प्रकृति-प्रदत्त किसी की अपंगता की खिल्ली उड़ाना बेशक ‘अप्रिय सत्य’ है, पर होशोहवास में नीतिविरोधी, जनविरोधी आचरण करनेवालों पर अंगुली…
भारत विविधताओं का देश है जहां भाषा से लेकर वेशभूषा तक, सब कुछ अलग लेकिन बेहतरीन है।
छुटपन की यादों में आज भी कई शब्द हमारे मस्तिष्क पटल पर विचरते रहते हैं।
देश में हर साल उच्चतम और उच्च न्यायालयों में औसतन पच्चीस हजार जनहित याचिकाएं दाखिल होती हैं, जिनमें केंद्र और…
अपने भावों को संप्रेषित करने के लिए शब्द सहायक होते हैं, वाक्य बनते हैं और भाव व विचार आकार ग्रहण…
इस बात को लंबे समय से रेखांकित किया जाता रहा है कि अदालतों की भाषा ऐसी होनी चाहिए, जिसे हर…
भूमंडलीकरण के इस दौर में दुनिया भर की कंपनियां एक से अधिक देशों में अपना उद्यम स्थापित कर रही हैं।
देश में ‘नई शिक्षा नीति-2020’ के प्रभाव में आने के बाद मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण पर नए सिरे से…
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि हिंदी दिवस मनाने की परंपरा न तो भाजपा ने शुरू की…
साहित्य में सृजनात्मकता व कलात्मकता की प्रमुखता के बावजूद भाषा की स्थिति गौण नहीं होती।
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में कहा कि, ‘किसी भी देश…