ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

किताबें मिलीं: चुनी हुई कहानियां, सहेला रे, नर-नारीश्वर और लाल श्याम शाह

हरीश पाठक बिना किसी लाग-लपेट, दबाव, विचारधारा तथा पक्षधरता के, सिर्फ कहानी लिखने में विश्वास करते हैं। उनकी कहानियों में जीवन की छोटी-बड़ी, देखी-अनदेखी...

किसान आंदोलन की मुश्किलें

किसान आंदोलन इसलिए भी विफल हो रहे हैं, क्योंकि इसके लिए जितना गहन और दीर्घकालिक संघर्ष चाहिए उतना वक्त किसान नहीं दे सकते। एक...

चर्चा: किसान आंदोलनों की दिशा, किसान की नियति और व्यवस्था का प्रश्न

किसानों और किसानी की दुर्दशा को लेकर बराबर चर्चा होती रहती है। जब-तब कुछ संगठन किसानों को एकजुट कर उनकी मांगें उठाने का भी...

बाखबर: उत्तर-वेलेंटाइन नायिका

मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नदवी श्रीश्री रविशंकर के साथ दो दिन तक खबर बनाते हैं कि अदालत से बाहर समझौता हो सकता है।...

वक्त की नजर: सच का सामना करें

आपकी चुप्पी का फायदा उठा कर विपक्षी दल खूब प्रचार कर रहे हैं कि आपने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है। न...

प्रसंगवश: उपनिवेश-दर-उपनिवेश

शिक्षा हो या साहित्य, सभी क्षेत्रों में लोकतंत्र की उस संस्कृति का अभाव है, जो हमारे संवेदनतंत्र को जाति, धर्म, वर्ग और विचारधारा की...

दूसरी नजर: विरोध के कुछ और स्वर

वर्ष 1991 से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर करीब-करीब जीडीपी/जीवीए की औसत वृद्धि दर के बराबर रही है। अलबत्ता निर्यात में बढ़ोतरी...

कला और साहित्य: आंदोलन विहीन समय में

साहित्य के इतिहास में यह शायद पहली बार है कि इतनी अधिक संख्या में रचनाकार एक साथ सक्रिय हैं और उन्हें किसी एक व्यापक...

साहित्य और आंदोलनधर्मिता – बैठे ठाले का शगल

मौजूदा दौर में हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में आंदोलनों की अनुपस्थिति का एक बड़ा कारण हिंदी समाज की जड़ों से इसका उस तरह जुड़ाव...

किताबें मिलीं – बुद्ध को बीते बरस बीते

इन कथानकों के केंद्र में ईमानदाराना कशमकश और संबंधों का भावनाजनित संसार साथ-साथ चलता है। सभी कहानियां लगभग दो विपरीत ध्रुवों के बीच एक...

बाखबर- आज कुछ कल कुछ

पदमावत की जगह ‘मणिकर्णिका’ लेने वाली है। एक ब्राह्मण महासभा धमका गई है कि इतिहास से तोड़-मरोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी, करणी सेना की...

वक्त की नजर- वादे, इरादे और हकीकत

जहां जाती हूं, मुझे मिलते हैं ऐसे नौजवान जो रोजगार चाहते हैं और अपने निजी जीवन में तरक्की देखना चाहते हैं। अच्छे दिन उनके...

तीरंदाज- भय से अभय की ओर

हमारी उमंग भय-मुक्त होने की भी है। धर्म से टकराव और धर्मों में टकराव का कारण हमारे भय से अभय की ओर जाने की...

दूसरी नजर- स्वास्थ्य पर बजट का जुमला

सरकार ने 2017-18 में 21,46,735 करोड़ रु. खर्च करने का अनुमान पेश किया था, पर आखिरकार उसने 22,17,750 करोड़ रु. खर्च किया- जो कि...

बाखबर- सोची समझी नादानियां

ऐसी दीनता या मन की कि जनता का बजट और चैनलों ने जनता को मंगतों जैसा बना दिया। चार दिन पहले से जनता से...

वक्त की नजर- उपचुनावों के संकेत

जब मोदी ने 2014 में सबका साथ, सबका विकास का वादा किया, भारत के आम आदमी को लगा कि आखिर में उनके जीवन में...

प्रसंग- पाठक संख्या की मीनारें

जिस तेजी से भाषा का तकनीकीगत विकास हो रहा है, उससे साफ है कि मौजूदा स्थिति ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रह सकती है।...

दूसरी नजर – अच्छा डॉक्टर, बिगड़ैल मरीज

आर्थिक सर्वे बताता है कि कुछ सालों से बचत तथा निजी निवेश में लगातार कमी आई है। इन्हीं दो इंजनों के सहारे अर्थव्यवस्था ने...