दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः जमाने के लिए

सन् 2005 में इस्राइल के हिब्रू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में दयालुता और एक जीन में संबंध पाया। यह जीन डोपामाइन नामक...

दुनिया मेरे आगेः जादुई दुनिया का दरवाजा

डॉ आंबेडकर के निजी पुस्तकालय ‘राजगृह’ में पचास हजार से भी ज्यादा पुस्तकें थीं। लेखक, इतिहासकार और अध्येता पुस्तकालयों और अभिलेखागारों की खाक छानते...

दुनिया मेरे आगे: गुम होती बतकही

ऐसा कौन शख्स होगा जो रोजमर्रे की ऊब तोड़ने और खुद की बोरियत मिटाने के लिए गपशप न करता हो। मन-बहलाव का सबसे सहज...

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दुनिया मेरे आगे: बादल, बरखा और बाढ़

दरअसल, सावन का माह प्रेमोत्सव का माह है और इस प्रेमोत्सव में किसी के प्रेम का वितान फैल कर समस्त सृष्टि को अपनी बाहों...

दुनिया मेरे आगेः गुम मासूमियत

आजकल तो ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर मोबाइल का प्रयोग बहुत बढ़ गया है और माहौल में आशंकाएं घूम रही हैं कि पढ़ाई के...

दुनिया मेरे आगेः स्वच्छता के बरक्स

सौ में से पचहत्तर के शिक्षित होने का दम भरने वाले भारत के हरेक नागरिक को इस कुसंस्कृति पर विचार करना होगा, क्योंकि इस...

दुनिया मेरे आगेः परवरिश का परिवेश

यह बिल्कुल प्रामाणिक तथ्य है कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में प्राप्त करने में ही बच्चों को सहजता रहती है। तब क्यों उनके अभिभावक उन्हें...

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दुनिया मेरे आगे: छाते की बातें

छाते का भी एक इतिहास है। प्राचीन मिस्र, ईरान, चीन और भारत में छातों का इस्तेमाल खासतौर पर धूप से बचने के लिए होता...

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दुनिया मेरे आगे: जीवट के सहारे

अभाव कई तरह की मजबूरी पैदा करती है, लेकिन महिलाओं ने स्वाभिमानी होने के कारण किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। जो काम इन...

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दुनिया मेरे आगे: अंतिम निर्णय

बहुत तेज और बेहिसाब क्षमता वाले कंप्यूटर, भू-उपग्रहों द्वारा वायुमंडल और धरती की सतह के निरंतर उपलब्ध कराए जाते छाया-चित्र और उच्चस्तरीय अनुसंधानों से...

MARRIAGE CEREMONY, LOCKDOWN MARRIAGE, CORONA PERIOD
दुनिया मेरे आगे: दिखावा बनाम सादगी

कोरोना महामारी के संकट का यह दौर हमें एक अवसर दे रहा है कि शादियों को बिना अतिरिक्त खर्च के संपन्न करने की परंपरा...

दुनिया मेरे आगेः विकल्प की सुविधा

सोशल मीडिया के संवाद से हम अपनी उपलब्धियां और अपने विचार दोस्तों के बीच साझा कर उनकी प्रशंसा और सुझाव पाकर थोड़ी खुशियां तो...

दुनिया मेरे आगेः एक-से दरबारी चेहरे

बंदी के दिनों में जमाखोरों, कालाबाजारियों और तस्करों ने अपना हाथ दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बाजारबंदी के दिनों में दुकानों के आधे...

Duniya mere aage
दुनिया मेरे आगे: सृजन के सेतु

दरअसल, लोग अपने-अपने हिसाब से अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त करने का रास्ता इस विवश घर-घुस्सू समय में निकाल रहे हैं। आमतौर पर लड़ाई-झगड़ों के...

दुनिया मेरे आगे: ज्ञान के पायदान

विज्ञान से भी परे है प्रज्ञान। अज्ञान, ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान! इस ज्ञान यात्रा के चौथे और लक्षित पड़ाव तक ले जाने के...

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दुनिया मेरे आगे: बुजुर्गों का कमरा

पिछले चार दशकों में युवा पीढ़ी में मां-बाप के बिना रहने की ललक बढ़ी ही है, लेकिन बच्चों को जन्म और उनके लालन-पालन में...

दुनिया मेरे आगे: प्रकृति का प्रतिसाद

अगर जीवन के हर एक क्षण को हम कुदरत का प्रसाद मान ले तो सारे तनाव एक क्षण ही में खत्म हो जाते हैं।...

दुनिया मेरे आगेः विकल्प की सीमा

आजकल सरकारी हो या निजी स्कूल, हर जगह यह ऑनलाइन जुगत अपनाई जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा की योजनाएं बनाई गईं और फिर उसे...

ये पढ़ा क्या...
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