रविवारी

कविता: बाल दिवस

चाचा नेहरू को भाता था... बच्चों संग जन्मदिन मनाना... बड़ी खुशी देता था उन्हें... कोट पर गुलाब लगाना।

नन्ही दुनिया: गलती की सजा

नन्हीं चील मां से बोली। पहली बार खुले आकाश में उड़ना उसे बहुत अच्छा लग रहा था। नहींं। जिद नहीं करते। रात होने वाली...

किसी धरोहर से कम नहीं पटोला साड़ी

पटोला साड़ी का इतिहास कोई एक हजार साल पुराना है। 12वीं शताब्दी में सोलंकी वंश के राजा कुमरपाल ने महाराष्ट्र के जलना से बाहर...

बढ़ाएं शरीर की ताकत

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार शरीर को प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों और समस्याओं से बचाते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एंटीऑक्सीडेंट आहार...

दाना-पानी: सेहत भी स्वाद भी

मौसम में कई ऐसी चीजें बाजार में उपलब्ध होती हैं, जिन्हें खाने से वर्ष भर सेहत ठीक रह सकती है। उनमें आंवला और कच्ची...

शख्सियत: सालिम अली

अली और उनके सभी भाई-बहनों की परवरिश इनके मामा अमिरुद्दीन तैयाबजी ने की। अमीरुद्दीन शिकार के शौकीन थे साथ-साथ प्रकृति-प्रेमी भी। अपने मामा के...

आधी दुनिया: सौंदर्य उद्योग और स्त्रियां

कोई कह सकता है कि यदि औरतों में सुंदर दिखने की चाह बढ़ी है, तो किसी को क्या तकलीफ। सच बात है। लेकिन यह...

अवसर: संस्कृत साहित्य के भगीरथ

मोनियर के संस्कृत प्रेम की कहानी रोचक है। कहा जाता है कि मुंबई में बचपन के दिनों में उनका संपर्क संस्कृत के एक शिक्षक...

कहानी: मिसाल

इस छप्पन साल की उमर में भी उनकी आंखों में विशेष चमक थी, जैसे जता रही हो हमसे, ‘इंसान पैसे से नहीं, अपने व्यवहार...

आभासी दबंगई

एक भारतीय फाउंडेशन ने अपने अध्ययन में यह बताया कि कमजोर शैक्षणिक व्यवस्था और शिक्षा के निचले स्तर के कारण भारतीय बच्चे पश्चिमी समाज...

कार्टूनों का असर

एक शोध, बच्चों पर तीन गहरे प्रभाव की चर्चा करता है। पहला, ऐसे बच्चे दूसरों के दुखों और विपत्तियों के प्रति असंवेदनशील होने लगते...

बच्चों की बदलती दुनिया

बच्चों में आ रहे बदलावों के समाज पर कई प्रतिकूल प्रभाव देखे जाने लगे हैं। बच्चों की बदलती दुनिया के बारे में विमर्शपरक विश्लेषण...

अनुवाद का बढ़ता बाजार

अनुवाद की व्यापकता बताती है कि अनुवाद कर्म अब सिर्फ व्यक्तिगत रुचि का विषय नहीं रह गया है, सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं पर...

विश्व बाजार में अनुवाद

जिस गति से व्यावसायिक-वाणिज्यिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है, मनोरंजन और सूचना के साधन बढ़ रहे हैं, उसी हिसाब से अनुवाद का बाजार...

किताबें मिलीं: ज्ञान का ज्ञान

भारत को समझने का लक्ष्य लेकर यहां आए विदेशी विद्वानों को भी उपनिषदों से प्यार हुआ है। मूलभूत प्रश्न है कि क्या तेज रफ्तार...

कविता: गीदड़ की शामत

गीदड़ भाई! शामत जिसकी आई... गया शहर को...मेरी मानो... लौट चलो... तुम भी संग वापस घर को।

नन्ही दुनिया: ऐसे हुई बिजली की बचत

आलू के गरमा गरम स्वादिष्ट परांठे खाकर जब वे तीनों कैरम खेलने दूसरे कमरे में जाने लगे, तो शिखर ने पंखे का स्विच बंद...

पारंपरिक परिधानों में इतरा कर चलें

हम भारतीय हैं और हमें अपनी परंपराओं पर गुमान है। परंपरा में हम रचे-बसे हैं। केवल इतना कहने भर से काम नहीं चलेगा। भारत...