अशोक कुमार

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49 Articles

संवेदना के सूखते सरोवर

समाजशास्त्र की सफल अवधारणा है कि समाज की लघुतम इकाई परिवार संचालन का मूल ऊर्जा स्रोत संवेदना रही है।

फूलों का साम्राज्य

प्रकृति ने धरती पर अपने विराट वैभव भंडार से असंख्य संपदाओं को जनमानस के उपयोग और कल्याण के लिए सृजित की है।

रा‍जनीति: विकास में युवाओं की भूमिका

यदि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास में निवेश करके मानव संसाधन को मानव पूंजी में तब्दील कर दिया जाए तो निश्चय ही भविष्य में...

बिसरता परिवेश

आज के बच्चे भी प्रकृति से प्रेम न करके टीवी और मोबाइल की दुनिया को ही सच मान लेते हैं। उनसे अलग किसी दुनिया...

दुनिया मेरे आगे: आतिथ्य का परिवेश

उस दिन घर लौटते समय मानस पटल पर अंकित बचपन की कुछ धुंधली स्मृतियां सहज रूप से तरल होकर जीवंत हो उठीं। यादों ने...

फ्रांस में उबलता गुस्सा, सरकार की नाक में हुआ दम

प्रदर्शनकारी ना सरकार के वादों पर यकीन कर रहे हैं और ना ही बलप्रयोग से डर रहे हैं। हालात यह है कि अब प्रदर्शनकारियों...

‘मस्जिद टैक्स’ लगाने से आजाद होंगी जर्मनी की मस्जिदें?

जर्मनी में हाल के सालों में जिन मुद्दों को लेकर सबसे जोरदार बहस होती रही है, उनमें इस्लाम भी शामिल है। इसकी एक वजह...

ओवरटाइम पर यूरोप के एक देश में उबाल

प्रधानमंत्री ओरबान की दलील है कि इस ओवरटाइम का कर्मचारी को पैसा मिलेगा। उनके मुताबिक, यह तो अच्छा कानून है जो ज्यादा पैसा कमाने...

मैर्केल की उत्तराधिकार के सामने ‘मिनी मैर्केल’ की छवि तोड़ने की चुनौती

जर्मनी में परंपरा भी रही है कि सत्ताधारी पार्टी का प्रमुख ही सरकार का प्रमुख भी होता है। इसीलिए कह सकते हैं कि हैम्बर्ग...

दुनिया मेरे आगे: अपने हिस्से में से

अगर हम विचार करें कि ऐसे प्रकृति-प्रिय जीव, जिनका न कोई बैंक खाता है, न कल के अनाज का भंडारण और न कोई स्थायी...

क्या ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन छोटा सा टापू बन कर रह जाएगा?

लंबी मशक्कत और खींचतान के बाद पिछले दिनों यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बीच डील का एलान किया गया, लेकिन यही डील ब्रिटिश प्रधानमंत्री...

क्या आपको पहले विश्व युद्ध की चीखें नहीं सुनाई देतीं?

चंद हफ्ते और बचे हैं. फिर 2018 इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा. लेकिन उससे पहले थोड़ा रुकिए और इतिहास के कुछ पन्नों को...

यूरोप से अफगानों की मुश्किल घर वापसी

जर्मनी में अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने के फैसले का विरोध हो रहा है। विरोधियों का कहना है कि आए दिन अफगानिस्तान में...

यूरोप का ये देश क्यों बदलना चाहता है अपना नाम?

लगभग 21 लाख की आबादी वाले इस छोटे से देश को लगता है कि नाम बदलने से उसके लिए समृद्धि और सुरक्षा के नए...

मकानों की किल्लत से जूझता जर्मनी, आसमान छू रहे हैं किराए

रोजगार और पढ़ाई के बेहतर अवसर लोगों को जर्मन शहरों की तरफ ला रहे हैं। लेकिन जिस तेजी से शहरों की आबादी बढ़ रही...

दांव पर लगी यूरोप की एकता

यूरोपीय संसद ने हंगरी पर यूरोपीय संघ के मौलिक मूल्यों का उल्लंघन करने के आरोप में उसके खिलाफ यूरोपीय संधि के आर्टिकल 7 को...

स्वीडन के निर्णायक चुनाव पर सबकी नजरें

एक करोड़ की आबादी वाला स्वीडन स्कैंडेनेवियन इलाके का सबसे बड़ा देश है। वह दशकों से शरणार्थियों और प्रवासियों का खुले दिल से स्वागत...

घड़ियों को आगे-पीछे करने से छुटकारा चाहता है यूरोप, 80 प्रतिशत लोगों ने डेलाइट सेविंग का किया विरोध

समय तो अपनी रफ्तार से चलता रहता है, लेकिन घड़ियों को जरूर आगे पीछे किया जा सकता है। अमेरिका और यूरोप के देशों में...

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