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संजीव राय के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे: गुलाबी साइकिलें

आजादी के आंदोलन के दौरान शिब्ली-मंजिल में जवाहरलाल नेहरू और तेजप्रताप सप्रू जैसे लोगों का आना-जाना रहता था।

दुनिया मेरे आगे: सिमटते अखाड़े

सत्तर और अस्सी के दशक तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकतर गांव में अखाड़े होते थे। छोटे-बड़े सभी उम्र के कुश्ती के शौकीन लोग...

दुनिया मेरे आगे: महत्त्वाकांक्षा की मार

दिल्ली से बाहर रहने के कारण अभिभावक-शिक्षक मीटिंग में मेरी शिरकत पहले कम ही रही है। पत्नी ने इस दायित्व को निभाया है। लेकिन...

‘दुनिया मेरे आगे’ कॉलम में संजीव राय का लेख : कामयाबी के पैमाने

मीडिया में उस लड़की की तस्वीरें इस तरह चलाई जा रही थीं, जैसे वह कोई बड़ा अपराधी चेहरा हो। अफसोस इसका है कि उसे...

दुनिया मेरे आगेः दोस्त बनाते रहिए

पड़ोसी एक ऐसा शब्द है, जिसका भूगोल संदर्भ के साथ बदलता रहता है। शहरीकरण की प्रक्रिया और आजीविका के लिए इस शहर से उस...

विचार पर हावी टीवी

दरअसल, अब हमारे टीवी का रिमोट हमारे हाथ से छिन कर मीडिया हाउसों के हाथ में चला गया है।