रविवारीय स्तम्भ

बाखबर: आइए, जल्लाद जल्लाद खेलें

कई चैनल अपने रिपोर्टरों से शाहीनबाग को लाइव कवर कराते हैं और वे बैठी हुई औरतों की हिम्मत पर मुग्ध होकर उनकी विरोधमुद्रा का...

जंगल सहेजने की जरूरत

आज जब ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाने की बात हो रही है, तो ऑक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ों का महत्त्व असंदिग्ध...

वक़्त की नब्ज़: उम्मीद के बरक्स

नरेंद्र मोदी से हम जैसों ने उम्मीद रखी थी कि वह इस तरह की गलत समाजवादी नीतियों को कूड़ेदान में फेंक कर एक नया...

दूसरी नज़र: कानून और हकीकत

पांच अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति ने संवैधानिक आदेश 272 जारी कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और प्रस्तावित केंद्र...

तेज बदलाव का दौर

आज की पीढ़ी में जो बड़ा पाठक वर्ग आया है, उसकी चिंताएं तथा रुचियां पहले से ज्यादा प्रश्नाकुलता लिए हैं। वे निरंतर चर्चा कर...

चर्चाः गुमशुदा पाठक की तलाश

हिंदी में पाठकों की कमी का रोना पुरानी बात हो चली है। मगर इसके साथ सच्चाई यह भी है कि हर साल किताबों का...

किताबें मिलींः ‘स्त्री कविता’ और ‘प्रेम नाम है मेरा- प्रेम चोपड़ा’

स्त्री-कविता पर केंद्रित प्रस्तुत अध्ययन जो कि तीन खंडों में संयोेजित है, स्त्री-रचनाशीलता को समझने का उपक्रम है, उसका निष्कर्ष नहीं।/ आखिर कौन है...

बाख़बरः एक कविता जो सबकी है

हमारी बहसें कहां पहुंच गई हैं? ऐसी बहसों में शुरू से आखिर तक एक प्रकार का धार्मिक ध्रुवीकरण अपने आप उग आता है। हर...

वक्त की नब्जः मुद्दे से अलग

समस्या यह है कि जिन सिद्धांतों को कांग्रेस पार्टी अपने बुनियादी सिद्धांत मानती आई है, उनकी तरफ न राहुल गांधी का ध्यान गया है...

तीरंदाजः जाति में क्या रखा है

मां ने सुझाव दिया था कि आलम का नाम बदल दिया जाए और उसको हिदायत दे दी जाए कि वह अपना धर्म अम्माजी के...

दूसरी नजरः आधी आबादी का गणतंत्र

मुसलमानों से संबंधित मामलों को कम समर्थन मिलता है या उनका भारी विरोध हो जाता है। जम्मू-कश्मीर का ही उदाहरण लें। मुझे लगता है...

नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं

शिक्षा नीति की सैद्धांतिकी, राजनीति, राष्ट्रवादी सोच और छात्रों पर पड़ने वाले पढ़ाई के अतिरिक्त दबाव, इन चारों के बीच संतुलन स्थापित किए बिना...

बाखबर: साधारण का सौंदर्य

मालूम हुआ कि होने वाले सीएम का घर किसी आम गांव वाले का-सा है, जिसमें खाना धाती पर बैठ कर चूल्हे की आंच पर...

वक़्त की नब्ज़: फीकी पड़ती चमक

जो लोग अवैध तरीके से भारत में आते हैं, वे अक्सर बदकिस्मत, बेरोजगार, गरीब होते हैं। वरना कोई नहीं छोड़ कर जाता है अपना...

दूसरी नज़र: दबंगई रोकने की कोशिश

पिछले दो महीनों में भाजपा को हरियाणा में ठोकर लगी, महाराष्ट्र में उसे नकार दिया गया और झारखंड में हार गई। जिन राज्यों में...

बाखबर: एक गुस्सा बिखरता हुआ

बहुत से भ्रम, डर, शक, आशंकाएं और वहम एक साथ जग गए हैं और कोई नहीं है, जो उनको प्यार से समझाए। इनको उनसे...

तीरंदाज: जय और पराजय

बेहद अहमक किस्म के लोग दुस्साहस की वजह से अपने को ह्यलाइम लाइटह्ण में लाने में कामयाब हो जाते हैं। वे दुस्साहस को अपनी...

वक़्त की नब्ज़: इस भ्रम के माहौल में

अशांति और अराजकता देश के बड़े शहरों में फैलने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक चुनावी भाषण में पिछले हफ्ते कांग्रस पार्टी...

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