ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

मिथक और सिनेमा

भारतीय सिनेमा पहली बार मिथक और संस्कृति को समेटे हुए परदे पर झिलमिलाया। दादा साहेब फालके लोकजीवन में प्रसिद्ध ‘राजा हरिश्चंद्र’ की कथा के...

बोलने की आजादी बनाम बड़बोलापन

भारतीय राजनीति में जातिगत संकीर्णता राष्ट्रीय एकता के मानस को खंडित करती है। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत जातियों...

बाखबर- आ बैल मुझे मार

दिल्ली में मेवाणी की रैली और एक चैनल दिखाता रहा सिर्फ खाली कुर्सियां! दूसरे ने दिखाई कि कुछ भरी हैं, बाकी खाली हैं। तीसरे...

तीरंदाज- है और होने के बीच

ब्राह्मण होने से कोई हिंदू नहीं हो जाता, भाई साहब। हां, मैं ब्राह्मण परिवार में पैदा जरूर हुआ था, इसलिए नाम के साथ चतुर्वेदी...

वक्त की नब्ज- आधार निराधार

गांव दलितों का था और वहां पहुंचने पर मालूम हुआ कि वहां एक भी शिक्षित व्यक्ति नहीं है और एक भी बच्चा स्कूल नहीं...

दूसरी नजर, पी चिदंबरम का लेख- सत्य, उत्तर-सत्य और पुन: सत्य

अर्थव्यवस्था की हकीकत सबको मालूम है। जेटली का जवाब ‘उत्तर-सत्य’ था। मैं यह जरूरी समझता हूं कि हकीकत एक बार फिर बयान की...

बाखबर- नए बरस का तोहफा

मुसलिम समाज के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध यह विधेयक मुसलिम औरतों के सशक्तीकरण के लिए नए बरस का एक तोहफा है। विधेयक कानून जब...

प्रसंग- पितृसत्ता का हिंसात्मक उत्सव

प्रति एक लाख जनसंख्या पर होने वाले बलात्कार के प्रकरणों की दर की बात करें तो भारत में इसकी दर 2.6 है। उनतीस अन्य...

वक्त की नब्ज- दम दिखाने का वक्त

नए साल के पहले दिन राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि पाकिस्तान को पिछले पंद्रह वर्षों में अमेरिका ने तैंतीस सौ करोड़ रुपए से...

दूसरी नजर- जम्मू-कश्मीर पर पुनरवलोकन

वे जानते हैं कि यह रुख किसी राजनीतिक समाधान की ओर नहीं ले जा सकता। एक अतिवादी छोर से दूसरे अतिवादी छोर के...

साहित्य- साहित्य पर बाजार का साया

साहित्य का राज-सत्ता से रिश्ता चाहे जैसा रहा हो, पर इसमें कोई दो राय नहीं कि बाजार के साथ उसका रिश्ता सदा विरोध का...

समाज- कितना बदल गया संसार

हम संक्रमण काल में जी रहे हैं? क्या जिन मान्यताओं, दर्शनों और संस्थाओं की शुरुआत आज से लगभग चार सौ साल पहले चिंतन में...

बाखबर- श्रेय मोदी

शिमला शपथ समारोह! यह भी मोदी का शो है। शिमला के पुराने कॉफी हाउस में मोदी कॉफी पीते दिखते हैं। यह मोदी का कॉफी...

तीरंदाज- आशा नहीं रही

आशा खत्म हो गई है। कुछ अरसे से बीमार चल रही थी। बीच-बीच में ऐसा लगता था कि शायद उसकी तबीयत सुधर जाएगी, पर...

वक्त की नब्ज- बीते दिन, नई बातें

साल का आखिरी दिन है आज, सो हिसाब करने का वक्त है। हिसाब करना अगर हमारे लिए जरूरी है, तो प्रधानमंत्री के लिए और...

दूसरी नजर- विचित्र साल को अलविदा

हंसी बहुत सारी वजहों से आती है। कुछ घटनाएं और विषय तो वास्तव में बड़े विनोदपूर्ण होते हैं। अनजाने में हुई गलतियां भी हंसी-मजाक...

विमर्श- तीसरी सत्ता का संघर्ष

एक और वर्ग है जो न स्त्री है और न पुरुष है, लेकिन हमेशा से समाज का अभिन्न हिस्सा रहा है। जिसे समाज ‘तीसरी...

काल का आदि और अंत

काल अर्थात समय क्या है? भारतीय ऋषियों की मान्यता है कि ईश्वर की तरह काल का अंत नहीं होता है अर्थात वह उन्हीं की...