
2017 और 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों की गति पकड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस दौरान…

2017 और 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों की गति पकड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस दौरान…


हमारे गांव के जवान बड़े-बड़े शहरों की छोटी-छोटी फैक्टरियों के मजदूर बन कर अपना मुंह छिपाने को बेबस हैं।

यह उम्र ही ऐसी होती है। सब कुछ अच्छा लगता है। सुंदरता और शोख रंग तो खींचते ही हैं, पर…

हर भाषा में कुछ न कुछ ऐसी रचनाएं होती हैं, जिनकी प्रासंगिकता बनी रहती है। जमाना बदलता रहता है किसी…


एक दिन मिंकू ने तय किया कि अब से वह अपने भोजन की व्यवस्था खुद करेगा। गरमी के दिन थे।…

गरमी में अगर आप गहरे रंगों से गुरेज करती हैं, तो इस बार ऐसा करने से रह सकता है आपका…

दिन में जब कभी सुविधा हो, आंखों का व्यायाम करें। यह बहुत आसान है और ऐसा करने से न सिर्फ…

भारत में 2005 के बाद से श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी घटती जा रही है। यह वाकई विचारणीय है, क्योंकि…

चरैवेति चरैवेति’ यानी चलते रहो, चलते रहो! भारतीय संस्कृति का यह पुरातन सूत्र गति, प्रगति और विकास के माध्यम से…
