रविवारीय स्तम्भ

महाबली का पतन

जबसे ट्विटर का ‘कानूनी कवच’ हटा है, तबसे उसकी सारी अकड़ ढीली हो गई है और खबर दे रहा है कि सरकार के आगे...

क्या थे, क्या हो गए…

पृथ्वी पर जीवन के ही संकटग्रस्त हो जाने के मुख्य कारण क्या हैं? अक्सर इसके लिए पूंजीवादी औद्योगिक क्रांति और नगरीकरण के अंधाधुंध विकास...

आलोचना से भयभीत शासक

जिन देशों में राजनेताओं की आलोचना करने का अधिकार और उनसे सवाल पूछने की आजादी नहीं होती, उनको लोकतांत्रिक नहीं माना जाता है। मोदी...

क्या कसीदे पढ़ेंगे जीएसटी के?

2016 में इसकी स्थापना के बाद से अब तक किसी भी उपाध्यक्ष का चयन नहीं किया गया है। जीएसटी परिषद की अक्तूबर, 2020 और...

योद्धा कैसे कैसे

कुछ पहले तक तो सिर्फ एक चैनल दुनिया पर ‘कोरोना जैव युद्ध’ थोपने के लिए चीन को ठोंका करता था, लेकिन आजकल दूसरे...

बरास्ते राग दरबारी

स्थिति यह है कि पीड़ित, प्रताड़ित, शोषित और अपमानित व्यक्ति को संरक्षण और न्याय पाने के विधिक रास्ते तो अनेक हैं, मगर व्यवहार में...

फिर फिर वही गलतियां

अब फिर से गलती पर गलती होने लगी है। माना कि वादे किए हैं उनके अधिकारियों ने कि इस साल के अंत तक कम...

जिम्मेदारी लें, सलाह करें और योजनाएं बनाएं

सरकार को योजना बनाने के लिए दुश्मनी को मिटा देना चाहिए और एक ऐसे समर्पित समूह की स्थापना करनी चाहिए जो अप्रत्याशित घटनाओं का...

अपने अपने बही-खाते

खबर का प्रबंधन जिस तरह से चीन करता है, वैसा इन दिनों अमेरिका भी नहीं करता दिखता। सिर्फ एक अंग्रेजी चैनल और दो हिंदी...

इतिहास की करवट

अक्सर छवि प्रशासनिक अकर्मण्यता या अक्षमता की वजह से बिगड़ती है। उसको सुधारने के लिए प्रशासनिक क्षमता की बढ़त पर ध्यान देना जरूरी होता...

संजीदगी के अभाव में

सबसे बड़ी समस्या है टीकों का सख्त अभाव। अब मुख्यमंत्री भी कहने लगे हैं खुल कर कि टीकों की खरीदारी केंद्र सरकार की जिम्मेदारी...

पक्षी और कीड़े में सहमति

महामारी और अर्थव्यवस्था की हालत ने घरेलू बजट को बुरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। घटती आमद, बढ़ते खर्च, उधार लेने की...

का बरखा जब कृषि सुखाने

राज्यवार बंदियों से कोरोना संक्रमण काफी कम हुआ है। यह राहत की बात है, लेकिन कोरोना से सुरक्षा देने वाला टीकाकरण अभियान ढीला है!...

सहयोग का समय

क्या यह देश का दुर्भाग्य नहीं है कि आज भी देश में अनेक ऐसे समुदाय और समूह हैं, जो टीका लगवाने के लिए तैयार...

जरूरत विश्वास बहाली की

अजीब इत्तेफाक था कि जिस दिन मोदी के दूसरे कार्यकाल का दूसरा साल पूरा हुआ, उसी दिन किसानों ने काला दिवस मनाया, याद दिलाने...

और बड़ी त्रासदी का इंतजार

मई 2021 में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने यह रिपोर्ट भी दी कि और तेईस करोड़ लोग तीन सौ पचहत्तर रुपए रोजाना मजदूरी वाली गरीबी...

सदमात ने रोने न दिया

बहादुरशाह जफर हों, सुदर्शन फाकिर या हम और आप, रोना शुरू होता है महफिल में बात करने की मुश्किल से और फिर मुश्किल बढ़ती...

टूलकिट शूलकिट

एक अंग्रेजी चैनल दो बार किसानों के धरने को ‘महासंक्रामक’ का खिताब देकर धरना उठाने को कह चुका है, लेकिन टिकैत एंकर के सारे...

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