ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

बाखबरः धुंधली तस्वीरें

बहुत दिन बाद अरविंद केजरीवाल अपनी रौ में आए। दिल्ली की सरकार उपराज्यपाल के निवास पर धरने पर बैठ गई। कहे कि अफसरों को...

वक्त की नब्जः घाटी में खतरे की घंटी

अजीब बात है कि भारतीय जनता पार्टी के एक प्रधानमंत्री के दौर में कश्मीर घाटी में शांति बहाल रही और भाजपा के दूसरे प्रधानमंत्री...

तीरंदाजः वली खान का सच

अंग्रेजों ने फिरकापरस्ती का उपयोग अपने राज और हुकूमत को कायम रखने के लिए किया था, पर उसका व्यापक नुकसान 1947 में हमारे देश...

दूसरी नजरः शांग्री-ला की खोज

माना जाता है कि शांग्री-ला एक रहस्यपूर्ण, सौहार्दपूर्ण घाटी है, पृथ्वी पर स्वर्ग का एक कोना, जहां हर समय सुख-शांति रहती है। अगर कहीं...

बाखबरः वाह रे आईना !

भागवत ने कुछ इस तरह अभय दिया : किसी भारतवासी के लिए कोई भारतवासी पराया नहीं है। भारत की धरती में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति...

वक्त की नब्जः झूठ के सहारे

गलतियां और भी गिनवाई जा सकती हैं मोदी के दौर की, लेकिन इनके बारे में न वामपंथी राजनेता कभी बोलते हैं और न ही...

प्रसंगवशः द्रोह या विद्रोह

अगर इतिहास के सत्य को बचाना है तो हमें युद्धों, व्यक्तियों, घटनाओं से हट कर संगीत, नृत्य, ललित कलाएं, साहित्य, संस्कृति और मनुष्यता का...

दूसरी नजरः सरकारें छिपा रहीं, लोग ढूंढ़ रहे

यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभार किसके पास है या कौन-से नीतिगत बदलाव किए जाएंगे। मंत्रिमंडल मूकदर्शक है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद बिना...

तीरंदाजः लहरें गिनने वाले

विकसित और संस्कार संपन्न देशों में भी भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। इसे अपराध माना जाता है और सामाजिक पाप भी। इस धारणा के...

बाखबरः कौन हारा कौन जीता

प्रणब मुखर्जी का संघ के कार्यक्रम में जाने को हां कहना कई चैनलों में कांग्रेस की कुटाई का बहाना बनता रहा। कांग्रेस भी कुटती...

वक्त की नब्जः दिल्ली पहुंचने का रास्ता

जब उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने देखा कि परिवर्तन और विकास के बदले उनको हिंदुत्व ही मिला है, तो भारतीय जनता पार्टी को छोड़...

दूसरी नजरः दूसरे दर्जे के नागरिक?

अगर धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगता है कि उनका दिल डूब रहा है, कि उनकी जगह ‘दूसरे दर्जे के नागरिक’ की होती जा रही है,...

उम्मीद और विकास के चार साल

ये चार साल उम्मीद और विकास के रहे हैं, और आगे भी हमारा यही प्रयास रहेगा, क्योंकि हम साधारण भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान...

वक्त की नब्जः विकास का झुनझुना

प्रधानमंत्री बहुत बार कह चुके हैं गर्व से कि उनके दौर में व्यवसाय करना इतना आसान कर दिया गया है कि विदेशी निवेशक भागे-भागे...

बाखबरः काहे की किट किट

चर्च बरक्स सरकार इतना जमा रहा कि तूतीकोरिन की तूती चैनलों को डेढ़ दिन बाद ही सुनाई दी! हमारे चैनल अपने ही शोर में...

दूसरी नजरः जवाबदेही किसकी है

पिछले चार साल के दरम्यान कृषि की औसत वृद्धि दर बहुत कम रही, 2.7 फीसद। लागत+50 फीसद के बराबर समर्थन मूल्य कहीं दिख नहीं...

गतिविधि दिशाहीन प्रक्रिया नहीं

गतिविधि का सबसे विकृत रूप वह है, जो बिना किसी मकसद के कराई जाती है। ऐसी गतिविधि का कोई संदर्भ नहीं होता और वह...

चर्चाः सीखना बनाम सिखाना – सीखने की प्रक्रिया और व्यक्तित्व विकास

पिछले डेढ़-दो दशक से लगातार इस समस्या का हल निकालने की कोशिश होती रही है कि बच्चों को किस तरह प्रभावी ढंग से सिखाया-पढ़ाया...