विकेश कुमार बडोला कई बार ऐसा लगता है कि देश का सामूहिक जीवन बहुत अधिक कुंठाओं का शिकार है। इसके…
निवेदिता पच्चीस साल पहले भागलपुर जख्मों से भर गया था। एक बार फिर उसके जख्म हरे हो गए। स्मृति भी…
गिरिराज किशोर फेसबुक पर मैंने ग्यारह नवंबर को एक पोस्ट मतदान अनिवार्य बनाने के विरोध में डाली थी। उसके पक्ष…
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 की शिखर बैठक के लिए ऑस्ट्रेलिया गए, पर उनकी यह यात्रा दोनों देशों के आपसी…
हमारे देश में योजनाएं बड़े उत्साह से बनाई और घोषित की जाती हैं, पर उनके कारगर क्रियान्वयन की परवाह नहीं…
जब भी सरकारें बदलती हैं तब नई सरकारें यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि वे जो करेंगी वह एकदम…
हिंदी प्रचार-प्रसार संबंधी कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुझे शामिल होने का सुअवसर मिला है। इन संगोष्ठियों में अक्सर यह सवाल…
प्रशांत कुमार किसी जमाने में कहा जाता था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। शहरों से नहीं, गांवों…
विश्वंभर शिक्षा में बदलाव के प्रति राज्य सरकारों के सरोकारों और गंभीरता को उनके फैसलों के संदर्भ में देखा-समझा जाना…
अनिल चमड़िया राष्ट्रपति के कुछ कहने का क्या कानूनी महत्त्व होता है? क्या सूचनाओं और प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर राष्ट्रपति…
जवाहरलाल नेहरू की एक सौ पच्चीसवीं जयंती के अवसर पर यह स्वाभाविक ही है कि देश के लोग उन्हें शिद््दत…
हालांकि अर्थव्यवस्था को लेकर इस वक्त कई सकारात्मक बातें कही जा सकती हैं। मसलन, महंगाई का ग्राफ नीचे आया है,…