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पी. चिदंबरम का कॉलम: सरकार के लिए नए साल के संकल्प

नए साल के संकल्प करना मैं पसंद नहीं करता, लेकिन दूसरों के लिए संकल्प तय करते हुए मैं खुश हूं, इस पक्के विश्वास के साथ, कि एक हफ्ता बीतते-बीतते वे संकल्प तोड़ दिए जाएंगे।

Author January 3, 2016 08:45 am
मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि सरकार का ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा धोखा साबित हो रहा है।’

नए साल के संकल्प करना मैं पसंद नहीं करता, लेकिन दूसरों के लिए संकल्प तय करते हुए मैं खुश हूं, इस पक्के विश्वास के साथ, कि एक हफ्ता बीतते-बीतते वे संकल्प तोड़ दिए जाएंगे। गरीबों और सीधे-सादे लोगों के लिए संकल्प प्रस्तावित करने में कोई मजा नहीं है। बेहतर होगा कि ताकतवर लोगों से संकल्प करवाए जाएं, और यह देखा जाए कि वे कितने मजेदार ढंग से उन्हें तोड़ते हैं।

वह कौन या क्या है आज इस देश में, जो सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है? निस्संदेह मोदी सरकार, या जैसा समझा जाता है कि लगभग हर जगह मौजूद वे लोग जो नफीस सूट पहनते हैं, मीडिया, लोकसभा के 281 निर्वाचित +2 (मनोनीत) सदस्य, संघ परिवार कहा जाने वाला प्रसन्न परिवार, हमेशा हौसला बनाए रखने वाले भक्त और स्वयंसेवक। लिहाजा, मुझे इजाजत दीजिए कि मैं नरेंद्र मोदी सरकार के लिए नए साल के कुछ संकल्प प्रस्तावित करूं।

1. हम प्रधानमंत्री को इस बात के लिए राजी करेंगे कि वे भारत के विभिन्न भागों का दौरा करें- जो कि उतना ही प्यारा देश है, जितना अमेरिका, फ्रांस, चीन, जापान या फीजी- और भारत के लोगों को संबोधित करें, जो कि उन भाइयों और बहनों जितने ही मित्रवत हैं, जो मेडिसन स्क्वेयर या वेंबले स्टेडियम में बड़ी तादाद में इकट्ठा हुए थे। हम मानते हैं कि भारत में रहने वाले जिन इकतीस फीसद मतदाताओं ने राजग के लिए वोट दिया था, वे प्रधानमंत्री को देखने-सुनने के उतने ही हकदार हैं जितने कि अनिवासी संभावित मतदाता।

2. सरकार और पार्टी में उन लोगों को सख्त चेतावनी दी जाएगी, जो अपनी मनगढ़ंत स्थापनाएं और पसंदीदा फरमान जारी कर अपनी भड़ास निकालने से बाज नहीं आते। उनसे कहा जाएगा कि वे यह सब फौरन बंद करें। अगर नहीं कर सकते, तो पाली या प्राकृत में अपनी बात कहें- और मीडिया को उसका अनुवाद जारी नहीं किया जाएगा।
अर्थव्यवस्था के लिए
3. हम जीडीपी से जुड़ी उम्मीदें और अनुमान थोड़ा-थोड़ा करके घटाएंगे। 2015 में विकास दर साढ़े आठ फीसद रहने का अनुमान जनवरी में लगाया गया था, दिसंबर आते-आते यह 7.3 फीसद रह गया। इतना ज्यादा अंतर रहने से हमारी गलती पता चलती है। जबकि छोटे कदमों पर कम ध्यान जाता है। वित्तमंत्री के लिए कोई कदम या अंतर भले छोटा हो, पर अर्थव्यवस्था के लिए छोटा नहीं है।

4. हम डॉ रघुराम राजन और डॉ अरविंद सुब्रमण्यम के पद परस्पर बदल देंगे, जिससे रिजर्व बैंक के गवर्नर के तौर पर डॉ सुब्रमण्यम ब्याज दर घटा सकें (जो उनकी लंबे समय से चाहत रही है), और मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर डॉ राजन राजकोषीय घाटे में कमी कर सकें (जो काफी समय से वे चाहते रहे हैं)।
सुशासन के लिए
5. हम मुख्य एजेंसियों के अधिकारों को पुनर्परिभाषित करेंगे। सीबीआइ को नया राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग बना देंगे, खुफिया ब्यूरो को प्रेस सूचना ब्यूरो, और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड। नए सिरे से अन्य एजेंसियों के अधिकार आरएसएस के साथ उचित सलाह-मशविरे के बाद तय किए जाएंगे।

6. वर्ष 2016 में होने वाले विधानसभा चुनावों में हमारा नारा होगा ‘चलो चलें अमित शाह के साथ’। चूंकि इन पांच राज्यों में से हमें किसी में भी जीत का भरोसा नहीं है, हम किसी को भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं करेंगे। भगवान भले न चाहे, मान लो हम जीते, तो हम अमित शाह को उस राज्य का मुख्यमंत्री बना देंगे।
7. हम एक अध्यादेश लाएंगे ताकि क्रिकेट संघ (खासकर राजस्थान क्रिकेट संघ) अपने कार्यालय भारत के बाहर रख सकें और वहां अपनी कार्यकारिणी तथा आमसभा की बैठकें कर सकें। फिर, ललित मोदी उन बैठकों में शामिल होने की कृपा कर सकेंगे और प्रवर्तन निदेशालय को ठिकाने का पता नहीं चल पाएगा।

8. हम दिल्ली में एक ही नगर निगम होने की स्थिति को बहाल कर देंगे और एमसीडी को वे सारी शक्तियां सौंप देंगे जो इस केंद्रशासित क्षेत्र की सरकार को हासिल हैं। फिर, दो समान शक्ति-केंद्रों (उपराज्यपाल और महापौर) के बीच अरविंद केजरीवाल की हालत बड़ी विचित्र होगी। हम दिल्ली में मार्शल लॉ घोषित करने और पुलिस आयुक्त को मार्शल लॉ प्रशासक नियुक्त करने (मुख्य रूप से यातायात, प्रदूषण नियंत्रण और जांच आयोगों के काम के लिए) का अधिकार विचाराधीन रखेंगे।

9. हम प्रधानमंत्री से गुजारिश करेंगे कि वे ‘टाइम्स नाउ’ चैनल को एक निर्बाध इंटरव्यू देना मंजूर करें, एक फेरबदल के साथ- साक्षात्कार जैन बंधुओं द्वारा लिया जाए, जो चैनल के मालिक हैं। देश भी जानने को इच्छुक है और जैन बंधु भी यह जानना चाहते हैं कि अर्णव गोस्वामी के बारे में प्रधानमंत्री क्या राय रखते हैं।

10. हम आखिरकार मंत्रिमंडल में फेरबदल का काफी समय से अटका वादा पूरा करेंगे। चार शीर्षस्थों (जिन्हें नार्थ ब्लाक या साउथ ब्लाक से हटाया नहीं जा सकता) के नए मंत्रालय इस प्रकार होंगे: राजनाथ सिंह- वित्तमंत्री; सुषमा स्वराज- गृहमंत्री; अरुण जेटली- रक्षामंत्री; और मनोहर पर्रीकर- विदेशमंत्री। इस तरह हम पहले के बेमेलपन की जगह नए ढंग का बेमेलपन देखेंगे।
नए साल की शुभकामनाएं!

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