गणतंत्र दिवस पर जो हुआ उससे साबित हो गया है कि अब कृषि कानूनों से बहुत बड़ी हो गई है…
बिना महामारी के भी अर्थव्यवस्था लगातार नीचे जा रही थी, जिसमें गिरावट का दौर 2018-19 की पहली तिमाही में शुरू…
हिंदी में संज्ञा पदों के नाम-निर्धारण की पद्धति का अगर विश्लेषण किया जाए, तो एक बात बहुत स्पष्ट है। अगर…
सत्ता का असमंजस साफ झलकता है। भाजपा के कुछ परिचित प्रवक्ता बहसों में कभी किसानों की चापलूसी करते नजर आते…
हो सकता है कि किसानों की चिंताएं बेबुनियाद हों। हो सकता है, नई निजी मंडियों से उनको लाभ हो, लेकिन…
इस स्तंभ का मकसद किसी पर आरोप लगाना या अपमानित करना नहीं है। मकसद सीधा-सीधा यह सवाल पूछना है कि…
इस पुस्तक में संकलित निबंधों का फलक विस्तृत है। ये विविधवर्णी हैं। निबंधों के केंद्र में तो व्यक्ति है, पर…
अगर इस प्रकार के स्कूल स्थापित हों और लगातार इनकी संख्या बढ़ती रहे तो अनेक दृष्टिकोण परिवर्तन संभव हो सकेंगे।
सुपरिचित रचनाकार राजी सेठ की किताब जहां से उजास समानधर्मा अग्रजों और समकालीनों पर लिखे लेखों का संकलन है।