाहता।

सोशल नेटवर्क और सरोकार का मुखौटा

इंटरनेट एक माध्यम मात्र है। इस पर उपलब्ध कोई ऐप या वेबसाइट समाज के भूख, रोग और अशिक्षा को दूर नहीं कर सकता है।...