दुनिया मेरे आगे Archives - Jansatta
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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: सड़क पर पन्ने

बेहद अपनी-सी लगती है यह सड़क, पर यह बुनता हुआ खयाल एकदम से टूट जाता है। जैसे ही यह भान होता है कि इस...

दुनिया मेरे आगे: कित्ता कित्ता पानी

कुछ देश तो इस विषय में काफी आगे बढ़ गए हैं। इस संदर्भ में इजराइल का नाम लिया जाता है। वहां समुद्र के जल...

दुनिया मेरे आगेः मशविरा उस्ताद

कुछ लोग हैं जो समझते हैं कि वे हर चीज के बारे में दूसरों से अधिक और बेहतर जानते हैं। ऐसे लोगों को क्या...

दुनिया मेरे आगे: सफर में आजादी

दुखद है कि एक संप्रभु देश में आजादी के छिहत्तर साल बाद भी भावी पीढ़ी के एक बड़े हिस्से के लिए आजादी का जश्न...

दुनिया मेरे आगेः संज्ञान सुरभि

संज्ञान शब्द की ताकत का मुझे अंदाजा नहीं था। जब हुआ तो हैरान रह गया। यानी एक बड़ी दुर्घटना, जो सहज ही भुला दी...

दुनिया मेरे आगेः झांसेबाजों की दुनिया

किसी को झांसा देने के पहले अपनी आत्मा को झूठ की चादर से ढंक देना होता है। आत्मा कुलबुलाती है, क्योंकि उसे हमेशा सच...

दुनिया मेरे आगे: अंधविश्वास की गिरफ्त

यह एक सहज और स्वाभाविक बात है कि ज्यादातार लोगों को किसी न किसी तरह का दुख-तकलीफ रहता ही है। शायद ही कोई...

दुनिया मेरे आगे: ‘मैं’ की बुनावट

मैं को अक्सर अहंकार का पर्याय भी माना जाता है। यह चतुर होता है और सूक्ष्म भी। इसकी तुलना अक्सर तिलचट्टे के साथ की...

दुनिया मेरे आगेः तस्वीर के तार

कुछ समय पहले एक तस्वीर पर नजर पड़ी, जिसमें एक मां अपनी छोटी बच्ची को गोद में लिए खड़ी थी और उसने पैर में...

दुनिया मेरे आगेः डर के आगे जीत

लड़कियों के साथ आए दिन छेड़खानी और बलात्कार जैसी घटनाओं से परिवार भी डरा हुआ होता है। लेकिन परिवार अपनी बेटी को यह हिम्मत...

दुनिया मेरे आगेः अनुभव का पाठ

शिक्षा की दशा और दिशा क्या हो, यह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता रहा है कि शिक्षक तैयार करने वाले संस्थान शिक्षक...

दुनिया मेरे आगेः बिन पानी सब सून

कई सालों बाद बरसात के मौसम में गांव जाने का मौका मिला। विद्यालयी पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली जाना...

दुनिया मेरे आगे: समझ के पैमाने

ह संतोषजनक है कि अब शिक्षा और स्कूली जगत में इस दृष्टिकोण को अपनाया जाने लगा है। ज्ञान को अब किसी पूर्व निर्धारित उत्पाद...

दुनिया मेरे आगे: अब कैसा सावन

मानसून का मौसम है। कहीं रिमझिम कहीं झमाझम। कोई खुश है तो किसी का जीना मुश्किल हो गया है। अभी झारखंड और कई राज्यों...

दुनिया मेरे आगेः बावरा मानुष मन

मनुष्य का मन बावरा होता है। उसके पास प्रकृति की दी गई अनेक खूबियां हैं, लेकिन वह अपनी तुलना पशु और पक्षियों से करता...

दुनिया मेरे आगेः विश्वास का पुल

राजनीतिक दलों के मंचों या टीवी समाचार चैनलों पर दिखने वाले नेता या धर्म-संप्रदाय के नाम पर बने संगठनों के चेहरे क्या सही अर्थों...

दुनिया मेरे आगे: प्रेम की भाषा

लोग जब प्यार में होते हैं तो सोचते हैं कि वे कुछ ऐसा कर रहे हैं जो पहले नहीं किया गया। एक-दूसरे से कुछ...

दुनिया मेरे आगे: घर में बाजार

हमें याद होगा कि कभी वक्त था जब शादी-ब्याह या फिर तीज-त्योहारों पर नए कपड़े दिलाए जाते थे। जिन्हें हम बहुत जतन से रखते,...