पहाड़ की टूटी-फूटी सड़कों पर बरसात के दौरान आम लोग भी सड़क पर चलने से परहेज करते हैं।
बहुत पुराने समय से यह माना जाता रहा है कि शैशवास्था मां की छाया में बीतना चाहिए।
आजकल मैंने बच्चों को यह कहते सुना है कि माता-पिता को बच्चों की देखभाल करना और समझना नहीं आता।
अपने परिवेश की सामाजिक धारणाओं, मूल्यों-विश्वासों को हम इस तरह अंगीकार कर लेते हैं, जैसे वे हमारे अपनी धारणा, मूल्य,…
उस दिन हमारे पड़ोसी इस बात से प्रसन्न थे कि उनका बेटा शिक्षित हो गया।
कुछ दिन पहले अनायास ही मोबाइल फोन में गीत बजाना शुरू किया तो कई पुराने गाने जेहन में उभर आए…
अपनी पुस्तक ‘शिक्षा में क्रांति’ में ओशो कहते हैं कि जिस दिन शिक्षक और विद्यार्थी के ज्ञान में अंतर एवरेस्ट…
मनुष्य हमेशा से एक बड़े समूह की इकाई है, जिसके बिना उसकी सामाजिक पहचान नहीं है।
पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान दुनिया ने जीवन के कई नए रंग देखे।
हम सब जानते हैं कि जीवन एक बार मिलता है, जिसे संपूर्णता के साथ जिया जाना चाहिए। लेकिन लड़कियों के…
कुछ लोग अतीत के बुरे अनुभव और भूलों पर इतना टिक जाते हैं कि उनकी एकाग्रता पूरी तरह बीते समय…
शिक्षकीय पेशे के शुरुआती दिनों के दौरान एक बार कक्षा में कॉपी जांच रहा था। बच्चे बारी-बारी अपनी कॉपी के…