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कहानी- गलती कहां हुई

एक दिन मिंकू ने तय किया कि अब से वह अपने भोजन की व्यवस्था खुद करेगा। गरमी के दिन थे। इन दिनों तरबूज खूब आ रहे थे। मिंकू तरबूज के एक खेत में जा पहुंचा।

Author June 18, 2017 03:58 am
प्रतीकात्मक चित्र।

शिखर चंद जैन

नंदनवन में इन दिनों बंदर का एक बच्चा बड़ी उछल-कूद मचा रहा था। जंगल का कोई भी जानवर इस छोटे से बच्चे को नहीं जानता था। ऐली हाथी ने उत्सुकतावश उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम मिंकू बताया। मिंकू किसी दूसरे जंगल से भटक कर यहां आ गया था। जंगल के सबसे बुजुर्ग जानवर टॉर्टी कछुए ने उससे पूछा, ‘बेटा किस जंगल से आए हो?’ लेकिन मिंकू कुछ बता नहीं पाया। हां, उसने अपनी मां का नाम टीम्मी और पिता का नाम रोमी बताया। लेकिन सिर्फ नाम से तो इतनी बड़ी दुनिया में किसी को खोजना संभव था नहीं। इसलिए नंदनवन के पशु-पक्षियों ने मिंकू से आगे कुछ नहीं पूछा। मिंकू नंदनवन में ही रहने लगा।  नंदनवन के जानवर बहुत भले थे। वे अपने भोजन में से उसे भी खिला-पिला देते। सभी जानवरों के बच्चे उसके साथ खेलते-कूदते भी थे। लेकिन मिंकू को दूसरे जानवरों के साथ रहना और उनका लाया भोजन रास नहीं आ रहा था। संयोगवश जंगल के सभी बंदर इस वक्त अपने रिश्तेदारों के यहां दूसरे जंगलों में गए हुए थे। इसलिए जंगल के जानवरों के पास कोई उपाय भी नहीं था।

एक दिन मिंकू ने तय किया कि अब से वह अपने भोजन की व्यवस्था खुद करेगा। गरमी के दिन थे। इन दिनों तरबूज खूब आ रहे थे। मिंकू तरबूज के एक खेत में जा पहुंचा। उसने सुना था कि तरबूज एक रसीला फल होता है और उससे भूख और प्यास दोनों मिटते हैं। मिंकू ने एक तरबूज हाथ में लिया और उसके कठोर छिलके को खाने की कोशिश करने लगा। लेकिन छिलका मुंह में जाते ही उसके मुंह का स्वाद कसैला हो गया। वहीं खड़े डिंकी गधे ने उसे समझाना चाहा, ‘बेटा, इसे खाने का तरीका यह नहीं है।’ इस पर मिंकू चिढ़ कर बोला, ‘तुम अपना काम करो न, मुझे मत समझाओ… चलो फिर भी जब टोक ही चुके तो बोलो अब।’  डिंकी ने उसकी बात का बुरा नहीं माना। उसे बच्चा समझ कर उसने समझाया, ‘हमें किसी भी फल का छिलका नहीं, बल्कि भीतर से उसका गूदा खाना चाहिए। तभी उसका असली स्वाद मिल सकेगा।’  ‘हम्म… तो ये बात है।’ मिंकू ने कहा, ‘मैं अब अच्छी तरह समझ गया।’ इसके बाद मिंकू कुछ ही दूरी पर स्थित एक दूसरे खेत में घुस गया। वहां बहुत सारे खरबूजे थे। ‘अब मजा आएगा’, मिंकू ने मन ही मन सोचा, और एक खरबूजा तोड़ लिया। इस बार उसने खरबूजे को फोड़ कर उसके बीचों बीच मौजूद गूदे को मुंह में डाला। लेकिन अगले ही पल थू-थू करके फेंक दिया। यह क्या? इसमें तो बीज और पिलपिला और बेस्वाद-सा गूदा है। धत तेरी की। सारा मजा ही किरकिरा हो गया।

वह बुरा-सा मुंह बना कर बड़बड़ा ही रहा था कि तब तक वहां कैमू ऊंट आ गया। वह एक मिनट में सारा माजरा समझ गया। उसने समझाया, ‘बेटा, तुम्हें इसके खोल को खाना चाहिए था, गूदे को नहीं।’ मिंकू ने सोचा, ‘लगता है गधे ने गलत समझा दिया। अबकी बार इस ऊंट की बात पर ही अमल करूंगा।’मिंकू कूदते-फांदते हुए अखोट के पेड़ पर जा पहुंचा। उसने बड़े चाव से एक अखरोट तोड़ लिया और उसके खोल को खाने की कोशिश करने लगा। लेकिन यह क्या! एक तो उसकी जीभ कड़वी हो गई, ऊपर से दांतों में दर्द भी हो गया।
वह दौड़ा-दौड़ा नदी किनारे गया और जल्दी से मुंह में खूब सारा पानी भर कर कुल्ले करने लगा। वहां बुल्लो भैंस भी पानी पी रही थी। उसने पूछा, ‘क्या हुआ बेटे? तुमने इतना बुरा-सा मुंह क्यों बना रखा है?’ मिंकू ने कहा, ‘मौसी, मैंने ऊंट के कहने पर अखरोट का खोल खा लिया, बस तभी मेरी यह हालत हो गई।’

इस पर बुल्लो ने कहा, ‘अरे नहीं। किसी फल को भीतर से खाते हैं, बाहर से नहीं।’
मिंकू ने कहा, ‘ठीक है, ऐसा ही करूंगा।’ इस बार वह नाशपाती के पेड़ पर जा पहुंचा। बुल्लो के समझाने के मुताबिक वह नाशपाती के भीतर मौजूद बीज खाने लगा। लेकिन इस बार फिर गड़बड़ हो गई, एक बार फिर उसका मुंह कड़वा हो गया। उसे गुस्सा भी आ रहा था और भूख के मारे रोना भी आ रहा था।
सुबह से तेज धूप में घूमते-घूमते उसकी हालत पतली हो चुकी थी। मिंकू को कुछ समझ में नहीं आया, तो वह जोर-जोर से रोने लगा। उसे रोता देख जंगल के बहुत सारे पशु-पक्षी इकट्ठा हो गए। जैकी जिराफ ने उसे पुचकारते हुए पूछा, ‘बेटा क्या बात है? तुम रो क्यों रहे हो?’ इस पर मिंकू ने रोते-रोते पूरी बात बता दी। उसकी बात सुन कर सभी जानवरों को हंसी आ गई। रैबी खरगोश ने कहा, ‘बेटा, अभी तुम्हें दुनियादारी में बहुत कुछ सीखना है। जिंदगी में कोई चीज रटे हुए फार्मूले पर नहीं होती। हमें पल-पल अपने निर्णय बदली हुई परिस्थितियों के मुताबिक लेने होते हैं। तुम टेंशन मत लो। कुछ दिन हमारे साथ रह कर दुनियादारी सीखो। हम तुम्हें तुम्हारा मनपसंद भोजन देंगे। फिलहाल ये मीठे केले खाओ।’ ऐसा कहते हुए रैबी ने उसे दो केले छील कर दिए। भूख से बिलबिला रहे मिंकू ने झटपट केले खा लिए। लेकिन उसे अब भी समझ में नहीं आ रहा था कि उससे आखिर गलती कहां हुई? आप बताइए तो जरा! ०

 

 

 

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