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अतुल चतुर्वेदी के सभी पोस्ट

उम्मीदों के समांतर

हमारा देश नित नूतन सवालों का देश है। लेकिन कुछ सवाल शाश्वत हैं जो कभी नहीं बदलते या हम उन्हें गंभीरता से बदलना ही...

दुनिया मेरे आगे: उत्सवधर्मिता की तलाश में

व्यष्टि की जगह समष्टि चिंतन का विचार आज लगभग बेमानी हो चुका है। यह शुद्ध बाजारी ताकतों का प्रभाव है। बाजार आज हमारे शयन...

रंग रसायन

घर के सब सदस्य मिलजुल कर कमर कस लेते थे। गुझिया, बेसन पापड़ी और मीठे, नमकीन शकलपारे बनाने के लिए। स्वागत में सत्कार का...

दरकते रिश्तों का नेपथ्य

एक सर्वे के अनुसार परिवार न्यायालयों में दिल्ली और दूसरी जगहों पर प्रतिवर्ष तलाक के मामले बढ़ रहे हैं। लेकिन अफसोस तब होता है...

भाषा के प्रश्न

पिछले दिनों आकाशवाणी के अस्थायी उद्घोषकों की स्वर-परीक्षा में निर्णायक के रूप में शामिल होने का अवसर मिला। इस स्वर-परीक्षा में एक प्रश्नपत्र भी...

हाशिये पर हंसी

इन दिनों लगता है, हंसी को हाशिये पर धकेला जा रहा है। अब यह जानबूझ कर हो रहा है या सहज भाव से हमारे...

अतुल चतुर्वेदी का कॉलम: वेतन आयोग की सिफारिशें और उम्मीदों के हिंडोले

वेतन आयोग की सिफारिशें आ गई हैं, और उम्मीदों के वृक्ष लद गए हैं। कर्मचारी हर्षाए हुए हैं कि कभी तो दूल्हे की बुआ...

सिमटते सरोकार के दौर में

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर जहां तक चला गया है, उसमें बहुत सारे लोग यह साफ महसूस कर सकते हैं कि इसका उनकी सेहत...