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संपादक की पसंद

दुनिया मेरे आगे: इंसाफ की नजीर

एक ओर इस तरह के लोमहर्षक उदाहरणों का अंबार है, जिनमें जनसंहारों को अंजाम देने वाले या उसमें हिस्सा लेने वाले लोगों ने कभी...

राजनीति: विश्व अर्थव्यवस्था और चुनौतियां

विश्व में आज भी बड़ी संख्या में लोग भूख व कुपोषण से पीड़ित हैं और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र...

संपादकीय: कश्मीर का राग

करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेना ने कड़े नियम-कायदे तय किए हैं। इन सबसे बातों से पाकिस्तान का नकारात्मक रुख ही सामने...

संपादकीय: दबाव का मंदिर

मंदिर के मामले में सरकार शुरू से तर्क देती रही है कि वह अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है। अदालत का जो...

चौपाल: जहरीली होती हवा

पिछले कई सालों से दिल्ली में अक्तूबर की शुरुआत से लेकर दिसंबर तक धुंध का आतंक बना रहता है। इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक...

हमारा गठबंधन समय की परीक्षा से गुजर रहा, विपक्षी एकजुटता की बैठक से पहले बोले राहुल गांधी

ट्विटर पर स्टालिन के दौरे के बारे में सूचित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हमारी बैठक सौहार्द्रपूर्ण रही और हमने विभिन्न मुद्दों पर...

वूमेन रिजर्वेशन पर राहुल गांधी का बड़ा दांव- कांग्रेस और गठबंधन सरकारों को लिखी चिट्ठी, दिए ये सुझाव

राहुल ने लिखा है कि महिलाओं की संसदीय भागीदारी में भारत का स्थान दुनियाभर के 193 देशों में 148वां है। विधान सभाओं में तो...

जीन संपादन से क्लोन निर्माण

जीन विलीन करने की तकनीकों की मदद से पहले भी दो चुहियों से एक संतान पैदा की गई थी, लेकिन उसमें कुछ कमियां रह...

संरचना में सेंध

अभी तक यही माना जाता रहा है कि मानव के डीएनए में बदलाव संभव नहीं है। जीन के सूत्र सदा अपरिवर्तित रहते हैं। पर...

चिंतन: नीर की निर्मलता

हमारे यहां ही नहीं दुनिया भर में जो यह माना जाता रहा है कि तन-मन दोनों निर्मल होने चाहिए, उसके पीछे की सोच यही...

ललित प्रसंग: मोरा हीरा हेराय गया कचरे में

कबीर का बोध विराट का बोध है। उनकी विकलता विराट के बोध से उत्पे्ररित विकलता है। इसीलिए कबीर की वाणी में व्याप्ति है। इसीलिए...

कार्य संस्कृति: व्यस्तता का दुश्चक्र

अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए अब काम का समय ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली प्रभावित हो रही है। वाकई चिंतनीय है कि यह...

किताबें मिलीं: चीन डायरी, मुंबई की लोकल, केजरीवाल की सियासत और योग ही जीवन

अकेला घर हुसैन का’, ‘कटौती’ और ‘जिबह बेला’ के बाद निलय उपाध्याय का चौथा काव्य संकलन है ‘मुंबई की लोकल’। निरंतर बाजारू होते जाते...

चर्चा: उधार का चिंतन टिकाऊ नहीं होता

लेखन में मौलिकता की मांग की जाती है। यानी रचनाकार जो कुछ कहे अपना कहे, अपने ढंग से कहे और प्रभाव पैदा करे। पर...

उद्धरणवादी लेखन की बढ़ती प्रवृत्ति

उद्धरण सुविधानुसार चुनना और बेमेल खिचड़ी बना देना, बहुत हद तक हमारे आलोचनात्मक विवेक को कमजोर बनाता है। अपना मत स्थिर करने के लिए...

बाखबर: हनुमान हमारे, तो मंदिर क्यों तुम्हारे

कई चैनल ऐसा ही करते हैं। घृणा को लेकर और भी घृण्य चर्चाएं कराते हैं और फिर पूछते फिरते हैं कि घृणा कौन फैला...

वक्त की नब्ज: इस हिंसक दौर में

जिस देश में पुलिस अफसरों को बर्बरता से मारा जाता है सरेआम, उस देश में कौन आएगा निवेश करने? खासकर वे लोग क्यों आएंगे,...

दूसरी नजर: क्या बच पाएंगे संवैधानिक मूल्य?

इन पांचों राज्यों में ये समान कारक थे- बिना थके प्रचार करने वाले नरेंद्र मोदी; कड़ी चुनौती दे रहे राहुल गांधी; बढ़ती बेरोजगारी; किसानों...