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सेहत- आंखों की देखभाल

दिन में जब कभी सुविधा हो, आंखों का व्यायाम करें। यह बहुत आसान है और ऐसा करने से न सिर्फ आंखों की तरलता बनी रहती है, देखने की तकलीफ दूर होती है, बल्कि सिर का भारीपन और थकान भी मिटती है।

Author June 18, 2017 3:52 AM
प्रतिकात्मक फोटो।

आमतौर पर लोग आंखों की देखभाल के मामले में लापरवाह देखे जाते हैं। आज जब टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल जैसे उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, आंखों की परेशानियां भी बढ़ रही हैं। स्कूलों में बच्चों को श्यामपट््ट पर लिखी इबारत देखने में मुश्किल आती है। इसलिए उन्हें कम उम्र में चश्मे पहनने पड़ रहे हैं। दफ्तरों में घंटों कंप्यूटर पर काम करते रहने की वजह से आंखों की रोशनी कमजोर होने लगी है। आंखों की पेशियां शिथिल होने लगी हैं। जब लोग कंप्यूटर पर काम नहीं कर रहे होते तो मोबाइल फोन पर कुछ न कुछ करते रहते हैं। चूंकि अब इंटरनेट की सुविधा मोबाइल फोन पर उपलब्ध है, इसलिए लोगों को मोबाइल के जरिए सोशल मीडिया से जुड़े रहने की सुविधा उपलब्ध हुई है। फिल्में देखने, किताबें पढ़ने, सूचनाएं हासिल करने, गेम खेलने आदि की सुविधाएं उसमें भरपूर हैं। इसलिए आज की युवा पीढ़ी अपना अधिकतर समय मोबाइल फोन पर गुजारती है। मोबाइल पर अधिक समय बिताने से आंखों में कई तरह की परेशानियां पैदा होती हैं।  अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो आंखों की परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
’ कंप्यूटर पर काम करते समय बीच-बीच में आंखों को आराम दें। अगर एक घंटा काम करते हैं तो दस मिनट के लिए कंप्यूटर से उठ जाएं या ऐसा कोई काम करें, जिसमें आंखों को ज्यादा देर एक जगह केंद्रित करने की जरूरत न पड़ती हो। कंप्यूटर पर काम करते हुए पलकें झपकाने की दर सामान्य अवस्था की अपेक्षा काफी कम हो जाती है। इसलिए बीच-बीच में कंप्यूटर से ध्यान हटाने से पलकें झपकाने की दर बढ़ती है और आंखों की तरलता बनी रहती है।

’ अगर आप चश्मा पहनते हैं तो एंटीग्लेयर यानी ऐसे शीशे का इस्तेमाल करें, जो चमक का प्रभाव कम करता है। इससे कंप्यूटर पर काम करने से आंखों पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव कम हो जाता है।
’ अंधेरे में कभी मोबाइल फोन इस्तेमाल न करें। मोबाइल फोन की रोशनी की तीव्रता अधिक होती है, जो आंखों की रेटिना पर प्रभाव डालती है। यही बात टीवी और कंप्यूटर के मामले में भी लागू होती है। ट्यूबलाइट या दूधिया रोशनी ऐसे उपकरणों के लिए उचित होती है।
’ खासकर बच्चे माता-पिता से छिप कर देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए कमरे की रोशनी अक्सर बंद कर देते हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकें।
’ धूप में और बर्फ वाले पहाड़ों पर जब भी निकलें, धूप के चश्मे पहनें। यह ध्यान रखें कि धूप के चश्मे का कांच पैरा बैगनी किरणों से बचाव करने वाला हो।
’ सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद आंखों को साफ पानी से छपाके मार कर धोएं। अगर मुंह में पानी भर कर, गाल फुला कर छपाके मारे जाएं तो आंखों अधिक आराम मिलता है। इस तरह रात को जमा आंखों की मैल धुल जाती है और आंखों का व्यायाम भी हो जाता है। जब भी देर तक बाहर घूमने के बाद घर लौटें, आंखों को छपाके मार कर अवश्य धोएं।
व्यायाम

’ दिन में जब कभी सुविधा हो, आंखों का व्यायाम करें। यह बहुत आसान है और ऐसा करने से न सिर्फ आंखों की तरलता बनी रहती है, देखने की तकलीफ दूर होती है, बल्कि सिर का भारीपन और थकान भी मिटती है। व्यायाम इस प्रकार करें-
’ गर्दन को स्थिर रखें। आंखों की पुतलियों को कम से कम पांच बार बाएं और फिर दाएं की तरफ घुमाएं। जब पुतलियों को बाएं ले जाएं तो कुछ सेकेंड के लिए वहां रोकें, फिर दाएं ले जाएं और कुछ सेकेंड के लिए वैसे ही रोकें।
’ इसी तरह पांच बार ऊपर और नीचे की तरफ देखें।
’ फिर पुतलियों को गोलाकार घुमाएं- बाएं से शुरू कर ऊपर ले जाएं और दाहिनी तरफ से घुमाते हुए नीचे ले जाएं। इस तरह पांच बार करें।
’ फिर दोनों पुतलियों को अपनी नाक की नोक पर केंद्रित करें। यह प्रक्रिया भी पांच बार दोहराएं।
’ आंखों को भींचते हुए पांच बार बंद करें और खोलें।
’ भौहों के ऊपर तर्जनी से दबाते हुए हल्के-हल्के मालिश करें।
यह व्यायाम दिन में कभी भी अपनी सुविधा के हिसाब से कर सकते हैं।
’ अगर स्वीमिंग पूल में नहाने जाते हैं, तो प्रयास करें कि पानी का चश्मा पहनें। आमतौर पर पानी के जरिए संक्रामक बैक्टीरिया जल्दी आंखों को प्रभावित करता है, जिससे आंखों का फ्लू हो जाता है।
’ रात में सोने से पहले अगर आंखों में एक-एक बूंद गुलाब जल डालें, तो आंखों की मैल साफ हो जाती है और उनकी तरलता बनी रहती है। जो लोग मोटर साइकिल पर चलते हैं या बाहर अधिक रहते हैं उनकी आंखों में धूल-मिट्टी के जरिए बैक्टीरिया के जाने का खतरा अधिक रहता है। उनके लिए गुलाब जल बहुत राहत देता है।

 

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