ताज़ा खबर
 

लास्ट कोच: जिंदगी के कैनवस पर

... जिंदगी के मायने क्या हैं, लोग आज तक नहीं समझ पाए हैं। बस भाग रहे हैं अपने सुख के लिए। पैसे बटोरने के लिए। इसके लिए छल-कपट से भी परहेज नहीं। जीवन के कैनवस पर लोगों को सिर्फ ब्लैक स्पॉट ही दिखता है लोगों को। हम सब के जीवन में एक बड़ा हिस्सा सफेद का है, मगर ध्यान ब्लैक स्पॉट पर ही जाता है। यानी हम जीवन के सकारात्मक पक्ष पर नहीं सोचते। छोटी-छोटी नकारात्मक बातों पर ही निगाह रहती है। जीवन के एक पहलू को लास्ट कोच शृंखला में बता रहे हैं लेखक और पत्रकार संजय स्वतंत्र।

हम सब के जीवन में एक बड़ा हिस्सा सफेद का है, मगर ध्यान ब्लैक स्पॉट पर ही जाता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लॉकडाउन की बंदिशों के बीच गाड़ी खाली सड़क पर सरपट दौड़ रही है। पूर्णबंदी से कुछ राहत मिलने के बाद अगल-बगल से गाड़ियां जाती हुई दिखने लगी हैं। अप्रैल का आखिरी हफ्ता है। मगर अभी तक सूरज दादा की त्योरियां चढ़ी नहीं हैं। मैंने कार के शीशे नीचे कर लिए हैं। हवा में तपिश नहीं है। वजह साफ है। फैक्टरियां बंद हैं। कुछ खुली भी हैं, तो उनमें आधे लोग आ रहे हैं। वहीं ज्यादातर लोग एअरकंडीशनर कम ही चला रहे हैं। पंखे की हवा सुहानी लग रही है। इन दिनों मौसम का अंदाज बदला-बदला सा है।

घरोंं में बंद लोगछत या बालकनी से चांद और तारे देख कर अचंभित हो जाते हैं। इन दिनों वे मन मोह ले रहे हैं। गमलों में पौधे हरे-भरे हो गए हैं। देख रहा हूं कि सड़कों के किनारे पेड़ खुशी से झूम रहे हैं। क्यों न हो हर दिन सुबह से रात तक गाड़ियों से निकलने वाले धुएं अब उन्हें परेशान नहीं करते। इसलिए पेड़-पौधे अब खुश हैं। जिंदगी का यह नया कैनवस है। इस पर जो काला धब्बा बना है न कोरोना का, उससे मुंह फेर लीजिए।

… मगर मैं मेट्रो से मुंह नहीं फेर पाता। दिल्ली की उस जीवन रेखा से जिससे मुझे पहले दिन से मोहब्बत है। इठलाती-बल खाती हुई और दौड़ कर गले लगा लेने वाली मेट्रो को भूल नहीं पाता। आज वह मुस्कुरा कर स्वागत करने में असमर्थ है। … देख रहा हूं कि ज्यादातर मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे बंद हैं। कोई हलचल नहीं। लास्ट कोच की यात्राएं याद आती हैं। अलबत्ता रात में लौटते समय देखा है उसे उदास कदमों से यार्ड की ओर जाते हुए। उस लास्ट कोच पर भी निगाह गई, जिसमें मैंने जीवन के कई रूप देखे हैं।

…गाड़ी अपनी पूरी रफ्तार में भाग रही है। सामने ही मजनू का टीला है। एक ऐसा इलाका जहां कोई टीला नहीं। गाड़ी कच्ची कालोनी की ओर बढ़ रही है। सड़क किनारे बच्चे खेल रहे हैं। जाने कब गाड़ी के आगे आ जाएं, इस डर से विमल जी यानी अपने चालक को आगाह कर रहा हूं। वे सचेत हो गए हैं। ऊबड़-खाबड़ गली में गाड़ी हिचकोले खाती आगे बढ़ रही है। तभी मोबाइल की कॉलर ट्यून ने ध्यान खींच लिया है। यह डॉ अनामिका की कॉल है।

हेलो…हेलो….तुम्हारी आवाज नहीं आ रही अनामिका, मैं उसे बोल रहा हूं। … उधर, गाड़ी सिग्नेचर ब्रिज की और बढ़ गई है। यहां सिग्नल कमजोर हो गया है। मगर सिग्नल मिलते ही उसकी आवाज सुनाई देने लगी है… कैसे हैं आप? आफिस जा रहे हैं? मालूम है आप ऐसे गंभीर हालात में भी जा रहे होंगे। जोखिम लेना आपकी आदत है। स्वास्थ्य कैसा है आपका? डॉक्टर साहब कैसे हैं?

… सब ठीक हैं। लेकिन तुम्हारा कोई आता-पता ही नहीं। कहां हो तुम? इतने दिनों से याद क्यों नहीं किया मुझे, मैंने पूछा। उसने कहा, आंकोलॉजी पर रिसर्च के साथ मेरा कोर्स भी पूरा हो गया। सुन रहे हैं… सर्जिकल आंकोलॉजिस्ट बन गई हूं। लंदन में ही जॉब मिल गई है। सोचा सब बताऊंगी आपको, मगर इसी बीच इतनी बिजी हो गई कि पूछिए मत। यहां हॉस्पिटल की ओर से मुझे आॅकलैंड भेजा गया था एक काम्पलिकेटेड सर्जरी के लिए। यह रेयर आॉपरेशन था। उसे कर के लौटने ही वाली थी कि हर जगह लॉकडाउन हो गया। तब से आॅकलैंड में हूं। यहां कैंसर के मरीज देख रही हूं। कुछ ऑपरेशन भी किए हैं।

अनामिका बता रही है, यहां कितने आत्मीय और सहयोगी लोग हैं। कम आबादी। सुहाना मौसम। नीले समंदर की लुभाती लहरेंं। यहां एक एक प्यारी सहेली मिल गई है। वह भी कैंसर सर्जन है। पंजाबी कुड़ी है। परांठे और लस्सी का मजा ले रही हूं। खूब जम रही यहां उसके साथ। बीच पर टहलती हूं। समंदर की लहरें गिनती हूं। संगीत सुनती हूं। रेत पर कविता लिखने बैठ जाती हूं। जीवन को अब बड़े कैनवस पर देखती हूं। सोच रही हूं कि यहीं रह जाऊं। बहुत कष्ट सहे मां-बाबूजी ने। क्यों न यहीं ले आऊं। एक घर हो समंदर किनारे। सूरज को उगते और डूबते हुए देखूं। शाम को सूरज डूबते समय कविताएं लिखूं। जिंदगी जी लूं यहीं। मरीजों के चेहरे पर मुस्कान लाऊं। उनके चेहरे पर जो खुशी होगी, वह किसी देवता पर फूल चढ़ाने और प्रार्थना करने से कहीं अच्छा है।

एक पल की चुप्पी के बाद, वह पूछ रही है, आप बोर तो नहीं हो रहे? मैंने कहा, नहीं, तुम्हें सुनना सुखद लगता है हमेशा। अपनी बात कहती रहो। … मैं कह रही कि मरीजों की सेवा ही मेरे लिए ईश्वर की प्रार्थना है। मन से, कर्म से और वचन से हिंसा दूर रहना है। सत्य का साथ देकर दायित्व निभाना है। संयम से रहना है। कष्ट सह कर दूसरों के लिए कुछ कर जाऊं, बस यही चाहती हूं। अनामिका ने अपनी अपनी बात पूरी की।

… जिंदगी के मायने क्या हैं, लोग आज तक नहीं समझ पाए अनामिका। बस भाग रहे हैं अपने सुख के लिए। पैसे बटोरने के लिए। इसके लिए छल-कपट से भी परहेज नहीं। दूसरे का हक मारने और गला काटने से भी पीछे नहीं नहीं, मैंने कहा। …सही कहा आपने। जीवन के कैनवस पर लोगों को सिर्फ ब्लैक स्पॉट ही दिखता है लोगों को। आपको एक प्रोफेसर के क्लासरूम के बारे में बताना चाहती हूं। सुनेंगे आप? अनामिका ने पूछा। हां क्यों नहीं। अभी आफिस पहुंचने में समय है। सुना सकती हो दोस्त, मैंने जवाब दिया।

अनामिका बता रही है-वह एक कालेज का क्लासरूम था। प्रोफेसर साहब ने आते ही कहा, आज मैं आप सबकी परीक्षा लूंगा। क्या आप तैयार हैं? विद्यार्थियों को समझ में नहीं आया कि अचानक प्रोफेसर को यह क्या सूझी है। अभी तो एग्जाम का समय भी नहीं। प्रोफेसर ने कुछ देर में सब को प्रश्नपत्र बांट दिए। यह किसी भी सामान्य प्रश्नपत्र जैसा ही था। मगर एक पल की चुप्पी के बाद प्रोफेसर ने कहा, प्रश्न ये नहीं जो आप देख रहे हैं। पेज पलटिए, सवाल वहां पर है। जब सभी ने पेज पलटा तो वे आश्चर्य में पड़ गए। वहां खाली पेज पर एक ब्लैक स्पॉट था।

अपने विद्याथियों के चेहरे पर आ रहे भावों को प्रोफेसर देख रहे थे। फिर उन्होंने खामोशी तोड़ते हुए कहा, आप जो भी देख रहे हैं, उस पर लिखें। … किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिर यह भी कोई सवाल है? सब सोच रहे थे कि इस पर लिखा क्या जाए। खाली पेज पर एक ब्लैक स्पॉट ही तो बना है। कक्षा खत्म होने से पहले प्रोफेसर ने सभी से प्रश्नपत्र वापस ले लिए। और एक-एक कर सभी के जवाब पढ़ने लगे।

सभी छात्रों ने अपनी समझ से जवाब लिखा था। किसी ने लिखा था कागज पर काली बिंदी है। किसी ने लिखा था कि एक ब्लैक स्पॉट पेज के मध्य में है। प्रोफेसर साहब हर एक का जवाब पढ़ते रहे। कमोबेश सभी का जवाब एक जैसा था। क्लासरूम में सन्नाटा पसरा था। सभी के उत्तर पढ़ने के बाद प्रोफेसर बोले, इस प्रश्नपत्र के जवाब पर मैं कोई नंबर या ग्रेड नहीं देने जा रहा। मैं तो चाहता था कि सवाल पर आप गहराई से सोचें और फिर जवाब लिखें। सब ने ब्लैक स्पॉट का जिक्र तो किया मगर उसके आसपास के सफेद हिस्से का किसी ने जिक्र नहीं किया। यही हाल हमारे जीवन का है।

प्रोफेसर साहब बताने लगे, हम सब के जीवन में एक बड़ा हिस्सा सफेद का है, मगर ध्यान ब्लैक स्पॉट पर ही जाता है। यानी हम जीवन के सकारात्मक पक्ष पर नहीं सोचते। छोटी-छोटी नकारात्मक बातों पर ही निगाह रहती है। जबकि यह जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है। जीवन का हर पल जश्न है। इसे प्रकृति के साथ मनाना चाहिए जो हमें बहुत कुछ देती है, जैसे- हवा, पानी और खाने के लिए बहुत सारी चीजें। इस जीवन ने हमें कई दोस्त भी दिए हैं। उनमें कुछ खास दोस्त आपके जीवन का हिस्सा हैं। उसके साथ सुख-दुख बांटना चाहिए। वह नौकरी जो आपको जीवन यापन के लिए मिली है, वहां किसी काम को बोझ मत समझिए, अपने काम के साथ जश्न मनाइए। यानी कोई न कोई वजह है सकारात्मक रहने की। मगर हम देखते क्या हैं- ब्लैक स्पॉट। यानी जीवन का काला पक्ष, जैसे – कोई जटिल रोग, पैसे का अभाव, घर-दफ्तर की उलझनें और बनते-बिगड़ते रिश्ते। या फिर किसी मित्र या प्रेमिका से मिली निराशा।

प्रोफेसर बताने लगे कि हम सब के जीवन में इतना कुछ है कि हम उसकी तरफ देखते तक नहीं। जीवन के कैनवस पर ब्लैक स्पॉट ही सब कुछ नहीं है। सफेद कागज पर हमें काली बिंदी ही क्यों दिखती है, सफेद हिस्सा क्यों नहीं। इसलिए जो भी खुशियां हमें नसीब में मिली है, उसे जीना चाहिए। हर पल को जीना चाहिए……।

….अनामिका खामोश हो गई है। मेरी गाड़ी दफ्तर के करीब पहुंच गई है। जीवन के इस पहलू पर हम से कितने लोग ऐसा सोचते होंगे। मैंने घड़ी की तरफ देखा। ढाई बज रहे हैं। वहां कितना समय हो गया डाक्टर? मैंने उससे पूछा तो उसने कहा, रात के साढ़े नौ बज रहे हैं। बस डिनर कर के सोने जा रही हूं। आप दफ्तर पहुंच गए? अपना ध्यान रखिएगा। मास्क आपको अभी छह महीने तक लगाना है। फिजिकल डिस्टेंसिंग मेनटेन रखिएगा। मैं फोन करती रहूंगी।

… गाड़ी दफ्तर के गेट पर लग गई है। दरवाजा खोल कर उतर रहा हूं। सोच रहा हूं, अनामिका फिजिकल डिस्टेंसिंग तो अच्छी है मगर सोशल डिस्टेंसिंग ठीक नहीं। इससे अपनापा घटता है दोस्त। जिंदादिली घटती है। सुन रही हो न तुम।

अगर आप ‘द लास्ट कोच’ की बाकी कड़ियां पढ़ना चाहते हैं तो यहां क्लिक कर सकते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App। जनसत्‍ता टेलीग्राम पर भी है, जुड़ने के ल‍िए क्‍ल‍िक करें।

Next Stories
1 कविता: कहां खो गया इंसान
2 लास्ट कोच: एक अनकही प्रेम कहानी
3 कविता: यह कैसा दौर है