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पी. चिदंबरम

पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट 201 Articles

दूसरी नज़र: अर्थव्यवस्था से बेपरवाह सरकार

करीब साढ़े ग्यारह सौ किलोमीटर दूर मुंबई महानगर जो आरबीआइ, सेबी, शेयर बाजारों, कई सूचीबद्ध कंपनियों के कारपोरेट मुख्यालयों और बैंकों का शहर है,...

दूसरी नज़र: सस्ती नहीं है कश्मीर की जमीन

सबसे बुरा नतीजा तो तब होगा जब, ईश्वर न करें, पहले समूह के हजारों लोग दूसरे समूह में आ जाएंगे। तब भाजपा को अहसास...

दूसरी नजर: कष्टदायक संघवाद

भाजपा की सरकार एक अलग तरह की सरकार है। यह न तो राज्यों के अधिकारों का सम्मान करती है, न ही संवैधानिक सीमाओं और...

दूसरी नजर: असंवैधानिक और अवास्तविक

हर अर्थशास्त्री, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की समझ है (हाल में डा. कौशिक बासु) ने एक बार फिर गिरावट को लेकर चेताया है जो कि...

दूसरी नजर: खरबों डॉलर वाली अर्थव्यवस्था की ओर

1991 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 325 अरब अमेरिकी डॉलर का था जो 2003-04 में इसकी दोगुनी हो गई, और 2008-09 में फिर...

दूसरी नजरः सात फीसद वृद्धि के जाल में

गरीब अपनी किस्मत के हवाले हैं। मझोले कॉरपोरेट (4000) फेंके गए टुकड़ों का हिसाब लगाने में लगे हैं। बजट पर अगर कोई चर्चा...

दूसरी नजर: क्यों नाखुश होंगे तेरह अर्थशास्त्री

अर्थव्यवस्था को वैसे ही क्रांतिकारी सुधारों की जरूरत है जैसे 1991-96 में किए गए थे। सरकार को ऐसे सुधारों के लिए जनादेश मिला है।...

दूसरी नजर: एक देश, एक चुनाव, अनेक आशंकाएं

विपक्ष, कम से कम हिंदीभाषी राज्यों में, इस लायक था नहीं कि वह इस चतुराई भरी चुनावी चाल का जवाब दे पाता और लोगों...

दूसरी नजर: सरकार के भीतर सरकार

क्या इससे ज्यादा विध्वंसकारी और दर्दनाक कुछ हो सकता है? (2008 से 2014 के दौरान दिमागी बुखार से छह हजार मौतें हुई थीं।) कुछ...

दूसरी नजर: विरासत में मिली अर्थव्यवस्था

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जिस तेजी से तरक्की की है, उसकी मैंने तारीफ की है। पार्टी प्रवक्ता (2010) से वे 2014 में वाणिज्य मंत्री...

दूसरी नजर: क्या मोदी सबका भरोसा जीतेंगे

मुझे लगता है नरेंद्र मोदी खुश तो हैं, पर संतुष्ट नहीं हैं। ऐसा कुछ तो है जिसे वे समझ गए हैं और शायद उनकी...

दूसरी नजर: यह सबका विकास कैसे हो सकता है

स्वच्छ भारत के मामले में कड़वी सच्चाई यह है कि भारत के किसी भी बड़े राज्य (गुजरात को छोड़ कर) ने खुले में शौच...

दूसरी नजर: समावेशी बनें या न बनें

परिणाम पूर्व नतीजे इसके दो दिन बाद, 19 मई को आए और उनमें कम से कम दो पूरी तरह सटीक थे : भाजपा को...

दूसरी नजर: आखिर खत्म हुआ चुनाव प्रचार

राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, रैलियों और रोड शो, पैसे के खर्च, दी गई गालियां, हिंसा, चर्चित ईवीएम और वीवीपैट की गड़बड़ियों और चुनाव आयोग द्वारा...

दूसरी नजर: अर्थव्यवस्था खतरे में

अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के कारणों में पहला कारण तो यह है कि प्रधानमंत्री को वृहद अर्थशास्त्र के बारे में कुछ नहीं मालूम और वे...

दूसरी नजर: सच्चे दिन मिल सकते हैं!

नए भाषण में मोदी जबर्दस्ती भोलापन दिखाते हुए असाधारण दावे कर रहे हैं। वे औसत स्कूल या कॉलेज में पढ़े मतदाता की समझ को...

दूसरी नजर: अमर्यादित प्रचार

मुसलिम समुदाय को लेकर भाजपा ने नफरत भरे भाषणों को हथियार इस उम्मीद में बनाया है कि इससे दो समुदायों के बीच ध्रुवीकरण होगा...

दूसरी नजर: मोदी बनाम घोषणापत्र

2014 की भाजपा एक बेहतर संरचना वाली राजनीतिक पार्टी थी, जबकि 2019 की भाजपा एक आदमी पर निर्भर बन गई है। श्री नरेंद्र मोदी...