ताज़ा खबर
 

संपादकीय

संपादकीय: संकल्प और चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है, जबकि भारत ने इससे दो साल पहले यानी 2023...

संपादकीय: सख्त चेतावनी

करीब ढाई महीने तक जब घाटी में कर्फ्यू था और संचार सेवाएं बंद थीं, तब उसकी हरकतें भी बंद थीं।

संपादकीय: संवेदनहीनता की हद

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) के तहत भी यह कहा गया है कि हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के सभी...

संपादकीय: अमीरी का आंकड़ा

मोटे तौर पर अमीर वही है जो हर तरह के आर्थिक संसाधनों से संपन्न है, जिसके पास खासी संपत्ति हो, उद्योग-धंधों, निवेश, विदेश व्यापार...

संपादकीय: भुखमरी की जकड़

गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर जारी हुए ताजा भुखमरी सूचकांक, 2019 के आंकड़ों में भारत की स्थिति काफी चिंताजनक है।

संपादकीय: घाटी के घाव

घाटी में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटने का विरोध अब नए ढंग से भी सुगबुगाने लगा है। वहां से आने वाली सेबों की खेप...

संपादकीय: बेलगाम लुटेरे

इसमें कोई संदेह नहीं कि लूटपाट, झपटमारी जैसी घटनाएं बढ़ने के पीछे बड़ी वजह युवाओं की बेरोजगारी और पुलिस की निष्क्रियता है।

संपादकीय: कुपोषित विकास

कुपोषण, भोजन में पोषण तत्त्वों की कमी और मोटापा एक ही साथ आसपास और यहां तक कि कई बार एक परिवार में भी देखा...

संपादकीय: संकट में ग्राहक

पीएमसी के खाताधारकों के पैसे फंसने का मामला नोटबंदी की पीड़ा से भी ज्यादा मारक है। जिस व्यक्ति के अपने नब्बे लाख रुपए हों...

संपादकीय: विकल्प का सम्मान

सन 1998 में अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र में गरीबी उन्मूलन की दिशा में ही काम करने के लिए नोबेल सम्मान मिलने के इक्कीस सालों...

संपादकीय: कुर्दों पर हमले

कुर्द सैनिकों ने बड़ी संख्या में आइएस के लड़ाकों को स्थानीय जेलों और शिविरों में बंद कर रखा था।

संपादकीय: बिगड़ती हवा

चिंता की बात यह है कि इस बार पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बजाय और बढ़ी हैं।

संपादकीय: मंदी की मार

रिजर्व बैंक पहले ही कह चुका है कि वह जरूरत को देखते हुए नीतिगत दरों में और कटौती कर सकता है। केंद्रीय बैंक इस...

संपादकीय: हिंसा की सियासत

विचित्र है कि इसमें पुलिस की भूमिका पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के पीछे वजहें छिपी नहीं हैं।...

संपादकीयः एक और कदम

चीन और भारत के रिश्ते कोई सौ-दो सौ साल के नहीं, बल्कि सदियों पुराने हैं। हजारों सालों से दोनों देशों के बीच व्यापार चलता...

संपादकीयः अनियमितता के कोष

सहकारी संस्थाओं के गठन और उनके जरिए लेनदेन को बढ़ावा देने का नियम इस मकसद से बना था कि लघु बचत करने, दूर-दराज के...

राजनीतिः घटने वन, बिगड़ता पर्यावरण

निश्चित रूप से विकास के लिए प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का दोहन आवश्यक है। लेकिन इसकी सीमा भी निर्धारित होनी चाहिए, जिसका कि पालन नहीं...

संपादकीयः अब पलटी

जब जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया गया, तो घाटी में अशांति की आशंका के मद्देनजर कर्फ्यू लगा दिया गया। राजनेताओं के राजनीतिक गतिविधियों...