Dunia mere aage

दोस्ती बनाम दीवारें

अक्सर हमें ऐसे इंसान की तलाश होती है, जिससे हम अपना सुख-दुख, हर्ष-विषाद, हंसी-खुशी साझा कर सकें और अपनी इन्हीं अनकही भावनाओं को खुल कर व्यक्त करने के लिए हम सबको मित्र की जरूरत होती है।

बाजार में संवेदनाएं

प्रेम एक शब्द से अधिक भाव है। इसकी भाषा को हर कोई जानता है, भले ही भाषा कोई हो।

बुढ़ापे की छांव में

जिंदगी एक पहाड़ है। इसके एक-एक पड़ाव एक-एक चोटी हैं। जैसे-जैसे ऊपर चढ़ते जाएंगे, थकान बढ़ती जाती है।

आभासी सौंदर्यबोध

चिंतक लोर्का ने एक स्थान पर लिखा है कि ‘जीवन और कुछ भी नहीं है, बल्कि घटनाओं से भरा हुआ एक संघर्ष है।’ इसके अर्थ अब शायद बदल गए हैं।

त्रासद सपनों की विरासत

भूखा आदमी परेशान है। एक छोटा-सा परिवार भी है उसका। कितनी भयानक सर्दी है। पेट में अन्न का दाना नहीं।

पसंद नापसंद

किसी पत्र-पत्रिका में मेरी कोई रचना छपती और वह मेजर साहब की नजर से गुजरती है, तो उनका फोन आता ही है।

भेदभाव का पाठ

नब्बे साल की बुजुर्ग महिला ने कहा- ‘मैं अगला जन्म लूंगी तो ये मोटी-मोटी बड़ी किताबें पढूंगी।’ उनके मन की कसक मुझे कहीं अंदर तक कचोट गई।

अच्छाई का दायरा

मनुष्य हर समय कुछ न कुछ सीखता और सिखाता रहता है। दुनिया में सब तरह के लोग होते हैं।

अभिव्यक्ति का आकाश

पिता-पुत्र या भाई-भाई के भिन्न विचारों को लेकर होने वाले झगड़े या मनमुटाव को हमारा समाज सामान्य रूप में स्वीकार कर लेता है, लेकिन पति-पत्नी के भिन्न विचारों को लेकर हुए झगड़े और मनमुटाव को समाज टेढ़ी नजर से देखता है।

इंसानियत का चेहरा

बाघों, शेरों सहित कई वन्य जीवों की घटती संख्या के बारे में आए दिन हम अखबारों में पढ़ते और टीवी पर देखते-सुनते हैं।

दुनिया मेरे आगे: एकांगी दृष्टि

हममें से बहुत कम लोग व्यक्तियों, घटनाओं और विचारों को समग्रता से देख, परख और समझ पाते हैं।

दुनिया मेरे आगे: मुस्कान की भाषा

ख्वाब देखा जाए या सपना, बात एक ही है। बस भाषा का फर्क है। भाषा वही जो दिलों में उतर जाए।

दुनिया मेरे आगे: प्रेम की खोज में

प्रेम के बारे में कहा जाता है कि यह मिलन में ही नहीं, विरह में भी महसूस किया जा सकता है। प्रेम मधुर कल्पना भी है कि उन्हें याद कर खो जाए तो बस खो जाए।

दुनिया मेरे आगे: दोस्त एक आईना

रिश्तों में सबसे अच्छा रिश्ता कौन-सा? पूछिए किसी से भी, वह कहेगा दोस्ती का। दोस्ती का ही क्यों? क्योंकि दोस्तों में किसी तरह की स्पर्धा नहीं होती, किसी तरह का मान-मनौवल नहीं होता।

दुनिया मेरे आगे: बसंत की पगध्वनि

बसंत प्रकृति की मुस्कान है। उसकी खुशी है। जिस तरह हमारा जीवन खुशियों से शृंगार कर खिलता है, बिल्कुल उसी तरह वर्ष बसंत के माध्यम से मुस्कुराता है। बसंत जीवन की उदासी को मिटाती प्रेरणा है।

दुनिया मेरे आगे: कामयाबी के औजार

हर व्यक्ति अपने जीवन में सुदृढ़ होना चाहता है। चाहे वह शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य की बात हो या फिर आर्थिक संपन्नता की। प्रकृति में भी वही जीव-जंतु अपना अस्तित्व बनाए रख पाते हैं, जिनमें या तो संघर्ष करने का सामर्थ्य होता है या खुद को परिस्थिति के अनुरूप बदल लेने की योग्यता।

दुनिया मेरे आगे: नेकी कर दरिया में डाल

पर्व-त्योहार मनाने या दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए दान देने से बेहतर और कोई तरीका नहीं माना जाता है। लेकिन दान किसको दिया जाए, इसके विषय में सोच-विचार की परंपरा हमारे देश में कम ही दिखती है।

दुनिया मेरे आगे: दुर्लभ एकांत

वर्जीनिया वुल्फ ने स्त्री के ‘अपने कमरे’ का मुहावरा भले ही लिखने वाली स्त्रियों के लिए दिया था, लेकिन मेरी दृष्टि में यह बाकी स्त्रियों पर भी उतना ही सटीक बैठता है।

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