रविवारी Archives - Jansatta
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रविवारी

नन्ही दुनियाः कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते...

नन्ही दुनियाः कहानी – चिड़िया का बच्चा

पिंकी स्कूल से घर लौटी थी। जैसे ही उसने घर में प्रवेश किया, उसे लगा कि बस्ते पर कोई चीज गिरी है। इसी बीच...

नकली जिंदगी, जानलेवा खेल

पिछले कुछ सालों में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से खेले जाने वाले खेलों का बाजार काफी बढ़ा है। इन खेलों में ऐसे...

सेहतः बच्चों के पेट में कीड़े

बच्चों के पेट में कीड़े होना आम बात है। बचपन में वे इतने समझदार नहीं होते हैं कि खुद का भला-बुरा समझ पाएं।

दाना-पानीः मक्के के पकवान

इस मौसम में मक्का खूब पैदा होता है। इसे आग पर भून कर या फिर उबाल कर खाना हर किसी को अच्छा लगता है।...

इतिहासः बंटवारे की लकीर

वे हादसों के दिन थे। कमोबेश हर घटना हादसों की मानिंद घट रही थी। चारों तरफ विसंगतियां, विरोधाभास भरे पड़े थे। यह एक ऐतिहासिक...

प्रसंगः आलोचना पर सवाल बनाम आलोचना के सवाल

हिंदी आलोचना में कुछ आलोचक कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक सब पर एक ही भाषा और शब्दावली में बात करते हैं। रचना में पैठने, उसकी...

मूल्यांकनः जनमुक्ति का योद्धा कवि

आधुनिक हिंदी कविता के परिदृश्य में कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ का आगमन 1930 के युग में हुआ था, जब एक तरफ स्वाधीनता आंदोलन तीव्रतर...

कहानीः फटा जूता

सारा सामान रख लिया, कुछ रह तो नहीं गया! सोलंकी ने एक दृष्टि जमीन पर बिछी बोरी पर डाली। हां, सब कुछ रख लिया,...

रविवारीः एक हराभरा गोरखधंधा!

बढ़ते भूमि और जल प्रदूषण, उत्पादन बढ़ाने की मंशा से जीन फसलों, रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से अनाज-फल-सब्जियों में जहरीले तत्त्व घुले...

नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते...

नन्ही दुनिया: कहानी – घमंडी धोलू

रूकरा गांव में एक बहुत पुराना नीम का पेड़ था। उस पर कई प्रकार के पंछी रहते थे। उनमें आपस में बहुत प्रेम था।...

मोटे हैं तो क्या हुआ

कुछ साल पहले तक मोटे शरीर वाले स्त्री-पुरुषों के लिए फैशन एक तरह से दूर की कौड़ी थी। जब वे बाजार में अपने लिए...

सेहतः नाखून चबाने की आदत

अक्सर लोगों को नाखून चबाते देखा जाता है। नाखून चबाने की आदत बच्चे, जवान और बूढ़े सभी में होती है। यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या...

दाना-पानीः बरसात में खानपान

परवल यों तो आजकल हर मौसम में मिल जाता है, पर इस मौसम में उसकी पैदावार अधिक होती है। इसकी खेती असम, बंगाल, ओड़िशा,...

ललित प्रसंगः सही जवाब की शिनाख्त

हम जो कुछ भी देख रहे हैं, देख पा रहे हैं, वह वास्तविकता नहीं है। वास्तविक नहीं है है। वह सब किसी की महत्त्वाकांक्षा...

कहानीः नुक्कड़ नाटक

सड़क के दार्इं तरफ देखते ही पिंकी की सांस की नली में डाट-सा लग गया। इससे पहले उस युवा स्त्री का दिल इतना तेज...

कविताएं: रोशनी में अंधेरा

मिथिलेश श्रीवास्तव की कविता