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रविवारी

आखिर क्यों हो फांसी की सजा

फांसी की सजा के कानूनी प्रावधान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि किसी के जीने...

समाज: रिश्तों से ऊबे उकताए लोग

तालमेल का अभाव विवाह में हावी होते शहरी जीवन की एक सच्चाई है, क्योंकि अनुमान है कि अब हर साल दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में...

शख्सियत: महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन, किया था 3884 प्रमेयों का निर्माण

रामानुजन को गणित से इतना प्रेम था कि वे रात भर जाग कर सूत्र लिखते थे। उन्हें जो छात्रवृत्ति मिली थी, उससे उन्होंने शोधपत्र...

किताबें मिलीं: मोहनदास नैमिशराय: चुनी हुई कहानियां, मन के दस संसार और कोयला भई न राख

इस संकलन की कहानियों में जहां दलित सवालों और समस्याओं को शिद्दत के साथ उठाया गया है, वहीं दलित इतिहास से राजनीति पर भी...

जड़ों की तरफ लौटता फैशन

फैशन में यह समय जड़ों की तरफ लौटने का है। हम अपने प्राचीन संगीत नृत्य और ताल को खोज रहे हैं। परंपरागत पहनावे और...

नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

जब किसी के चलने की धीमी-धीमी आवाज आती है, तो उसे आहट कहते हैं। जैसे उसके आने की आहट मुझे मिल गई थी। जबकि...

कहानी: बिल्ली का बच्चा

एक सुबह अन्नू अपने घर की छत पर टहल रही थी। पिछली रात हल्की बारिश हो चुकी थी। अब मौसम साफ था और धूप...

सेहत: कब्ज से रहें दूर

सिर्फ कब्ज की वजह से शरीर में कई अन्य तरह की बीमारियां पैदा होनी शुरू हो जाती हैं। इसलिए किसी भी समस्या को बहुत...

दाना-पानी: मटर पराठे और मूंगदाल बथुआ

सर्दी के मौसम में इससे कई व्यंजन बनते हैं। सब्जियों में तो लोग डालते ही हैं, इसकी दाल, घुघनी, पकौड़े, यहां तक कि बरफी...

विमर्श: व्यंग्य की अस्मिता और स्थापना

सीधी बात कहने से भाषा में शक्ति नहीं आती, लेकिन जब भाषा के तेवर पैने व आक्रामक हों तो वे व्यंग्य बन जाते हैं।...

कविताएं: जरूरी है टकराना, जो भीतर है और मेरा सपना

जो भीतर है वह बाहर भी होता तो क्या होता? भूखों की वापसी का पता होता कबूतर या तोता नहीं होता

कहानी: गुनहगार

कैसा अभागा रहा तू। तुझे मुझे भेजना था जबकि मैं तुझे भेज रहा हूं।’ रोते हुए पिता ने अपनी लाठी उठाई और घनश्याम कक्का...

जीन संपादन से क्लोन निर्माण

जीन विलीन करने की तकनीकों की मदद से पहले भी दो चुहियों से एक संतान पैदा की गई थी, लेकिन उसमें कुछ कमियां रह...

संरचना में सेंध

अभी तक यही माना जाता रहा है कि मानव के डीएनए में बदलाव संभव नहीं है। जीन के सूत्र सदा अपरिवर्तित रहते हैं। पर...

कहानी: मुख्यालय

पुलिस दस्ते के साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट साहबान अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचेंगे। कानून और शांति-व्यवस्था हर सूरत में बनाए रखनी है। किसी भी तरह का...

चिंतन: नीर की निर्मलता

हमारे यहां ही नहीं दुनिया भर में जो यह माना जाता रहा है कि तन-मन दोनों निर्मल होने चाहिए, उसके पीछे की सोच यही...

ललित प्रसंग: मोरा हीरा हेराय गया कचरे में

कबीर का बोध विराट का बोध है। उनकी विकलता विराट के बोध से उत्पे्ररित विकलता है। इसीलिए कबीर की वाणी में व्याप्ति है। इसीलिए...

किताबें मिलीं: चीन डायरी, मुंबई की लोकल, केजरीवाल की सियासत और योग ही जीवन

अकेला घर हुसैन का’, ‘कटौती’ और ‘जिबह बेला’ के बाद निलय उपाध्याय का चौथा काव्य संकलन है ‘मुंबई की लोकल’। निरंतर बाजारू होते जाते...