पी. चिदंबरम

पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट 212 Articles

दूसरी नजरः सब कुछ राष्ट्र हित में

16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और नागरिकता संशोधन कानून लागू करने के...

दूसरी नजर: टुकड़े-टुकड़े गिरोह जीते

मई 2019 में भाजपा को सत्ता में लौटने के जनादेश के बाद कई भारतीयों को यह भरोसा करने के लिए समझाया गया कि भारत...

दूसरी नजर: अंधेरे में तीर चलाती कमजोर सरकार

सबसे नीचे की कर श्रेणी में करदाताओं को जो तथाकथित छूट दी गई है, उसने कर ढांचे को गड्डमड्ड कर दिया है और इससे...

दूसरी नजर: क्या वित्त मंत्री को काम आता है?

Budget 2020: वित्त मंत्री ने तीन प्रमुख विषयों को लिया है और हर विषय में कई हिस्से और कई कार्यक्रम हैं।

दूसरी नजर: सबसे अच्छे की उम्मीद, बर्बादी की तैयारी

नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. अभिजित बनर्जी के अनुसार अर्थव्यवस्था का ‘बहुत ही बुरा हाल’ है।

दूसरी नज़र: कानून और हकीकत

पांच अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति ने संवैधानिक आदेश 272 जारी कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और प्रस्तावित केंद्र...

दूसरी नजरः गुस्से में नौजवान

भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आज जिस तरह का गुस्सा और प्रतिरोध उठता हम देख रहे हैं, वह 1968 की घटनाओं जैसा ही है।...

दूसरी नजरः आधी आबादी का गणतंत्र

मुसलमानों से संबंधित मामलों को कम समर्थन मिलता है या उनका भारी विरोध हो जाता है। जम्मू-कश्मीर का ही उदाहरण लें। मुझे लगता है...

दूसरी नज़र: दबंगई रोकने की कोशिश

पिछले दो महीनों में भाजपा को हरियाणा में ठोकर लगी, महाराष्ट्र में उसे नकार दिया गया और झारखंड में हार गई। जिन राज्यों में...

दूसरी नजर: एक बजट को पलटते जाना

बजट बाद चर्चा में इन प्रस्तावों की खूबियों का एलान किया गया था। इनमें से हर एक को पलट दिया गया या वापस ले...

दूसरी नज़र: घायल है भारत की आत्मा

इन कदमों के पीछे जो इरादा है, वह मुसलमानों को इस बात का स्पष्ट संदेश देना है कि वे इस देश के समान नागरिक...

दूसरी नज़र: अर्थव्यवस्था से बेपरवाह सरकार

करीब साढ़े ग्यारह सौ किलोमीटर दूर मुंबई महानगर जो आरबीआइ, सेबी, शेयर बाजारों, कई सूचीबद्ध कंपनियों के कारपोरेट मुख्यालयों और बैंकों का शहर है,...

दूसरी नज़र: सस्ती नहीं है कश्मीर की जमीन

सबसे बुरा नतीजा तो तब होगा जब, ईश्वर न करें, पहले समूह के हजारों लोग दूसरे समूह में आ जाएंगे। तब भाजपा को अहसास...

दूसरी नजर: कष्टदायक संघवाद

भाजपा की सरकार एक अलग तरह की सरकार है। यह न तो राज्यों के अधिकारों का सम्मान करती है, न ही संवैधानिक सीमाओं और...

दूसरी नजर: असंवैधानिक और अवास्तविक

हर अर्थशास्त्री, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की समझ है (हाल में डा. कौशिक बासु) ने एक बार फिर गिरावट को लेकर चेताया है जो कि...

दूसरी नजर: खरबों डॉलर वाली अर्थव्यवस्था की ओर

1991 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 325 अरब अमेरिकी डॉलर का था जो 2003-04 में इसकी दोगुनी हो गई, और 2008-09 में फिर...

दूसरी नजरः सात फीसद वृद्धि के जाल में

गरीब अपनी किस्मत के हवाले हैं। मझोले कॉरपोरेट (4000) फेंके गए टुकड़ों का हिसाब लगाने में लगे हैं। बजट पर अगर कोई चर्चा...

दूसरी नजर: क्यों नाखुश होंगे तेरह अर्थशास्त्री

अर्थव्यवस्था को वैसे ही क्रांतिकारी सुधारों की जरूरत है जैसे 1991-96 में किए गए थे। सरकार को ऐसे सुधारों के लिए जनादेश मिला है।...

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