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पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट

दूसरी नजर, पी चिदंबरम का लेख- सत्य, उत्तर-सत्य और पुन: सत्य

अर्थव्यवस्था की हकीकत सबको मालूम है। जेटली का जवाब ‘उत्तर-सत्य’ था। मैं यह जरूरी समझता हूं कि हकीकत एक बार फिर बयान की...

दूसरी नजर- जम्मू-कश्मीर पर पुनरवलोकन

वे जानते हैं कि यह रुख किसी राजनीतिक समाधान की ओर नहीं ले जा सकता। एक अतिवादी छोर से दूसरे अतिवादी छोर के...

दूसरी नजर- विचित्र साल को अलविदा

हंसी बहुत सारी वजहों से आती है। कुछ घटनाएं और विषय तो वास्तव में बड़े विनोदपूर्ण होते हैं। अनजाने में हुई गलतियां भी हंसी-मजाक...

दूसरी नजर- गुजरात विजेता और अर्थव्यवस्था की लड़खड़ाहट

एक ऊर्जावान और तेज युवा धावक के साथ मुकाबले में भाजपा खेल खत्म होने तक सांसत में रही।

दूसरी नजर- अब कामकाज की तरफ लौटें

चुनाव सत्तारूढ़ दल के (गुजरात के मामले में बाईस साल के) कामकाज पर नहीं, बल्कि एक अशालीन टिप्पणी पर लड़े जाएंगे, जिसे तोड़-मरोड़ कर...

दूसरी नजर: भाजपा शासन के बाईस साल बाद गुजरात

1995 से एक के बाद एक भाजपा की सरकारों के बारे में है कि उन्होंने गुजरात की जनता के लिए क्या किया।

दूसरी नजर: गुजरात के भूमिपुत्र

प्नधानमंत्री में अपने चुनाव प्रचार का आरंभ यह कहते हुए किया कि वे ‘गुजरात के बेटे’ हैं, और चेतावनी दी कि कोई भी गुजरात...

दूसरी नजर- वे गरीबों को एजेंडे पर ले आर्इं

हर प्रधानमंत्री की सफलताएं और विफलताएं होती हैं। दोनों का आकलन समय-विशेष की पृष्ठभूमि में और उस संदर्भ में होता है जिनमें वे घटित...

दूसरी नजर- विकास और इससे वंचित लोग

भले परमाणु क्लब में देश के शामिल होने या मंगल पर यान भेजने पर गर्व अनुभव करते हों, मगर विकास की संतुष्टि उन्हें फौरी...

पी चिदंबरम का लेख, दूसरी नजर- जन कल्याण की कसौटी पर

नोटबंदी के एक साल बाद, उस फैसले का औचित्य ठहराने वाला हरेक तर्क खारिज हो गया है और उसका मखौल उड़ा है।

दूसरी नजर- जीएसटी की उधड़ती परतें

राजग/भाजपा सरकार ने सही जीएसटी के सिद्धांत का उल्लंघन किया, मुख्य आर्थिक सलाहकार की रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया और एक अपना जीएसटी तैयार...

दूसरी नजरः बेरोजगारी का विकास

शब्दों की ताकत तमाम कामकाज पर भारी पड़ जाती है। वित्तमंत्री की आवाज इसीलिए ऊंची और साफ थी, जिसे कि वे सन्निकट गुजरात के...

दूसरी नजर- भुखमरी का कलंक

इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत की आबादी के एक खासे हिस्से को साल में अनेक दिन भूखे रहना पड़ता...

दूसरी नजर- प्रधानमंत्री के लिए यथार्थ के संकेत

वहां केबिन की दीवाल पर एक नोटिस लगा था जिसमें बताया गया था कि आपातकालीन स्थिति में क्या करें। पहली हिदायत यह थी: ‘क्षण-भर...

दूसरी नजर- मकतूल और कातिल

जोन आॅफ आर्क को खंभे से बांध कर जला दिया गया था। सुकरात को जहर का प्याला पीना पड़ा। सर थॉमस मोर का सिर...

दूसरी नजर: 2014 का ग्रीष्म और अब

मैंने तो बस यही रेखांकित किया कि सिन्हा ने वही कहा है जो मैं और कई अन्य लोग पंद्रह महीनों से कहते आ रहे...

दूसरी नजर- उपभोक्ता, प्रतिस्पर्द्धा और अर्थशास्त्र

कुछ पेट्रोलियम उत्पादों खासकर केरोसिन और रसोई गैस पर सबसिडी देने से भी बचा नहीं जा सकता था, क्योंकि गरीबों पर उनकी कीमतों...

दूसरी नजरः कुछ नहीं मालूम दिल्ली

डीगें हांकने का वक्त गुजर चुका है। भारत अब दुनिया की सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रह गया है। पिछली सातों तिमाहियों में चीन...