रविवारीय स्तम्भ Archives - Jansatta
ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

बाखबरः आगे आगे देखिए होता है क्या

दिल्ली देहरादून मार्ग पर तीन-चार रोज तक कांवड़ियों का ही राज रहा। जब यूपी के आला पुलिस अफसर कावड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करते...

वक्त की नब्जः सुविधा की चुप्पी और मुखरता

जब कहा जाता है आज कि मोदी तानाशाह हैं और उनकी सरकार पत्रकारों पर दबाव डाल रही है, मुझे अजीब लगता है कि यही...

तीरंदाजः उम्मीद नजर नहीं आती

चाहे वह कश्मीर का मुद्दा हो, खालिस्तान का या फिर भारत के खिलाफ अघोषित युद्ध चलाने की उनकी वर्षों पुरानी मुहिम, सब अपनी जगह...

दूसरी नजरः पहले अराजकता, अब आत्मनिर्भरता

अपनी स्थापना के समय से ही आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) आर्थिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी और स्वावलंबन का प्रबल पक्षधर रहा है।

किताबें मिलींः ‘अशोक राजपथ’, ‘अनुभूति और अभिव्यक्ति’ और ‘अनंतिम मौन के बीच’

अशोक राजपथ अवधेश प्रीत का यह उपन्यास बिहार के कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षण-परिवेश को उजागर करता है कि किस तरह प्राध्यापक अपनी अतिरिक्त...

मुद्दाः मां का दूध और बच्चे की सेहत

स्तनपान के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल अगस्त के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता...

किताबें मिलींः ‘देस बिदेस दरवेश’, ‘पंचकोण’, ‘बात से बात’ और ‘कद आवैला खरूंट’

यह तो सच्चाई है कि ज्ञान और अनुभव के लिए देशाटन बहुत आवश्यक है। हमारे पुराने देश और समाज में तीर्थाटन की परंपरा रही,...

गिरती गुणवत्ता के पीछे

अरस्तू जैसे दार्शनिक ने सदियों पहले कह दिया था कि समृद्धि और संपन्नता के समय में शिक्षा अलंकार बन जाती है, जबकि विपरीत और...

चर्चाः उच्च शिक्षा की साख: उच्च शिक्षा के सामने यक्ष प्रश्न

आज उच्च शिक्षा का यह महत्त्वपूर्ण मानवीय उत्तरदायित्व बनता है कि वह उस भाईचारे को प्रखरता दे, जिसके आधार पर भारत ने हर प्रकार...

मुद्दा: धारणाएं और भेदभाव

एक स्कूल विविधताओं से भरा होता है, जहां विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमि से बच्चे आते हैं। ऐसे में यह समझने की जरूरत है कि...

बाखबरः राष्ट्रवाद का रजिस्टर

अपने को हमेशा अव्वल कहने वाला, ‘एंजेडा सेट’ करने का दावा करने वाला एक चैनल लाइन देने लगा : ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर जल्दी ही!’...

वक्त की नब्जः बुरे बनाम अच्छे दिन

मोदी कई बार कह चुके हैं कि उनके दौर में कारोबार करने का माहौल इतना अच्छा हो गया है कि विदेशी निवेशकों की लाइन...

दूसरी नजरः इमरान खान की नई पारी

भारत में कुछ वर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें पाकिस्तान की नई सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने चुनाव को ही...

स्त्री-यातना का सच

भारतीय समाज के पुरुष-प्रधान होने की वजह से महिलाओं को अत्याचार का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर महिलाओं को जिन समस्याओं से दो-चार...

असंतुलित भोजन से बिगड़ती सेहत

खानपान के मामले में ग्रामीण इलाकों में संतुलित भोजन के बारे में जागरूकता कम लोगों में है, इसलिए भी वे दाल, सब्जी, फलों का...

किताबें मिलीं: अतीत का दरवाजा, मेरी दृष्टि तो मेरी है, खजाना और सच, समय और साक्ष्य

अपने यात्रा वृत्तांतों से हिंदी में एक नई शुरुआत करने वाले असगर वजाहत अपने आपको सामाजिक पर्यटक या सोशल टूरिस्ट कहते हैं

बाखबरः भीड़-हिंसा का समाजशास्त्र

दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत हुई। विपक्षी नेताओं ने ‘गरीबी टूरिज्म’ किया। एंकर विचलित हुए। दिल्ली की बरसात में दिल्ली की...

वक्त की नब्जः पाकिस्तान में नया निजाम

भारत के लिए सवाल यह है कि पाकिस्तान के भावी प्रधानमंत्री का इस्लामी झुकाव उनकी विदेश नीति को कितना प्रभावित करेगा। चुनाव अभियान शुरू...