
कभी तेज धूप, कभी उमस तो कभी झमाझम बरसात। बरसात का यह मौसम बड़ी उलझन वाला होता है। समझ नहीं…

कभी तेज धूप, कभी उमस तो कभी झमाझम बरसात। बरसात का यह मौसम बड़ी उलझन वाला होता है। समझ नहीं…

मैं धर्म और जाति से परे एक भारतीय हूं।’ यह वाक्य दादाभाई नौरोजी ने तब कहा जब वे ब्रिटिश संसद…

महाराष्ट्र में बेसन, पोहा, साबूदाने आदि से तैयार होने वाले अनेक स्वादिष्ट नाश्ते बनते हैं। पर मराठी नाश्ते के रूप…

पिछले दिनों एक अस्सी साल की कृशकाय बूढ़ी अम्मा से मुलाकात हुई थी। वह लाठी टेकती मिली थी। पता चला…

समाजशास्त्रीय दृष्टि से विचार करते हुए प्रमाणित हो चुका है कि भाषा लोकजीवन के विविध प्रसंगों में प्रवहमान रह कर…

समंदर हमेशा की तरह उदास है। या यह उसका मन है! सालों से देखती आई है वह, आकाश का रंग…


समलैंगिक संबंधों को लेकर दुनिया भर में बहस होती रही है। कई देश इसे कानूनी मान्यता दे चुके हैं। भारत…

बाल साहित्य वह माध्यम है, जिसके द्वारा किसी भी देश की और उसकी राह पूरी धरती की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा…

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए…

भोलू नाम का लड़का था। वह सिर्फ नाम से नहीं, स्वभाव से भी भोलाभाला था। उसे हर कोई प्यार करता…

जब कोई खुशी का मौका हो, तो रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों आदि के साथ मिल-बैठ कर खाना-पीना किसे अच्छा नहीं लगता।…