पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम ने स्वयं के अपने अनुभवों के आधार पर एक बार कहा था कि “मैं अच्छा…
हिंदी व्याकरण की अनेक पुस्तकें लिखी गर्इं और आज भी लिखी जा रही हैं। पर सभी पुस्तकें तरह-तरह की असंगतियों…
असल में किसी भाषाभाषी में जब उच्चता का बोध आ जाता है, तो वह दूसरी भाषा नहीं सीखना चाहता।
राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान दिल्ली के पूर्व कुलसचिव प्रो. विपिन कुमार ठाकुर ने कहा कि कलाकार अपनी अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही…
पिछले दिनों आकाशवाणी के अस्थायी उद्घोषकों की स्वर-परीक्षा में निर्णायक के रूप में शामिल होने का अवसर मिला। इस स्वर-परीक्षा…
एक सभ्य लोकतंत्र, राजनीति के पक्ष-प्रतिपक्ष, समर्थन-विरोध या प्रकृति-संस्कृति का ही लोकतंत्र नहीं होता। वह भाषा का लोकतंत्र भी होता…
अन्य देशों में जो वैज्ञानिक क्रांति आई, वह वहां के मजदूरों और कारीगरों द्वारा लाई गई। उन्होंने काम करते समय…