दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: गरिमा की बोली

किसी भी समाज के भीतर एक पारिवारिक व्यवस्था रहती है, जहां बातचीत का स्तर काफी शालीन रहता है। माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी जैसे संबधों से...

दुनिया मेरे आगे: औपचारिकता का यथार्थ

पिछली सदी के सत्तर के दशक की बात है। एक सख्त मिजाज प्राचार्य मातहतों को आसानी से आकस्मिक अवकाश नहीं देते थे। एक तेज...

दुनिया मेरे आगेः सांध्य वेला में

महानगरों में बच्चों की बेहद महंगी शिक्षा के बोझ से लदे कामकाजी दंपतियों के लिए अपने छोटे-से फ्लैट में वृद्ध मां-बाप को साथ रखना...

दुनिया मेरे आगेः ये रास्ते हैं प्यार के

बुद्ध, प्लेटो, बर्टेंड रसेल, सार्त्र, सिमोन द बोउवा जैसे कई शताब्दियों और पीढ़ियों पर अपने प्रभाव छोड़ने वाले विचारकों ने रोमांटिक प्रेम के आधुनिक...

दुनिया मेरे आगे: संवाद में जिंदगी

जब जिंदगी पर बाजारी कलाओं का तानाशाहनुमा कब्जा हो, तो दिमाग सोचना बंद कर देता है। यह आज का सच भी है कि कुछ...

दुनिया मेरे आगे: डर का मुकाबला

कोरोना के कारण जिस तरह से दुनिया भर में बनने वाले ‘मास हीस्टिरिया’ के संकेतों को समझते हुए दुनिया के कुछ देशों की ओर...

दुनिया मेरे आगे: भविष्य के लिए

जिस तरह नृत्य प्रतियोगिता का परिणाम तैयार करने में उसके जूरी सदस्य ने पूरा समय लगाया, ताकि एक सही निर्णय लेकर परिणाम घोषित किया...

दुनिया मेरे आगे: इंसाफ की मंजिल

विडंबना यह है कि महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाओं का क्रम लगातार बढ़ ही रहा है। मुझे इस पर हैरानी इसलिए होती है...

दुनिया मेरे आगे: रोग का दायरा

आज दुनिया का हर इंसान छोटी-बड़ी किसी न किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा को भोग रहा है। रोगों ने इंसानों का सुख छीन लिया...

दुनिया मेरे आगे : एक और झरोखा खोलें

सच कहें तो यह ज्ञान के विस्फोट का युग है। दुनिया भर का ज्ञान हमारे पास है, लेकिन हमें अपने आसपास की कोई जानकारी...

दुनिया मेरे आगे: हिंसा के ईंधन

ऐसी हिंसा जो ‘चिह्नित’ व्यक्ति या समूह के प्रति है, तब वह महज हिंसा नहीं है। दो विश्व युद्धों के बाद भी हर महाद्वीप...

दुनिया मेरे आगे: खौफ की हवा

स्वच्छ हवा स्वच्छ ही रहती। स्वच्छ हवा को दूषित करने के बाद अब शहरों के अमीर घरानों के घरों में हवा को स्वच्छ करने...

दुनिया मेरे आगे: मिट्टी में खेलना

बच्चों को मिट्टी में खेलने की अनुमति देना उनको सुकून देने और शांत रखने में मदद करता है। जिन बच्चों को खुले वातावरण और...

दुनिया मेरे आगे: विलुप्ति का मंजर

गाने वाली चिड़िया की कहानी हम सभी जानते हैं। कहानी का सार यह है कि एक राजा गाने वाली चिड़िया की आवाज से वंचित...

दुनिया मेरे आगेः खालीपन की खोह

बहुधा हम देखते हैं कि मनुष्य की जिंदगी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा इस खालीपन को भरने का ही प्रयास है। खालीपन शब्द संकुचित अर्थ में...

दुनिया मेरे आगेः यथार्थ के नाम पर

क्या साहित्य का उद्देश्य उदात्त का प्रस्तुतिकरण नहीं होना चाहिए? क्या यथार्थ के नाम पर स्थितियों को पूरी तरह भदेस भाषा में प्रस्तुत करना...

दुनिया मेरे आगेः ढाई आखर

वर्तमान युग में प्रेम भी जैसे डिजिटल बन गया है। अब मानवीय प्रेम संबंधों में गंभीरता नहीं रही। युवा वर्ग ‘बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड’ के पेंडुलम में...

दुनिया मेरे आगेः जिंदगी के रंग

हम इंसान कुदरत का ही एक हिस्सा हैं। इसलिए उसके रंगों से भला हम कैसे जुदा रह सकते हैं। फिर जो रंग कुदरत ने...

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