जनसत्ता के सभी पोस्ट 19594 Articles

जब आम लोगों की जान पर बन आई

हिसंक झड़प के बाद जामिया नगर, ओखला, कालिंदी कुंज, अबूल फजल, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, होली फैमली, तैमूर नगर, जाकिर नगर, मथुरा रोड इलाके में...

चौपाल: विलय समाधान नहीं

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में पांच सहयोगी बैंकों के विलय से कोई चमत्कार नहीं हुआ, बल्कि दो सौ साल में पहली बार स्टेट बैंक...

चौपाल: मंशा और सवाल

पिछले कुछ वर्षों से सरकार ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिए अनेक प्रयत्न किए, चाहे उसमें लव-जिहाद, घर वापसी, नोटबंदी, करों में वृद्धि,...

दुनिया मेरे आगे: पोंआर पर तितली

बारिश इन सब जीवों के लिए प्रकृति का वरदान होती है। तरह-तरह के कीट-पतंगे देखने को मिलते हैं और वे पतंगे भी, जिनका जीवनकाल...

राजनीति: संकट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था

कृषि का योगदान भले ही कम हो, लेकिन आबादी के लिहाज से वह देश का सबसे बड़ा व्यवसाय आज भी है। देश की आधी...

संपादकीय: बोरिस की वापसी

ब्रिटेन में पिछले पांच साल में तीन बार चुनाव हुए हैं और देश ने चार प्रधानमंत्री देखे हैं। इन चुनावों का सबसे बड़ा मुद्दा...

संपादकीय: विद्रोह का रुख

पूर्वोत्तर में हिंदू और मुसलमान का मामला नहीं है। वहां कई जनजातीय समुदाय हैं, जो अपनी पहचान के लिए लंबे समय से संघर्ष करते...

दंगे के जख्म पर एक मरहम : ‘1984 स्टोर ब्रांड’

दुकान केवल सिख दंगों के शिकार परिवार के लोगों के लिए ही होगी। इसे वे ही चलाएंगे। अपनी आजीविका कमाएंगे। मुनाफा भी उन्हीं में...

75 हजार करोड़ की अटकी परियोजनाओं को हरी झंडी

रेल मंत्रालय वर्तमान में जिन अहम योजनाओं को लागू करने में लगा है उनमें अलग से मालवाहक ट्रेक, सीसीटीवी निगरानी, सिग्नल सिस्टम को अपग्रेड...

कविता: आओ हम खेलें फुटबॉल

मारी किक तो हुआ कमाल! जम कर होने लगा धमाल! सभी देख कर दंग रह गए, दादा पोते का भौकाल!

कहानी: चुलबुली

सुधा गुप्ता ‘अमृता’ चिंटू के घर के सामने एक गुलमोहर का पेड़ था। उसमें लाल-नारंगी से बहुत खूबसूरत फूल खिलते, जो सबका मन मोह...

दाना-पानी: मटर के हरियाले व्यंजन

हरे मटर की दाल का स्वाद लाजवाब होता है, पोहे में इसके दाने स्वाद चौगुना कर देते हैं। इसी तरह के मटर के कुछ...

शख्सियत: श्रीनिवास रामानुजन

1909 में रामानुजन की शादी हो गई। नौकरी ढूंढ़ने के दौरान वे कई प्रभावशाली व्यक्तियों के संपर्क में आए। नेल्लोर के कलेक्टर और ‘इंडियन...

योग दर्शन: दांपत्य जीवन और योग

दांपत्य जीवन सुखी तभी हो सकता है जब संस्कारों को महत्त्व दिया जाए। मनुष्य जीवन का एक लक्ष्य मानव निर्माण करना भी है।

ललित प्रसंग: इंद्रधनुष का इंतजार

जनता पूछती है कि यह कैसा डिजीटल इंडिया? यह कैसा महाजनी सभ्यता से छुटकारा? लेकिन ये सवाल शून्य में उभरती चीखों से अधिक रुतबा...

कविताएं: गंध

ऐसे लोग कम नहीं जो अपने घर का पता भी भूल जाते हैं...भटकते हैं वे उम्र भर, जिन्हें अपना चेहरा भारी लगता है।

कहानी: आखिर क्षमादान

सुंदर के मन में आया कि इस अंगद को कम से कम एक झापड़ तो दे ही दूं, लेकिन उसने अपने को संयमित किया...

इंटरनेट से दूषित होता मानस

इंटरनेट क्रांति और इंटरनेट के हर जगह पहुंचने ने अश्लील और वीभत्स यौन-चित्रण को देखना आसान बना दिया है। आज यह हर वर्ग और...

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