
‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ या ‘मेरे पास मां है’। इन शब्दों को लिखा किसी और ने…

‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ या ‘मेरे पास मां है’। इन शब्दों को लिखा किसी और ने…

अक्षरों के छापेखाने से निकलने के बाद से हर समय को लगता है कि उसे किताबों की जरूरत सबसे ज्यादा…

आम लोगों के साथ संगठित होकर बदलाव का मंच तैयार किया गया। तब जंतर मंतर पर नारा गूंज रहा था…

गुजरात विधानसभा के चुनाव 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रख कर लड़े गए। राजनीतिक विश्लेषक दावा करते रहे…

2014 में 2-जी पर एजी, ओजी हो रहा था। घोटालेबाजों पर अण्णा और केजरीवाल जिस तरह दहाड़े उससे निकले वोट…

अगर चुनावी सर्वेक्षण गुजरात के जनादेश में तब्दील होते हैं तो विपक्षी दलों को यह सोचना होगा कि विकल्प के…

कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल, रोहिंग्या पक्ष, राम मंदिर विपक्ष, लव जेहाद पक्ष, तीन तलाक पक्ष, और कांग्रेस का बड़ा नेता…

हम संजय लीला की अभिव्यक्ति की आजादी के लिए आवाज बुलंद करने वालों के साथ खड़े होंगे कि उन्होंने अपने…

राजतंत्र के अवशेष देखने और समझने के लिए भारतीय राजनीतिक दलों के लोकतंत्र से बेहतर कुछ नहीं है। भारतीय जनता…

नवउदारवादी नीतियों के नतीजों से बढ़े भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी का हल खोजने में कांग्रेस नाकाम हुई तो जनता ने सब…

बजरिए जंतर मंतर और रामलीला मैदान, नए मिजाज के मध्यवर्गीय तबके के समर्थन से जनलोकपाल का नारा लगाते हुए आम…

प्रचंड बहुमत से आई मोदी सरकार के कार्यकाल में 8 नवंबर मील का पत्थर साबित हो गया है। सरकार इसे…