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इतना महिमामंडन

जब भी सरकारें बदलती हैं तब नई सरकारें यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि वे जो करेंगी वह एकदम नया है, वही सही है, उनके पहले या तो कुछ भी नहीं हुआ या जो होता था वह एकदम गलत और केवल गलत ही था और देशहित में तो था ही नहीं! अक्सर उन सरकारों […]

Author November 19, 2014 1:49 AM

जब भी सरकारें बदलती हैं तब नई सरकारें यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि वे जो करेंगी वह एकदम नया है, वही सही है, उनके पहले या तो कुछ भी नहीं हुआ या जो होता था वह एकदम गलत और केवल गलत ही था और देशहित में तो था ही नहीं! अक्सर उन सरकारों में बैठे लोग ऐसी घोषणाएं करते रहते हैं जिनसे देश को यह लगे कि वे ही सबसे बड़े देशभक्त हैं, वे कभी गलत हो ही नहीं सकते, महान ही नहीं महानतम भी वे ही हैं! इस तरह की घोषणाएं करते या उपदेश देते समय यह सोचने की जरूरत महसूस नहीं करते कि जो बोल रहे हैं वह संभव है भी या नहीं। उनके इस करतब के लिए लफ्फाजी शब्द बहुत अपर्याप्त, बल्कि उससे भी कम ही है। वैसे तो सभी राजनेता यह करते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में उस्तादों के उस्ताद के सरताज हैं।

हाल में उन्होंने अपने मंत्रियों से कहा कि उन्हें 365 दिन 24 घंटे काम करना होगा। बात चूंकि प्रधानमंत्री ने कही है तो इसे गंभीरता से तो लेना ही होगा। पहला सवाल कि क्या लगातार 365 दिन 24 घंटे काम करते रहना संभव है? क्या उनके मंत्री महामानव, सुपर कंप्यूटर या पौराणिक युग के अविश्वसनीय लगने वाले मिथकीय चरित्र हैं? क्या कंप्यूटर टेक्नॉलाजी द्वारा कोई चिप मंत्रियों के शरीर में लगवा दी गई है? या मोदीजी इतने बड़े जादूगर हैं कि वे अपने मंत्रियों को न सोने देंगे, न उन्हें भूख-प्यास लगने देंगे, न थकने देंगे, उन्हें कुछ अनिवार्य दैनिक कृत्यों से भी मुक्ति दिला देंगे? क्या उन्होंने कुछ ऐसा बंदोबस्त किया है कि चौबीस घंटे काम करते वक्त मसलन फाइल निपटाते वक्त, या मीटिंग करते हुए, जनता से मुलाकात करते हुए, भाषण करते-करते ये सभी अनिवार्य दैनिक कार्य स्वत: निपटते जाएंगे?

यह न तो मजाक है न ही अतिशयोक्ति। आखिर अभी तक के सबसे ‘महान’, भूतो न भविष्यति, श्रेष्ठों में श्रेष्ठ, देशभक्त प्रधानमंत्री ने बिना नशा-पत्ती किए अपने पूरे होशो-हवास में मंत्रियों को बाकायदा औपचारिक रूप से कहा है, केवल कहा नहीं, भरपूर प्रचारित भी कराया है कि उन्हें 24 घंटे 365 दिन काम करना है। यदि यह बात व्यावहारिक नजर न आती हो तो फिर यह होगा कि मंत्रीजी का नींद लेना, नित्य कर्म निपटाना, पानी पीना ,चाय-नाश्ता, भोजन करना, पारिवारिक सदस्यों के साथ समय बिताना, पारिवारिक समारोहों में शामिल होना, मित्रों के साथ हंसी-ठिठोली, किसी से प्यार करना, दिन में कई बार वस्त्र बदलना, कंघी करके बाल संवारना, जूते-मोजे पहनना, फिल्म देखना आदि जितने भी व्यक्तिगत और इंसानी जरूरतों वाले बखान किए जा सकने वाले और जनहित में बखान न किए जा सकने वाले काम हो सकते हैं वे सब देशहित के लिए किए जाने वाले काम घोषित किए जाएंगे और उन्हें देशहित में मानना सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य होगा! लोकतंत्र, समता, मानव अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी आदि बीमारियों से पीड़ित जो इसमें भरोसा नहीं करेंगे उन्हें पुलिसिया ढंग से निपटाया जाएगा। इसे भी यदि आप बकवास कह कर खारिज कर दें तो फिर यही ठीक रहेगा कि ‘कसमें, वादे, प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या! यहां जनता का कोई न पगले, मंत्री हैं मंत्री का क्या?

’श्याम बोहरे, बावड़ियाकलां, भोपाल

 

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