दुनिया मेरे आगे

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दुनिया मेरे आगे: खुशहाली के रास्ते

आज के परिदृश्य में माता-पिता जरूरत से ज्यादा फिक्रमंद हैं। हमेशा बच्चे को अपनी नजरों के सामने रखना चाहते हैं। इस प्रकार बच्चा एक...

Literature
दुनिया मेरे आगे : विचारों का इंद्रधनुष

अनुभूतियों के साथ हर क्षण हमारा साक्षात्कार होता रहता है। अनुभूतियों की सघनता जब हमारे अंतर्मन को स्पर्श करती है तो अत्यंत प्रभावी होती...

Race
दुनिया मेरे आगे: बांटने का सुख

यह चिंतन करने का समय तो है ही कि हम ये कैसी कुसंगति में फंस गए कि दैनिक जीवन से रस और रंग...

Pollution
दुनिया मेरे आगे : छिनती हरियाली, सिमटता जीवन

बहरहाल, विकास अपने रास्ते मेरे गांव भी पहुंचा था, जिसकी वजह से अब यह शहर बन कर जिला बन गया है। इसे राज्य का...

Literature
दुनिया मेरे आगे : कहां गए वे फेरी वाले

फेरीवाले अपनी किस्म-किस्म की आवाजों और बोलियों के बहाने भाषा को समृद्ध बनाते थे। सच्चे अर्थों में वे भाषा का विकास करने वाले व्यावहारिक...

moral value
दुनिया मेरे आगे: रिश्‍तों की डोर

रिश्ते निभाने में जिम्मेदारी समझना बहुत जरूरी है, जिसमें स्वार्थ और जरूरत तलाशते रहना दिक्कततलब है। रिश्ते तभी प्रगाढ़ होते हैं जब हम अच्छे...

Face book
दुनिया मेरे आगे: शब्दों की संवेदना

अब सारे अक्षरों में से जीवन के वे रंग गायब हो गए लगते हैं। कुछ खास फॉन्ट में लिखे हुए इन अक्षरों से मन-मस्तिष्क...

Film star
दुनिया मेरे आगे: अतीत की गलियां

आने वाली पीढ़ी के लिए इंटरनेट भी शायद पुराना हो जाए, क्योंकि हर साल या दो साल में तकनीकी कुछ नया लेकर आती है।...

Dunia mere aage
दुनिया मेरे आगे: विचार की शक्ति

जन्म से दृष्टिबाधित मनुष्य को प्रकाश की अनुभूति या प्रत्यक्ष संकल्पना नहीं होती है। पर विचार मन की आंखों की तरह हैं, जो...

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दुनिया मेरे आगे: हिंसा की परतें

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में फब्तियां कसना हो, छेड़छाड़, यौन दुर्व्यवहार या बलात्कार जैसे जघन्य अपराध ही क्यों न हो, आम लोगों...

दुनिया मेरे आगे: मत काटो ये पेड़

बात केवल परंपरागत त्योहारों की नहीं है। अब आदिवासी ठीक ही सचेत हुए हैं कि जंगल तो उनसे छिन ही रहे हैं, अब गांव...

दुनिया मेरे आगे: उम्मीदों के दीये

मानव युगों से यह कशमकश कर रहा है और वह अज्ञानता का यात्री होने के बावजूद ज्ञान की खोज कर रहा है। पृथ्वी, आग,...

दुनिया मेरे आगे: रोशनी का दायरा

एक दौर था, जब दीपावली आते ही स्थानीय हाट और बाजार मिट्टी के दीये और संबंधित अन्य आवश्यक सामग्रियों से पट जाते थे। मिट्टी...

दुनिया मेरे आगे: धुआं-धुआं अंतर्दृष्टि

पिछले दिनों देश की राजधानी दिल्ली दुनिया की सबसे दूषित राजधानी के तौर पर घोषित हो चुकी है। चारों ओर धुएं और धुंध के...

दुनिया मेरे आगे: मिट्टी की संवेदना

मिट्टी चाहे खेत की हो या चौखट की, हमने सदैव उसे मस्तक झुका प्रणाम किया। अपने गांव, देश की मिट्टी से प्रेम का...

दुनिया मेरे आगे: अस्तित्वहीनता का बोध

हाशिये के समूहों की चर्चा करते हुए अक्सर स्त्री, दलित, आदिवासी और अब किसान वर्ग की बात की जाती है, लेकिन इसी समाज में...

दुनिया मेरे आगे: रब सब भला करेगा

देश यथास्थिति-वाद का आदी हो गया है और यहां आपको सब कुछ बदल जाने का आभास दिया जाता है। परिवर्तन की राह पर चलते...

दुनिया मेरे आगे: सुबह की चाय

बनारस में चाय की कई दुकानें सिर्फ रात में ही खुलती हैं। जब बाजार बंद हो जाते हैं तो वे दुकानें खुलती हैं और...

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