सेहत के सामने

क्या वास्तव में आज व्यक्ति अपनी सेहत को लेकर इतना लापरवाह हो गया है? क्या सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इतनी लचर…

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दोहरी जिम्मेदारी का वक्त

समाज सामुदायिक भावनाओं की वह इकाई है, जिसके व्यापकता ग्रहण करने पर राष्ट्रीय स्वरूप सामने आता है। सामाजिक संदर्भों में…

कहानी : दो हंसों का जोड़ा बिछुड़ गयो रे

डाउन 5622 पूर्वोत्तर भारत से जोड़नेवाली एक प्रमुख रेल लेकिन सिरदर्द रेल । फौजी यात्रियों की अधिकता। दोगुने-तिगुने लोग। आरक्षण…

दो सवाल

योगेंद्र यादवजी, आम आदमी पार्टी (आप) में आपने ‘स्वराज’ और ‘लोकतंत्र’ का मुद्दा उठाया इसके लिए प्रशांत भूषण, अजित झा…

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