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रविवारी

केशों का तिलिस्म

न्यायपुर के युवराज अतुल्य विक्रम की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली थी। बुद्धि और बल उनका कौशल देखते ही बनता।

खिलौने बदले, बदले हम

वह बचपन ही क्या, जिसमें खिलौने न हों। खिलौनों के प्रति बच्चों का सहज आकर्षण होता है। चाहे वह अमीर हो या गरीब, हर...

सेहत- सामाजिक भय की मनोग्रंथि

कुल मिला कर एक नकारात्मक सोच दिल-दिमाग में ऐसी बन जाती है, जिसमें असुरक्षा, भय, भ्रम- सब होता है। इस स्थिति को ही सोशल...

दाना-पानी: बाजरे की खिचड़ी,बथुआ-मूंग की दाल

बाजरा ऊर्जा बहुत अच्छा स्रोत है। यह कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे दिल संबंधी बीमारियों के होने का खतरा कम हो...

संचार तकनीक-उपकरणों की रंग-रंगीली दुनिया

नवजात शिशु को मृत घोषित करने वाले अस्पताल के खिलाफ केवल एफआइआर लिखा देना और एक डॉक्टर को छुट्टी पर भेज देना ही समस्या...

प्रसंगवश- यहां तदर्थ सुविधा नहीं है

साहित्य का बुनियादी सवाल प्राथमिकता का सवाल है। और यही बस अकेला सवाल है।

कविताएं- शोकसभा, दीमक

तरसेम गुजराल की कविताएं।

कहानी- आखर संगीत

सरस्वती बाबू ने मन ही मन तय कर लिया था कि वे अपने गांव में ही मां की याद में एक पाठशाला खोलेंगे और...

छोटे शहरों के बड़े रंगकर्म

थिएटर आज भी कुछ रंगकर्मियों के जुनून के बल पर जिंदा है और विकसित हो रहा है। छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में भी ऐसे...

कविता- सवाल-जवाब

शादाब आलम सवाल-जवाब सबसे सुंदर फूल कौन सा? फूल गुलाब। सही जवाब। लालकिला में चूहा दौड़े हवा महल में नाचे बिल्ली किन शहरों में...

बाल कहानी- डायरी ने खोला भेद

स्कूल के एक कर्मचारी मुन्नालाल ने उसे छत पर कुत्ते के एक पिल्ले के साथ पकड़ा था। पिल्ले के मुंह पर सेलोटेप चिपका था।...

आदि परंपरा के आभूषण

रानी-महारानियों से लेकर आदिवासी महिलाएं तक- सब अपने-अपने तरीके से सजती-संवरती हैं।

सेहत- निंदिया न बैरन हो जाए

अच्छी और पूरी नींद अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

दाना-पानी- हरा-भरा पनीर टिक्का, आलू-कचालू चाट

सर्दी में कुछ गरमागरम चटपटा खाने का मन बहुत होता है। खासकर छुट्टी वाले दिन जब फुरसत में हों तब और।

संस्कृतिज-बादल बाउल बजाए रे इकतारा

बाउल गीति ने बंगाल के सांस्कृतिक जगत में बहुत कुछ जोड़ा है। पिछले कई दशकों से बाउल बंगाल के बाहर भी गूंजता आया है।

भाषा-भेदी- देखना की उछलकूद

संस्कृत की धातु दृश् से हिंदी में दो शब्द परिवार बने हैं- देखना और दर्शन।

विमर्श- सिकुड़ता लेखक-पाठक संबंध

पिछले लंबे अरसे से यह समस्या साहित्य से जुड़े हर व्यक्ति को परेशान किए है कि आम पाठक साहित्य से कट गया है और...

कहानी- वह एक पल

मां-बाप, पत्नी, बेटा, बहन, भाई, भाभियां, जीजा- सभी उसे दोषी लग रहे थे। किसी ने भी उसे समझने की कभी कोशिश नहीं की। पिता...