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किताबें मिलीं: कविता का शहर, समकालीन हिंदी पत्रकारिता और कहीं कुछ नहीं

‘खामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है और इस खेल का मजा ले रहा है। क्या सचमुच खामोशी...

कहानी: नींद का झोंका

वैभव रोज सुबह देर से उठता। हालांकि अब वह पांचवी कक्षा में आ गया था, पर देर से जागने की उसकी आदत सुधरी नहीं...

नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते...

देसी फैशन के दीवाने युवा, हैरम पैंट से लेकर धोती सलवार तक

पहनावे को लेकर निरंतर प्रयोग हो रहे हैं। कभी प्राचीन से लेकर मध्य कालीन परिधानों को नए अंदाज में पेश कर फैशन की दुनिया...

सेहत: पाएं थायराइड से मुक्ति, जानिए कारण और उपचार

जल्दी थक जाना, सुस्ती रहना, याद्दाश्त कमजोर होना, अवसाद में आना, बालों का झड़ना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना आदि परेशानियां अगर आपको...

दाना पानी: सौंफ का शर्बत, बेल का शर्बत और फालसे का शर्बत

गरमी के मौसम में धूप और लू की वजह से शरीर का पानी तेजी से कम होता है, जिसके चलते बार-बार प्यास लगती है।...

आधी दुनिया: होड़ क्यों, बराबरी कैसी

आजकल अक्सर महिला सशक्तीकरण को लेकर कई तरह के सवाल और कयास लगाए जा रहे हैं। महिलाएं निरंतर अपने अधिकारों के लिए लड़ रही...

शख्सियत: पंडिता रमाबाई, पितृसत्ता से थी लड़ाई

रमाबाई का बचपन का नाम रमा डोंगरे था। उनके संस्कृत ज्ञान की वजह से उनके नाम के आगे पंडिता लगा। उन्हें संस्कृत और वेदों...

कविताएं: संदूक, आपाधापी और उद्घाटन

सुबह-शाम मिलते हैं लोकल ट्रेनों, बसों में। बरसों से अगल-बगल, आमने-सामने उठते-बैठते। एक-दूसरे को चीन्ह गए हैं-

प्रसंगवश: सांस्कृतिक उदारवाद, राष्ट्रीयता और दिनकर

दिनकर के वैचारिक-सांस्कृतिक लेखन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति ‘संस्कृति के चार अध्याय’ (1956 ई.) है। इसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल उपादानों का ऐतिहासिक...

कहानी: अमलतास के फूल

मैं कमरे से निकल बाहर बालकनी में खड़ी हो गई। स्मृतियां घुमड़ती रहीं, जैसे यह अभी कल की बात हो। वसंत ऋतु विदा ले...

खुराना से खेतान तक जारी है अंधविश्वास की कहानी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबियों में शुमार आशीष खेतान की दिल्ली डायलॉग कमीशन (डीडीसी) के उपाध्यक्ष पद से समयपूर्व विदाई के बाद...

मां पर बेटे की हत्या का आरोप, पिता ने कहा – दादा-दादी के पास होता तो जिंदा होता बेटा

जानकी विहार में महिला पर अपने आठ महीने के बेटे चिराग को मौत के घाट उतारने का आरोप है।

चौपालः समाज किधर

बलात्कार की बढ़ती वारदातें गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसी घटनाएं समाज और सरकार दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।

चौपालः जाति की दीवारें

देश में आर्थिक व सामाजिक उत्थान के बावजूद झूठी शान के नाम पर हत्या की समस्या फन फैलाए खड़ी है। इस कुकृत्य ने समाज...

दुनिया मेरे आगे: कूड़े के पहाड़

आज जिस तेजी से शहरों में ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ के फार्मूले का प्रयोग किया जा रहा है, डर है कि यह संक्रमण की...

संपादकीयः बांग्लादेश के साथ

लंदन में राष्ट्रमंडल देशों की बैठक से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश, सेशल्स और मॉरीशस सहित कुछ देशों के शासन प्रमुखों से मुलाकात...

संपादकीयः संतुलित रुख

भारत ने सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका के मद्देनजर दुनिया भर में उठ रहे सवालों के बीच जो रुख अपनाया है...