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सुधीश पचौरी

सुधीश पचौरी के सभी पोस्ट 206 Articles

बाखबर: विश्वसनीयता की हतक

ऐसी हारी हुई मानसिकता वाली टिप्पणियों के लिए इनको ठोकना आसान था, लेकिन ‘पाक कुप्रचार’ से लड़ने वाले चैनलों की एक बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर...

बाखबर: कश्मीर कथा अभी बाकी है मेरे दोस्त

कश्मीर की दयनीय स्थिति के लिए उन्होंने हर लाइन में धारा तीन सौ सत्तर को जिम्मेदार ठहराया। कश्मीर की जनता को गरीब और पिछड़ा...

बाखबर: सावन का महीना धरम करे सोर

मुसलिम समाज में प्रचलित ‘तीन तलाक’ की कुप्रथा को अपराध घोषित करने वाले विधेयक को राज्यसभा में पास करा के भाजपा ने सचमुच इतिहास...

बाखबर: स्त्री-विरोधी मानसिकता

कुछ पक्षधर कहते रहे कि वे शायरी कर रहे थे, लेकिन गालिब किसी गली छाप के हाथ पड़ेंगे तो ऐसा ही होगा। देखते-देखते चैनलों...

बाखबर: एक धर्मयुद्ध के आसपास

एक हिंदू लड़की द्वारा एक ‘हेट-पोस्ट’ को फारवर्ड करने के ‘अपराध’ का संज्ञान लेते हुए झारखंड की एक अदालत ने सजा के रूप में...

बाखबरः गालियां खाके बेमजा न हुआ

साफ हुआ कि आज के आलोचक फिल्म की आलोचना नहीं करते। आलोचना के नाम पर फिल्म का प्रमोशन करते हैं और उसका बाजार बनाते...

बाखबर: रंगों की राजनीति

इसी श्रेणी की तीसरी खबर बनाई टीएमसी की नई सांसद नुसरत जहां ने जगन्नाथ रथयात्रा में बिंदी और सिंदूर लगा कर हिंदू विधि से...

बाखबर: निवेदन, आवेदन और दनादन

भाजपा के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय के एमएलए सुपुत्र आकाश ने जिस तरह निगम के अधिकारियों पर सरेआम बल्ला घुमाया, वह वर्ल्ड कप से...

बाखबर: कैसे कैसे मनोहर दृश्य!

इस बीच कैमरों ने दिखाया कि राहुल देखते रहे अपने मोबाइल को पूरे चौबीस मिनट और जब औपचारिकता में मम्मी सोनिया ने मेज थपथपाई...

बाखबर: दीदी को इतना गुस्सा क्यों आता है?

कुछ अंग्रेजी चैनलों की जात ही कुछ ऐसी है कि कमाई हिंदी विज्ञापनों से करते हैं और गरियाते भी हिंदी को हैं! अरे भैये!...

बाखबर: हिंदी को पीटना बंद करें

सबके पास होती है दूरदर्शन से उधार ली खबर, लेकिन बेचते ऐसे हैं, जैसे वह उन्हीं की लाई खबर हो! जिस तरह सब्जी वाला...

बाखबर: लटके हुए चेहरे

परिणाम आते रहे। एक ओर लड्डू लुटते रहे, दूसरी ओर चेहरे लटकते रहे! एक चैनल चिंतामग्न हुआ कि कहीं अब भारत हिंदू राष्ट्र न...

बाखबर: जय काली कलकत्ते वाली

यों तो अपने नेताओं के मुखारबिंद से नित्य अनमोल बोल झरते हैं, लेकिन चुनाव के इन आखिरी चरणों में जैसे मोती झरे वैसे कभी...

बाखबर: सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं

हर एंकर पहले अफसोस के साथ कहता है कि हाय! हमारी भाषा कितनी गिर गई है। फिर उसे बार-बार बजा कर, इस गिरावट पर...

बाखबर: हारी हुई आलोचना

बस एक ही सुंदर और प्रसन्न क्षण तब बनता दिखा, जब चैनलों में खबर ब्रेक हुई कि यूएन द्वारा मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय टेररिस्ट...

बाखबर: बिना विचारे जो करे …

बताइए, श्राप जैसी आध्यात्मिक कार्रवाई में चुनाव आयोग का क्या काम? कल को अगर स्वामी जी ने आयोग को ही श्राप दे दिया,...

बाखबर: शांतम् पापम् शांतम्

बोले हुए शब्द को ‘शांत’ करना टीवी दर्शकों का सारा मजा खराब कर देता है। सड़क की भाषा ही राजनीतिक भाषा है। जमीन पर...

बाखबर: उठ उठ री लघु लघु लोल लहर

शाम के छह बजे ज्यों ही पड़े हुए वोटों के आंकड़े आते हैं, त्यों ही एंकरों और रिपोर्टरों की परेशानी बढ़ जाती है कि...