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रविवारीय स्तम्भ

चर्चाः बोलियों की ताकत

जनजीवन से बोलियों के विस्थापन का कारण बाजार है। इस तथ्य से हमारे नागरिक समाज को रहस्यमय ढंग से पृथक रखा गया है। लिहाजा,...

चर्चाः जनपदीय भाषाएं और हिंदी का भविष्य

रचना में बोलियां क्या भूमिका निभाती हैं? क्या इससे साहित्य के पाठक को भाव ग्रहण करने में कोई कठिनाई आती है? क्या साहित्य की...

किताबें मिलीं: ‘साहस और डर के बीच’, ‘समय के तलघर में शब्द’, ‘बांझ सपूती’ और ‘नागार्जुन दिल्ली में’

नरेंद्र मोहन की डायरी- साहस और डर के बीच- ऐसे ही अनुभव-क्षणों का कोलाज है- सच की टेक पर बिना डरे कला-संरचनाओं, साहित्य, समाज...

बाखबरः कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त

इसे कहते हैं : मीटू की मार्केटिंग! शिकारी शिकार करता है। शिकार मीडिया पर आता है, तो मीडिया करुणा का जाल बिछा कर, इंटरव्यू...

वक्त की नब्जः अभियान और दिलेरी

असली भारतीय मीटू अभियान तब चलेगा जब उन महिलाओं का साथ हम देना शुरू करेंगे, जिनको आज तक यह भी अधिकार नहीं मिला है...

मुद्दा: भूख बनाम भोजन की बर्बादी

अन्न की बर्बादी पर लगाम लगाने की हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तो है ही, इस संवेदनशील मामले पर सरकार को नियम बनाने की जरूरत है।...

दूसरी नजरः कश्मीर में हालात और बिगड़ेंगे

नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कश्मीर को लेकर जिस तरह का अतिवादी नजरिया देखने को मिल रहा है, उसे देख कर तो कोई कह...

बाखबरः मैं भी मीटू तू भी मीटू

यों तो पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, लेकिन कुछ चैनल राज्यों के नाम पर राष्ट्रीय चुनावों के विश्लेषण ही देते रहते हैं। इसीलिए...

वक्त की नब्जः राहुल की बचकानी बातें

कांग्रेस अध्यक्ष ने एक बार फिर दोहराया कि वे भारत के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, लेकिन शायद उन्होंने इस यथार्थ पर ध्यान नहीं दिया...

तीरंदाजः सनातन अविरल धारा

सनातन धर्म की भव्य संरचना मूलत: तीन विशिष्ट स्तंभों पर आधारित है। इसका पहला स्तंभ देवता है, दूसरा पितर और तीसरा स्तंभ ऋता है।

दूसरी नजरः ये हैं दस कारण, अब कराइए जांच

रक्षामंत्री बहुत सीधी महिला हैं। पिछले साल तीन सितंबर को रक्षामंत्री का पद संभालने से पहले रफाल सौदे को लेकर जो कुछ हुआ था,...

किताबें मिलींः ‘रास्ते फिसल रहे हैं’, ‘उद्भ्रांत का बाल साहित्य’ और ‘कुछ आखिरी नहीं होता’

यह उमेश प्रसाद सिंह के ललित निबंधों का नवीनतम संग्रह है। आधुनिक हिंदी गद्य विधा के आरंभ से ही ललित निबंध की एक लंबी...

चर्चाः मकसद से भटकती गोष्ठियां

सेमिनारों की अराजक स्थिति का सबसे बुरा प्रभाव सामान्य श्रोताओं पर पड़ा है। श्रोताओं की स्वत: स्फूर्त भागीदारी अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।...

चर्चाः संगोष्ठियों का सच – साहित्य-चिंता का नया संदर्भ

साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सृजनात्मक विकास को गतिशील करने के लिए सेमिनार-गोष्ठियों का महत्त्व निर्विवाद है। बशर्ते इसे ठीक से संपन्न किया जाए।...

किताबें मिलींः ‘मुलाकात’, ‘सिर्फ कहानी नहीं’, ‘एक अतिरिक्त ‘अ’’ और ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं महिलाएं’

लेखक ने ‘एक बार फिर’ जैसी कहानियों में हमारे समय की ऐतिहासिक वस्तु को निर्ममता के साथ चित्रित किया है। वे अपराधी समझे जाने...

बाखबरः एक ही मार्ग, मंदिर मार्ग

सबसे अधिक नैतिक दृश्य यूपी ने दिया। एक पुलिस जीप में एक लड़की को एक इंसपेक्टरनी थप्पड़ पर थप्पड़ रसीद करते हुए गरियाए जा...

प्रसंग: दलित उपलब्धियों का जश्न

पटना और नालंदा के बीच स्थित कुसुमपुरा के प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट एक दलित थे। यह भट नाम से ही स्पष्ट है। भट शब्द का...

वक्त की नब्जः लोकप्रियता के बावजूद

मोदी की लोकप्रियता अभी तक कायम है, लेकिन सब मानते हैं कि इस बार उनके पक्ष में कोई लहर नहीं है, सो जिस तरह...