टीवी धारावाहिक महाभारत के सूत्रधार की गंभीर आवाज में कहे गए शब्द ‘मैं समय हूं’ को कौन भूल सकता है।
इतिहास साक्षी है कि मनुष्य के संकल्प के सामने नकारात्मक शक्तियां भी नाकाम हो जाती हैं।
भागदौड़ भरी जीवन शैली ने जीवन की छोटी-छोटी बातों की तरफ हमारा ध्यान जाने से लगभग रोक दिया है।
अनुभूति को अभिव्यक्ति का वरदान मिलना एक दुर्लभ संयोग है। वरना लोग यही कहते रहते हैं कि जैसा उन्होंने सोचा…
अपने आसपास के लोगों से सुनी हुई बातें आमतौर पर धारणा बन कर हमारे मनोविज्ञान का हिस्सा बन जाती हैं।…
पिछले समूचे साल ‘लोकल टू वोकल’ यानी स्थानीय को लेकर जागरूक होने का ऐसा शोर हुआ कि हम भी स्थानीय…
हमारे पूर्वज शुरू से ही हमारी जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान की अनगिनत बातें बताते रहे हैं। अनेक…
सन 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने जब अपने श्रोताओं को ‘मेरे अमेरिकी बहनों…
इन दिनों बच्चियों के जीवन से गुड़िया खो-सी गई है। पहले उनके जीवन में गुड्डे भी होते थे और गुड़िया…
अब सारे अक्षरों में से जीवन के वे रंग गायब हो गए लगते हैं। कुछ खास फॉन्ट में लिखे हुए…
मानव युगों से यह कशमकश कर रहा है और वह अज्ञानता का यात्री होने के बावजूद ज्ञान की खोज कर…
एक दौर था, जब दीपावली आते ही स्थानीय हाट और बाजार मिट्टी के दीये और संबंधित अन्य आवश्यक सामग्रियों से…