सुधीश पचौरी

सुधीश पचौरी के सभी पोस्ट 233 Articles

बाखबर: एक महायुद्ध लड़ते हुए

सबसे जोखिम भरे दृश्य पूर्ण बंदी के ऐन बाद दिखे। भयातुर खरीदारों की भीड़ों ने जरूरी ‘डिस्टेंसिंग’ की परवाह नहीं की। पूर्ण बंदी से...

बाखबर: महाजनों की मस्ती, जनता की जान सस्ती

अंत में आए प्रधानमंत्री! देश को समझाया कि कोरोना से जीतने के लिए उनको जनता से दो-तीन चीजें चाहिए : एक संयम और दूसरा...

बाखबर: कोरोना के मौसम में कविता

कोरोना का कहर इस कदर रहा कि दिल्ली के दंगों और सीएए पर राज्यसभा में हुई बहस तक अगले दिन खबरों में न रही!...

बाखबर: आह कोरोना वाह कोरोना

सीबीआई अफसर अंकित शर्मा को किसने मारा? ताहिर हुसैन को कौन बचा रहा है? इंस्पेक्टर रतनलाल को किसने मारा? डीसीपी अमित शर्मा और इंस्पेक्टर...

बाखबरः तीन दिन जला इतिहास

एक दंगा पूर्वी दिल्ली में, तो दस दंगे चैनलों में! एक चैनल कहता है कि हमारे एक रिपोर्टर के तीन दांत टूटे हैं, दो...

बाखबर: आए ट्रंप कृपाला

जब एक ही बहस में एंकर परदे पर एक ओर तीन तत्ववादी हिंदू चेहरे बिठाएं और उनके मुकाबले में तीन तत्ववादी मुसलमान चेहरे बिठा...

बाखबर: साधारण का आकर्षण

इस खबर से पूरे दो दिन तक एंकरों और चुनाव विशेषज्ञों के बीच सन्नाटा खिंचा रहा। तिस पर भाजपा के प्रवक्ताओं की निरे आत्मविश्वास...

बाखबर: सब जग जलता देखिया, अपनी अपनी आगि

वातावरण में तनाव है। कुछ भी हो सकता है। बेहतर हो कि सब पार्टियां मिल कर सहमति बनाएं। इसका हल निकालें।

बाखबर: गोली से गोली तक

शाम की चैनल-बहसों में भाजपा प्रवक्ता रक्षात्मक होने की जगह आक्रामकता से अपने मंत्री और सांसद के बयानों का बचाव करते दिखते हैं।

बाखबर: शाहीन बाग का मतलब

सीएए-एनआरसी को लेकर उनके मन में आशंकाएं हैं। ये लागू हुए तो वे और उनके बाल-बच्चे कहां जाएंगे?

बाखबर: आइए, जल्लाद जल्लाद खेलें

कई चैनल अपने रिपोर्टरों से शाहीनबाग को लाइव कवर कराते हैं और वे बैठी हुई औरतों की हिम्मत पर मुग्ध होकर उनकी विरोधमुद्रा का...

बाखबरः छपाक की छलना

शाम तक दीपिका पादुकोण आंदोलन करते जेएनयू-छात्रों को अपनी फिल्म ‘छपाक’ के लिए ‘लांचपैड’ की तरह इस्तेमाल करते हुए पांच मिनट की हाथजोडू मुस्कान...

बाख़बरः एक कविता जो सबकी है

हमारी बहसें कहां पहुंच गई हैं? ऐसी बहसों में शुरू से आखिर तक एक प्रकार का धार्मिक ध्रुवीकरण अपने आप उग आता है। हर...

बाखबर: साधारण का सौंदर्य

मालूम हुआ कि होने वाले सीएम का घर किसी आम गांव वाले का-सा है, जिसमें खाना धाती पर बैठ कर चूल्हे की आंच पर...

बाखबर: एक गुस्सा बिखरता हुआ

बहुत से भ्रम, डर, शक, आशंकाएं और वहम एक साथ जग गए हैं और कोई नहीं है, जो उनको प्यार से समझाए। इनको उनसे...

बाखबर: बाहरी बनाम भीतरी

शुक्रवार की सुबह जिस वक्त अदालत अपराधियों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उससे पहले ही, लगभग सभी चैनल फांसी फांसी चिल्लाते...

बाख़बर: विचारधारा का अंत

इसके बाद सबके कैमरे मुंबई के शिवाजी मैदान के शपथ समारोह में तैनात हो गए और मंच पर कौन कहां बैठा, कहां न बैठा,...

बाख़बर: जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान

हमारे कुछ एंकर इतनी तीक्ष्ण बुद्धि वाले हैं कि कुछ बड़े नेताओं के हर इशारे को पकड़ लेते हैं। इधर एक बड़े नेता कुछ...

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