
यहां पढ़िए सांत्वना श्रीकांत की कविता।


यह बदलाव की ब्यार है। इसे आने वाले दिनों में लोग महसूस करेंगे। नौकरी, पढ़ाई, सामाजिक शिष्टाचार, एक दूसरे के…


... जिंदगी के मायने क्या हैं, लोग आज तक नहीं समझ पाए हैं। बस भाग रहे हैं अपने सुख के…


रास्ते में आ रहे सभी मेट्रो स्टेशनों के बाहर वीरानी छाई है। प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं। वहां…


...साठ-सत्तर की रफ्तार में कार दौड़ रही है। गलियों और मोहल्लों में दिखने वाले कुत्ते मुख्य सड़कों पर आ गए…


...ऐसी सुख की नींद दे सकोगे नीलाभ? उसने पूछा था। एक पल के लिए खो गया था नीलाभ, इस लड़की…

नृत्य रचना ‘वृंदावन’ का आरंभ मीरा बाई की रचना से हुआ। यह मीरा बाई के पद ‘आली मणे वृंदावन नीको,…

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की दो कविताएं।