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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: उत्सव के रंग

कठफोड़वा आम के पेड़ में अपनी कारीगरी से बना रहा है अपना कोटर और हरियल तोतों की बारात पहले ही आ बैठी है बागों...

दुनिया मेरे आगे: भय की परीक्षा

मेडिकल शिक्षा में तो हाल बहुत बुरा है। अगर किसी की जेब में एक करोड़ रुपए खर्च करने की ताकत है तो एक चिकित्सक...

दुनिया मेरे आगे: युद्ध की आग

दुनिया भर का इतिहास युद्ध के रक्तरंजित किस्सों से भरा हुआ है। इन किस्सों की कहानियां साहित्य का भी महत्त्वपूर्ण अंग बन चुकी हैं।...

भाषा के आयाम

आंखों से छलक कर पूरी देह में फैल जाने वाली भाषा देह की भाषा है। यह सवाल जब उठा तो मेरी निगाह ही बदल...

दुनिया मेरे आगे: पढ़े-लिखे लोग

पढ़े-लिखे लोग आमतौर पर कम पढ़े-लिखे और अनपढ़ लोगों को हेय दृष्टि से देखते हैं, गंवार और अनपढ़ कह कर उनका मखौल भी उड़ाते...

दुनिया मेरे आगे: सोच का दायरा

‘मेरा शरीर मेरा अधिकार’ जैसे विचारों पर चर्चा चल रही थी। चर्चा में एक सहयोगी शिक्षक भी कूद पड़े। उनके बोलने के ढंग...

दुनिया मेरे आगे: भरोसे की राह

‘हमारा जीवन वही होता है, जैसे हमारे विचार उसे बनाते हैं’, मार्क्स आॅरिलियस ने एक बार कहा था। पुराने जमाने में लोग तंत्र-मंत्र-यंत्र का...

दुनिया मेरे आगे: पढ़ने की दहलीज

बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है। स्कूल आने के पहले बच्चा भाषा की समझ बना लेता है। भाषा की तासीर मौखिक...

दुनिया मेरे आगे: सद्भाव के रंग

बाजारवाद और विज्ञापनों से प्रभावित न होकर विवेकपूर्ण क्रय-विक्रय करना भी धन का सही प्रबंधन सुनिश्चित करता है। व्यापक दृष्टिकोण का होना हर क्षेत्र...

एक चिड़िया अनेक चिड़िया

सन 1974 में एक गाना बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था- ‘एक चिड़िया अनेक चिड़िया..!’ बच्चे क्या, बुजुर्गों को भी मैंने यह गाना...

दुनिया मेरे आगे: सपनों का परचम

गंभीरता से सोचें तो महिला सशक्तिकरण का असली मतलब महिलाओं को अपने मन से अपनी पहचान के साथ जीने की आजादी मिलना है। केवल...

दुनिया मेरे आगे: स्त्री का हक

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो 5-9 आयु वर्ग की लड़कियां अपने बराबर के लड़कों से तीस प्रतिशत ज्यादा काम करती हैं। उत्तराखंड में...

दुनिया मेरे आगे: शिकायत का हासिल

स्त्री द्वारा किए गए काम और उसकी सफलता को एक व्यक्ति के काम या उसकी सफलता की दृष्टि से देखे जाने से पहले उसके...

दुनिया मेरे आगे: चुनौती का दम

हां, एक बात जरूर है कि जीवन में आने वाली परेशानियों, कठिनाइयों और समस्याओं का सामना व्यक्ति को खुद ही करना पड़ता है। ऐसी...

भावों की भाषा

कहा जाता है कि भाषा मनुष्य को संपूर्ण चराचर जगत से अलग करती है। यह भाषा ही है जिसके चलते मनुष्य अपनी अलग संस्कृति...

नाम की पहचान

बिहार के सासाराम में रेड लाइट इलाके में देह व्यापार में धकेली गई सभी महिलाओं को अपने बच्चों के पिता का नाम रूपचंद रखना...

वक्त नहीं है

हमारे-आपके पास एक दिन के चौबीस घंटे हैं। इन्हीं घंटों में जो भी हम चाहते हैं, करना होता है। मगर इसका यह मतलब नहीं...

एक सभ्य समाज में

मणिपुर में मेहनतकश और समझदार स्त्रियां आम हैं। इसकी वजह यह होगी कि वहां सार्वजनिक गतिविधियों में महिलाओं के लिए ज्यादा और बेहतर मौके...