ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

बाखबर: हिंदुत्व हिंदुत्व नेति नेति

संघ से निरासक्त चैनलों पर चिंतन होने लगा कि संघ बदल रहा है या यों ही बानक बना रहा है? एक प्रवक्ता ने कहा...

वक्त की नब्ज: संघ का नया अवतार

बहुत कुछ है करने को संघ जैसी संस्था के लिए, अगर वह वास्तव में रचनातमक ढंग से भारतीय संस्कृति के लिए काम करना चाहती...

बारादरी: गांधी की ओर लौटना हमारी मजबूरी

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि बाजार और करुणा एक साथ नहीं रह सकते और हमें जल्दी ही मजबूर होकर गांधी...

किताबें मिलीं: गंगा तीरे, तैमूर तुम्हारा घोड़ा किधर है, आजादी और राष्ट्रवाद

इस किताब में निजी अनुभव, संस्मरण, यात्रा वृत्तांत, लेखक के मन में उठते सवाल और उन सवालों को आधुनिक संदर्भों में देखने की कोशिश...

दूसरी नजर: बिगड़ते हालात और सरकार की अनिच्छा

पांच करोड़ डॉलर तक का कर्ज और एक साल की अवधि, यह एक तरह से ब्रिज लोन यानी कार्यशील पूंजी वाले कर्ज होते हैं।...

तीरंदाज: आराम बड़ी चीज है

जब व्यक्ति आराम में होता है, तो उसे कुछ नया सूझता है, उसमें नई चाहतें पैदा होती हैं, जिनसे कुछ न कुछ संतुष्टि उत्पन्न...

किताबें मिलींः ‘खर्रा और अन्य कहानियां’, ‘हरी मुस्कराहटों वाला कोलाज’ और ‘जीवनपुरहाट जंक्शन’

कोई भी रचना अगर सलीके से सवाल उठाने में कामयाब हो जाए तो वह अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति कर लेती है।

बाखबरः माल्या मिलन

चैनल रुपए को रोज लुढ़कता और पेट्रोल के दामों को रोज चढ़ता दिखाते रहे। भक्त चैनल तक सरकार की विफलता का ‘नैरेटिव’ बजाने को...

वक्त की नब्जः गुनहगार कौन

निवेश वही कर सकते हैं कारोबार में, जो जोखिम उठाने से नहीं डरते हैं। माल्या ने निजी एयरलाइन में निवेश किया होगा यह जानते...

मुद्दाः आरक्षण का जिन्न

इस अनदेखी की वजह से सरकारी सेवाओं या शैक्षणिक संस्थाओं में एससी/एसटी वर्ग की कुछ ही जातियों का वर्चस्व नजर आता है। राजनीतिक रूप...

दूसरी नजरः चुनावी साल में बड़ा सवाल

महीनों से आंकड़ों के ऊपर-नीचे होने का सिलसिला जारी है। इसलिए तिमाही या छमाही के खत्म होने पर किसी भी नतीजे से पहुंचने से...

किताबें मिलींः ‘वह लड़की’, ‘नीदरलैंड डायरी’ और ‘घोंसला और बबूल का जंगल’

इस किताब में अनेक नए मुद्दे उठाए गए हैं। स्त्री शोषण पहले भी था, अब भी हो रहा है। नई पीढ़ी की लड़कियां शिक्षित...

बाखबरः राहुल नाम केवलम्

राहुल भी छेड़ने से बाज नहीं आते। अच्छे-खासे कैलास जा रहे थे। जा रहे थे तो शिवमहिम्न स्तोत्र का जाप करते, लेकिन जाने से...

वक्त की नब्जः जो झूठ का सहारा ले रहे हैं

मोदी ने कई गलतियां की हैं प्रधानमंत्री बनने के बाद। इन गलतियों की आलोचना जायज है और हुई भी है शुरू से। विदेश और...

तीरंदाजः महाबली के दिन

नए खुलासों से साफ है कि ट्रंप के आरोपों, अपशब्दों और धमकियों के बावजूद पत्रकारिता ने अपना धर्म निभा दिया है। उसने साहब की...

दूसरी नजरः कालेधन को सफेद बनाने का जादू

नोटबंदी का असर अभी तक कायम है। रिजर्व बैंक की 2017-18 की सालाना रिपोर्ट जारी होने के साथ ही, नोटबंदी का भूत फिर से...

मुद्दा: राजनीति का अपराधीकरण

यह तर्क सही नहीं कि कोई दल साफ-सुथरे लोगों को उम्मीदवार नहीं बना रहा है इसलिए दागियों को चुनना उनकी मजबूरी है। यह एक...

बाखबरः शहरी नक्सल का समाजशास्त्र

पुलिस धर ले गई। मुकदमा कर दिया। घर में नजरबंद। अब अदालत को करने दो फैसला कि क्या ये साजिशिए हैं या कि जैसा...