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बेबाक बोल

बेबाक बोल : खबर जिंदा है

14 मई 2018 को टॉम वुल्फ ने दुनिया को अलविदा कहा। 88 पार की उम्र में अपने खास तरह के फैशन के लिए मशहूर...

बेबाक बोल : कर्नाटक की बोध कथा

‘अब तो ईगलटन रिसॉर्ट के मालिक का भी कहना है कि मैं सरकार बनाऊंगा मेरे पास 117 सदस्यों का बहुमत है’। कर्नाटक में येदियुरप्पा...

बेबाक बोल: तारीखी तस्वीर

आमार शोनार बांग्ला, आमि तोमाए भालोबाशी (मेरा सोने जैसा बंगाल, मैं तुमसे प्यार करता हूं)। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में यह गीत लिखा था...

राजकाजः बेबाक बोल – बनते देखा है..

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं/आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार...। जब बात अतिक्रमण की आती है तो...

राजकाजः बेबाक बोल – आदम सोच

दो साध्वियों और एक बच्ची की अथक जंग के बाद राम-रहीम और आसाराम बलात्कार के जुर्म में सलाखों के पीछे होते हैं। सत्ता और...

बारादरी: कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के कुप्रचार का लाभ मिला पाकिस्तान को

विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का आंदोलन अपनी परिणति तक पहुंच...

बेबाक बोल: राजकाज – शर्मसार

निर्भया के पहले भी हिंसा के ऐसे क्रूरतम मामले हुए थे और बाद भी। 2012 में दिल्ली की सड़क पर हुई बर्बरता ने पूरे...

बेबाक बोलः बिसरि गयो हरि नाम

धर्म और उसका संदेश समाज के पक्ष में सकारात्मक तरीके से लिया जाए तो उसके अनुयायी बड़ी ताकत को झुका सकते हैं। विश्नोई समुदाय...

बेबाक बोलः राजकाज- कहते हैं कि…

अब अपना इख्तियार है चाहे जहां चलें/रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम...। देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राज्यसभा में लोकतंत्र के अभिभावक...

बेबाक बोलः राजकाज- केदरानाथ

‘किसी को प्यार करना/तो चाहे चले जाना सात समुंदर पार/पर भूलना मत/कि तुम्हारी देह ने एक देह का/नमक खाया है...’। केदारनाथ सिंह भावनाओं को...

बेबाक बोलः राजकाज- साडा हक

मेरी हड्डियां/मेरी देह में छिपी बिजलियां हैं/मेरी देह/मेरे रक्त में खिला हुआ कमल...। कवि केदारनाथ सिंह की इन पंक्तियों के साथ हमने उन किसानों...

बेबाक बोलः राजकाज- राग दरबारी 2

श्रीलाल शुक्ल की रचना ‘राग दरबारी’ ने पचास साल पूरे कर लिए हैं। इसके लिखे जाने के समय ही पाठकों ने महसूस किया कि...

बेबाक बोलः राजकाज- दुराग्रहों का द्वंद्व

दिल्ली के शासन में आम आदमी पार्टी शानदार जीत के बाद ऐसी मजबूत विधायिका बन कर आई जहां विपक्ष नाम की चीज नहीं थी।...

बेबाक बोल : बड़ी बीमारी

दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा सार्वजनिक बस में चढ़ती है। एक पुरुष उसके साथ अश्लीलता की हदें पार कर देता है। खचाखच भरी बस...

बेबाक बोलः राजकाज- हंसना मना है

मिथिलांचल (वर्तमान में बिहार का हिस्सा) के मंडन मिश्र का आदि गुरु शंकराचार्य से शास्त्रार्थ चल रहा था। निर्णायक थीं मंडन मिश्र की विदुषी...

बेबाक बोल : क्रोध काल

हमने अपने पूरे माहौल में गुस्से और अहंकार का जो गुबार रच दिया है वह अब हमारे बच्चों के दिमाग में फूट रहा है।...

बेबाक बोलः राजकाज- खिलते पद्म

नागरिक पुरस्कारों का उद्देश्य होता है दलगत और विचारगत भावनाओं से ऊपर उठकर काम करने वाले नागरिकों का सम्मान करना। राज्य का यह राजधर्म...

बेबाक बोलः राजकाज- साख पर सवाल

‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ या ‘मेरे पास मां है’। इन शब्दों को लिखा किसी और ने लेकिन इनसे पहचान उनकी...