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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः सिकुड़ती संवेदनाएं

हमारे ज्ञान सागर में संवेदना के आयामों को परिभाषित करते हुए उसे मानव मन की गहराई और सच्चाई के साथ आंका गया है।

दुनिया मर आगेः पूर्वग्रह की परतें

बचपन में जो बातें दृश्य और सोच में बैठ जाती हैं या बैठा दी जाती हैं वे आजीवन दिमाग से नहीं निकलतीं या फिर...

दुनिया मेरे आगेः दूर बजत कोई धुन

उस उदास रात बहुत सन्नाटा था, दूर-दूर तक कहीं कोई आवाज नहीं आती थी। लग रहा था सारा गांव गहरी नींद में सो रहा...

दुनिया मेरे आगेः मानस में छवियां

हाल की कई घटनाओं के संदर्भ में सोचते हुए मुझे बर्तोल्त ब्रेख्त की एक पंक्ति कई बार याद आई- ‘तुम्हारा उद्देश्य यह न हो...

दुनिया मेरे आगेः श्रम की मिठास

गन्ने के कई नाम हमारे जेहन में बचपन से ही थे। पर सबसे ज्यादा हम इसे जिस नाम से याद रख पाए थे वह...

दुनिया मेरे आगे: इस वीडियो में ऐसा क्या है

टेलीविजन पर स्टोरी चलती है, जीवन में स्टोरी चलती है, रस बनता है, फिर रस सामाजिक संरचना में घुल कर समरस बन जाता है,...

दुनिया मेरे आगे: सनक में बदलती सेल्फी

यह सेल्फी का दौर, ‘सेल्फी स्टिक’ ईजाद करता है और स्वयं के रूप-रंग को तुरंत फेसबुक या वाट्सएप पर परोस देता है। फिर ‘लाइक’...

दुनिया मेरे आगे: यादों का वसंत

यादों की पतवार जब जीवन की नाव को किनारे की तरफ खींचती है, तब हृदय में एक ज्वार उठता है। इसी में समा जाता...

दुनिया मेरे आगे: स्वच्छता की खातिर

स्वच्छता अभियान सचमुच एक प्रशंसनीय पहल है। इसमें सभी का सहयोग और योगदान चाहिए। यह अभियान सिर्फ सरकार या प्रशासन के करने से सफल...

दुनिया मेरे आगे: बचपन के बहाने

प्रसिद्ध बाल मनोवैज्ञानिक कमला मुकुंदा अपनी पुस्तक ‘वाट डिड यू आस्क्ड एट स्कूल टुडे’ में कहती हैं कि बच्चों में गैर-जन्मजात सीखने की अपार...

दुनिया मेरे आगे – खुद की पहचान

हमारे लिए यही जरूरी है कि हम आत्मनिरीक्षण करें। खुद को पहचानें व अपनी क्षमता का सही उपयोग करें। जो मुमकिन है और किया...

दुनिया मेरे आगेः सुनहरी धूप में ऊंघता देश

हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और संस्कृति के हमारे दंभ को दो सौ वर्षों की गुलामी ने चूर-चूर कर दिया था। गुलामी की जंजीरों से...

दुनिया मेरे आगेः अंतहीन बहस

भारत एक बहुत बड़ा देश है। विदेशी देख कर चकित हैं कि यहां इतने मुद््दों पर बहसें होती हैं, तब भी कोई फर्क नहीं...

दुनिया मेरे आगेः यह तपिश

डाक बंगले के ओसारे यानी बरामदे में बैठे-बैठे, अखबार पढ़ते हुए और चाय पीते-पीते अचानक लोहियाजी ने खुले आसमान की तरफ नजर दौड़ाई और...

दुनिया मेरे आगेः बेलगाम बाजार

क्रिकेट एक खेल है और आइपीएल बाजार का उपक्रम। बाजार की नजर में मुनाफे के अलावा कुछ दूसरा न तो महत्त्वपूर्ण होता है और...

दुनिया मेरे आगेः रिहाई की आस में

अकसर सलाह दी जाती है कि ‘कुछ भी करना भइया! लेकिन कोर्ट-कचहरी के चक्कर में कभी मत पड़ना।’

दुनिया मेरे आगे : संत्रास के रंग

दलित-कला समकालीन कला आंदोलन के भाग रूप में चली भी, कुछ चित्रकारों ने आंचलिकता के नाम पर उसे संयोजित भी किया, लेकिन वह व्यापकता...

दुनिया मेरे आगे- लाचार तीमारदार

अस्पतालों को सोचना चाहिए कि मरीज की देखभाल करने वालों का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है, वरना वे कैसे अपने किसी बीमार...