ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

कार्य संस्कृति: व्यस्तता का दुश्चक्र

अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए अब काम का समय ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली प्रभावित हो रही है। वाकई चिंतनीय है कि यह...

चर्चा: उधार का चिंतन टिकाऊ नहीं होता

लेखन में मौलिकता की मांग की जाती है। यानी रचनाकार जो कुछ कहे अपना कहे, अपने ढंग से कहे और प्रभाव पैदा करे। पर...

उद्धरणवादी लेखन की बढ़ती प्रवृत्ति

उद्धरण सुविधानुसार चुनना और बेमेल खिचड़ी बना देना, बहुत हद तक हमारे आलोचनात्मक विवेक को कमजोर बनाता है। अपना मत स्थिर करने के लिए...

बाखबर: हनुमान हमारे, तो मंदिर क्यों तुम्हारे

कई चैनल ऐसा ही करते हैं। घृणा को लेकर और भी घृण्य चर्चाएं कराते हैं और फिर पूछते फिरते हैं कि घृणा कौन फैला...

वक्त की नब्ज: इस हिंसक दौर में

जिस देश में पुलिस अफसरों को बर्बरता से मारा जाता है सरेआम, उस देश में कौन आएगा निवेश करने? खासकर वे लोग क्यों आएंगे,...

बाखबर: कुर्सी का सत्य और सत्य की कुर्सी

अयोध्या से निकले, तो सारे खबर चैनल करतारपुर साहिब कारीडोर से होते हुए करतारपुर साहिब को कवर करने में लग गए। इधर सरकार ने...

तीरंदाज: किसान की जगह

हमें मिलकर सोचना है कि हम निजी और सामूहिक स्तर पर क्या करें, जिससे किसान और किसानी को उचित प्रतिष्ठा मिले और उसके काम...

वक्त की नब्ज: अब मुद्दे बदल गए हैं

दोष भारतीय जनता पार्टी का भी है और कांग्रेस का भी। जब भी किसानों ने अपने हाल पर राजनेताओं का ध्यान आकर्षित करने की...

दूसरी नजर: फिर वही जाना-पहचाना शोर

प्रधानमंत्री ने बाजार की ताकत की भी घोर अनदेखी की और उसे कमतर करके आंका। यह बाजार ही है जो प्रधानमंत्री और उनकी सरकार...

जनहित के मुद्दों से जुड़ते गए लोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो पर प्रसारित होने वाले मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ का पचासवां एपिसोड रविवार को प्रसारित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत...

बाखबरः नया भक्तिकाल

इस देश के सामने एक आफत थोड़े है! आजकल तो भक्त ही एक-दूसरे से स्पर्धा कर रहे हैं। एक ओर शिवसेना अयोध्या के लिए...

शिक्षा: फर्जीवाड़े के परिसर

शिक्षा में फर्जीवाड़े समेत कई मर्ज हैं, जैसे देश में शायद ही कोई ऐसी जगह बची हो जहां पर्चे लीक न हो रहे हों...

वक्त की नब्ज: मुंबई हमले की बरसी पर

जब तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहेंगे जरनैलों और मौलवियों के पांव तले, तब तक शांति आने की संभावनाएं बहुत थोड़ी हैं। सो, हमारे राजनेताओं...

दूसरी नजर: अब आरबीआइ के पतन की शुरुआत

पाठकों-दर्शकों की पसंद बिगड़ गई लगती है। भारत बनाम आस्ट्रेलिया के मैचों की शृंखला पहले से तय है। अभी तो सीबीआइ बनाम सीबीआइ चल...

जीवन-दृष्टि ही विचार-दृष्टि है

रचना में विचारक साहित्यकार और रचनाकार साहित्यकार के बीच जो द्वंद्व दिखाई देता है वह वास्तव में विचारधारा बनाम विचार-दृष्टि का ही द्वंद्व होता...

विचारधारा का प्रतिवाद है विचार-दृष्टि

विचारधारा बनाम विचार-दृष्टि: आज विचारधारा से तय होता है कि आप किधर हैं। विचारधारा आमतौर पर राजनीति के लिए इस्तेमाल होती है, पर वैचारिक...