ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः अन्यथा न लें

आज जमाना सीधी बात का है, लेकिन एक समय वह भी था जब किसी नौसिखुए को प्रेम करने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़ते...

चौपालः खौफ में स्त्री

हमारे देश में कानून-व्यवस्था, अधिकार और महिला सुरक्षा के दावे केंद्र से लेकर राज्य सरकारों के स्तर तक प्रतिदिन किए जाते हैं।

दुनिया मेरे आगेः जुबान में जादू

उन दिनों गांव में जेठ की दोपहरी किसी रात से कम नहीं होती थी। भरी दोपहर में जब लू के थपेड़े बाहर अपना आतंक...

दुनिया मेरे आगे- हमारी अजन्मी बेटियां

बेटे से ही वंश चलेगा, बेटा ही बुढ़ापा पार लगाएगा, बेटी तो पराई है सो पराये घर चली जाएगी और विवाह में भारी खर्च...

दुनिया मेरे आगेः सुबह का सुख

सर्दी अब अपने पूरे रंग में है। समय से पहले शाम होने लगी है। जिस आश्वस्ति के साथ दिन में घर से निकलते हैं,...

दुनिया मेरे आगेः इलाज का दर्द

चिकित्सक को दूसरा ईश्वर कहा गया है। वे मरीज के उपचार की शपथ लेते हैं। लेकिन जब से चिकित्सा क्षेत्र में निजीकरण बढ़ा है,...

दुनिया मेरे आगेः जीवन एक उत्सव

देखा जाए तो हमारा जीवन किसी ऐसी फिल्म की तरह है, जिसकी अवधि के बारे में हमें कुछ मालूम नहीं।

दुनिया मेर आगेः छीजता एहसास

कुछ दिन पहले अपने मोबाइल का बिल अपने एटीएम कार्ड से अदा किया, लेकिन पैसा खर्चने का अहसास ही नहीं हुआ। न तो हाथों...

दुनिया मेरे आगेः चाह और राह

मजब यह खबर मेरे कानों में पड़ी तो उसके घर पहुंच गया।

दुनिया मेरे आगे- अड़जी-पड़जी

कई सारी परंपराएं अपने मूल स्वरूप में अब भी बनी हुई हैं। आदिवासी भाई-बहनों में एक दिलचस्प प्रथा है अड़जी-पड़जी।

दुनिया मेरे आगेः पढ़ने की आदत

कुछ समय पहले एक कार्यशाला में शिक्षकों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने पिछले एक माह में पाठ्य पुस्तकों से...

राजनीतिः स्वच्छता के नायक

स्वच्छ भारत अभियान की जोरदार शुरुआत से लगा था कि देश स्वच्छ होगा। नई स्वच्छता नीति का निर्माण करते हुए सफाई के बुनियादी ढांचे...

दुनिया मेरे आगेः सैरगाहों में मवेशी

राजस्थान भारत की अव्वल सैरगाहों में एक है। लेकिन ये स्थल इंसानों से ज्यादा आवारा पशुओं की सैरगाह बनते जा रहे हैं।

दुनिया मेरे आगेः हमारे समय में पनही

आजकल कक्षा नौ में पढ़ने वाला मेरा बेटा मुझे जूतों के बारे में नई-नई जानकारी देता है। वैसे तो जूता समाज में हमेशा चर्चा...

दुनिया मेरे आगेः बचपन का खेल

कट्टी...कट्टी...कट्टी! एक बच्चे ने दूसरे से कहा और उनकी दोस्ती खड़े-खड़े खत्म हो गई। अब दोस्ती हैरान है कि अचानक से यह क्या अबोला...

दुनिया मेरे आगे- पढ़ाई की लड़ाई

किसी भी राष्ट्र का पूर्ण विकास तभी संभव है जब उसकी पुरुष आबादी के साथ-साथ बाकी आधी आबादी यानी महिलाओं को भी उनके सभी...

दुनिया मेरे आगेः निराशा के भंवर में

इंदौर में एक बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट के साइनबोर्ड पर नजर ठिठक गई। यूपीएससी, पीएससी के मुकाबले ज्यादा मोटे हर्फों में पटवारी की परीक्षा की...

दुनिया मेरे आगेः इस निर्मम समय में

एक मित्र ने पिछले दिनों दुखी होकर बताया कि आजकल उनके पिता को रात को ठीक से नींद नहीं आती। वे अक्सर उदास रहने...