ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: बदलते परिदृश्य में बच्चे

बच्चों को लोरियां सुनाने, रिझाने और भुलावे में रखकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत करने का समय बीत गया है। उनकी सोच और चंचलता का...

दुनिया मेरे आगेः पहाड़ में पानी

पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थल शिमला में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ था। सरकार ने कुछ दिनों के लिए स्कूल...

दुनिया मेरे आगे: मन की परतें

कुछ समय पहले आई एक खबर में बताया गया था कि रेलवे के आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने वाले कुछ यात्री अपने साथ कंबल,...

दुनिया मेरे आगे: संवेदनहीन व्यवस्था

अनुशासन होना चाहिए। लेकिन अनुशासन के नाम पर यह नहीं होना चाहिए कि विद्यार्थियों का भविष्य ही खराब हो जाए।

दुनिया मेरे आगे : किसान का दुख

बाजार को चलाने वाले आमतौर पर किसानों को उनका पूरा मेहनताना और लागत मूल्य तक नहीं देना चाहते। ऐसे लोगों या पक्षों से आज...

दुनिया मेरे आगे : विश्वास बनाम विज्ञान

जब बारिश नहीं होती थी तो किसी पंडित या पुजारी के कहने पर किसी प्रतिष्ठित मंदिर में शिव का दूध से अर्घ भरा जाता...

दुनिया मेरे आगे: महत्त्वाकांक्षा की मार

दिल्ली से बाहर रहने के कारण अभिभावक-शिक्षक मीटिंग में मेरी शिरकत पहले कम ही रही है। पत्नी ने इस दायित्व को निभाया है। लेकिन...

दुनिया मेरे आगे: अपने पराए

कहने को हम समाज, समुदाय और देश को एक सूत्र में पिरोने के उपदेशों के बीच पले-बढ़े होते हैं। लेकिन आमतौर पर सामान्य ज्ञान...

दुनिया मेरे आगे: सभ्यता की राह

आज हम तकनीक की दौड़ में शामिल हैं। मशीन ही जीवन बनता जा रहा है और भावनाएं कोने में सिमटती जा रही हैं। रिश्ते-नाते,...

दुनिया मेरे आगे: खतरे की थैली

यह एक आम हकीकत है कि हमारे यहां जो प्रतिबंधित कर दिया जाता है उसका उल्लंघन करने में हमें आनंद मिलता है। विडंबना यह...

दुनिया मेरे आगे : बच्चे की भाषा

कभी किसी शिशु को करीब से देखने का अवसर मिले, तो अवश्य देखिए। उसकी हरकतें, जबान, खास अवसरों पर की जाने वाली चेष्टाएं मिल...

दुनिया मेरे आगे : चिठिया हो तो

उन दिनों टेलीफोन एक्सचेंज के ऑपरेटर द्वारा ट्रंककॉल पर की जाने वाली वार्ताओं को सुनने के संबंध में भी अनेक रोचक किस्से पुराने लोग...

दुनिया मेरे आगे: सेहत के सामने

तेजी से युवा होते देश को क्या अपने हर नवजात के जन्म से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए?

दुनिया मेरे आगे: रिश्तों की संवेदना

उफनते जुनून के बीच शब्दों और रिश्तों का सौम्य साहचर्य क्या होता है, आज के दौर में इसे देखना हैरान करता है, लेकिन यह...

दुनिया मेरे आगे: स्मृतियों का पर्यावरण

आज पर्यावरण को लेकर संपूर्ण विश्व चिंतित है। यह चिंता हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन के पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी...

दुनिया मेरे आगे: दमित प्रतिभाएं

चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के लिए जब एमए और पीएचडी की डिग्री वाले आवेदन करते हैं तो जनता और नौकरियों के बीच का अनुपात...

दुनिया मेरे आगे : सभ्यता के पैमाने

अपने अनुभव से कहती हूं कि हमारा समाज उस दलदल की तरह है, जिस पर कमल का खिलना मात्र एक वहम है। अगर कमल...

दुनिया मेरे आगे : जोखिम का सफर

लोकतंत्र की खास बात यह है कि आप शिकायत कर सकते हैं। लेकिन सच यह है कि जिसकी शिकायत कीजिए, वह नाराज हो जाता...