ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

किताबें मिलीं: कविता का शहर, समकालीन हिंदी पत्रकारिता और कहीं कुछ नहीं

‘खामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है और इस खेल का मजा ले रहा है। क्या सचमुच खामोशी...

बाखबर: जैसे इनके दिन फिरे

इस बीच नकद नारायण एटीएम से गायब हो गए। आठ राज्य कैश की किल्लत में रहे। चैनलों को नोटबंदी के दिन याद आए। फिर...

वक्त की नजर: छवि बिगाड़ने की चालें

इस बदलते माहौल को देखते ही मोदी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस अपनी चालें चल रही है, ताकि अगले आम चुनाव तक प्रधानमंत्री...

तीरंदाज: मुक्त इच्छा से मुक्ति

निजी जीवन हो, धर्म हो, व्यवसाय हो या फिर लोकतंत्र, मुक्त-इच्छा के त्याग में मोक्ष प्राप्ति निहित नहीं हो सकती है, क्योंकि भक्ति अपने...

दूसरी नजर: अपराध और दंड-मुक्ति

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में, जून 2017 में, सत्रह वर्षीय पीड़िता के साथ बलात्कार का आरोप सार्वजनिक जीवन में रहे एक व्यक्ति (भाजपा विधायक)...

सूचना के संजाल में छीजती संवेदना

समाज में साहित्य के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। प्राय: ऐसा प्रतीत होता है कि समाज को साहित्य की कोई जरूरत...

किताबें मिलीं

कुछ सत्य कुछ सुंदर

युवाओं की साहित्य विमुखता

आज की युवा पीढ़ी के बारे में कहा जाता है कि साहित्य से उसे कोई लगाव नहीं है।

किताबें मिलींः मैं कहूं जगबीती, हिंदी गजल की नई चेतना और ख्वाहिशों के खांडववन

जब हम जग की बात करते हैं तो जग में ही सम्मिलित होते हैं। उसमें हर कोई समाहित रहता है। इस संग्रह में गिरिराज...

बाखबरः दलित कथा ललित कथा

दलित युवाओं के इस आक्रोश का सीधा प्रसारण इस कदर जबर्दस्त था कि चैनलों में कोई दूसरी खबर अंटती ही न थी।

तीरंदाजः भाषा भेद न कीजै

महात्मा गांधी ने कहा था राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। यह बात सच है। राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति के लिए एक भाषा का...

वक्त की नब्जः जाना था कहीं, पहुंच गए कहीं

भारतीय राजनीति भी विचित्र है। जिस मकसद को लेकर चलते हैं हमारे राजनीतिक दल और राजनेता, उसका कई बार बिलकुल उलटा हो जाता है।

दूसरी नजरः दक्षिण की लपटें देश को झुलसा सकती हैं

केंद्र सरकार ने यह आग भड़काई है। यह बुझाई जानी चाहिए, इससे पहले कि दक्षिण की लपटें पूरे देश को झुलसाने लगें।

आत्म-मोह के मारे लोग

फेसबुक को पता है कि हम कहां रहते हैं और कब-कब कहां रहे, कहां क्या काम करते हैं और क्या करते रहे, किन-किन से...

चर्चा: डाटा के तूफान में हमारी निजता

फेसबुक डाटा चोरी की घटना ने सबकी नींद उड़ा दी है। इससे न केवल फेसबुक की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई है,...

किताबें मिलीं: लाल पोस्ते के फूल, बात अभी खत्म नहीं हुई

उपन्यास में लंबे समय से चले आ रहे इस भ्रम को तोड़ा गया है कि तिब्बत धर्मनिष्ठ उपासकों का एक शांतिपूर्ण समाज था। उपन्यास...

बाखबर: सिस्टम लीक चौकीदार वीक

कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा फेसबुक के डाटा लीक की खबर बड़ी खबर बनी रही। इस बीच चैनल अपने-अपने नायक-खलनायक तय कर चुके थे। शुरू में...

वक्त की नजर: ऊंची आवाज की दरकार

सच तो यह है कि इस अधिकार से भारत के बच्चों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। सरकारी स्कूल वैसे के वैसे रहे...