
शंकरानंद की कविताएं


किसी भी सभ्यता और संस्कृति के लिए उसकी सांस्कृतिक गतिविधियां जरूरी हैं और इसके लिए आवश्यक है संगीत। संगीत या…

अच्युतानंद मिश्र की इस पुस्तक की मूल प्रतिज्ञा आज के पूंजीवाद-निर्मित समाज को मार्क्सवाद से अनुप्राणित चिंतकों के संदर्भ से…



स्त्री और पुरुष के लिए बराबर बनाई गई दुनिया में, स्त्री के अपने हिस्से में आई असमानता को समानता में…


हमारी विरासत बूड़ रही है, बूड़ती जा रही है, हम हैं कि चाय की चुस्कियां लेते अपनी विरासत के बूड़ने…

उत्तर में ठंडे अंदाज में पतली-दुबली लड़की के शब्द थे- ‘आई विल एप्रीशिएट दिस।’


बच्चों के साथ बढ़ते यौन शोषण को एक गंभीर समस्या के तौर पर लेते हुए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुके शन…

इधर हिंदी में जो नए लेखक आ रहे हैं, वे बहुत पढ़े-लिखे हैं और ज्ञान के दूसरे अनुशासनों से संबद्ध…