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बेबाक बोल

बेबाक बोल: अंधा संघर्ष

दूरदराज के इलाकों में ‘विकास’ पर सवाल उठा कर लाल क्रांति का घेरा डाल दिया। जो सड़क, अस्पताल और स्कूल पहुंच सकते थे वंचित...

बेबाक बोल: हे राम!

भारतीय संस्कृति में राम का कोई एक रूप नहीं। गंगा किनारे बसे नगर से लेकर जंगलों में कबीलाई सभ्यता की तरह जी रहे लोगों...

बेबाक बोल: विश्वास की हत्या

निष्पक्षता और स्वायत्तता दो ऐसे शब्द हैं जो संवैधानिक संस्थाओं को लोक और तंत्र से जोड़ते हैं। एक बेहतरीन ढांचे को पैदा करने के...

बेबाक बोल: सानंद के समय में

गंगा को धर्म और आरती के खाते में रख विज्ञान और तकनीक को बांध, हथियार, सॉफ्टवेयर और स्मार्टफोन बनाने में जुटा दिया। इस विज्ञान...

बेबाक बोल: करो या मरो…

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आने वाले समय में अपने अस्तित्व की परीक्षा से गुजरने वाली है। पांच राज्यों के चुनावों के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़...

बेबाक बोल: संकल्प बिना विकल्प

सोनिया गांधी और राहुल गांधी तो गठबंधन चाहते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह और कई दूसरे नेताओं ने केंद्रीय जांच एजंसी मसलन सीबीआइ के डर...

बेबाक बोल: फौजी हुक्मरान

पाकिस्तान का वजीर-ए-आजम बनने के साथ इमरान खान ने खर्च कटौती, सरकारी बंगला न लेना, प्रधानमंत्री निवास को शैक्षणिक संस्थान बना देना जैसे जो...

बेबाक बोल: चौपट राजा

राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों से लेकर ओलंपिक तक में एक नगरी की लड़कियां भारत के लिए सोना, चांदी और कांसे के तमगे बटोर कर...

बेबाक बोल: आतंक की आग

बुरे काम का बुरा नतीजा, घरों से लेकर स्कूलों तक में दिया जानेवाला यह संदेश राज्य के शीर्ष स्तर पर नकार दिया जाता है।...

बेबाक बोल: कलमवीर

म्यांमा में जुंटा सरकार की नजरबंदी के दौरान वह आजाद प्रेस और विदेशी मीडिया ही था जिसने आंग सान सू की को दुनियाभर में...

बेबाक बोल: फिर ’84

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में सिख विरोधी दंगों के लिए माफी मांग कर एक नजीर पेश की थी। इसरो, आइआइएम, आइआइटी से...

बेबाक बोल: आप की बीमारी

आम आदमी पार्टी ने अपना राजनीतिक प्रतीक चिह्न या आम भाषा में कहें चुनावी निशान झाड़ू को बनाया। सीकों से बनी झाडूÞ आम लोगों...

बेबाक बोल: अटल विश्वास

सक्रिय राजनीति से बाहर होकर जो नेता पिछले एक दशक से मौन थे, उनके निधन पर पूरे देश के होठों पर उनकी कविता की...

बेबाक बोल: भरोसे का भ्रम

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए ऐसी घटनाएं दोबारा होने से रोकने...

बेबाक बोल: दिल्ली का दर्द

भूख एक ऐसा शब्द है जो सामाजिक स्तर की पहचान कराता है। आज इक्कीसवीं सदी में देश की राजधानी दिल्ली जहां दो-दो सरकारें अपना...

बेबाक बोल: रुद्रावतार!

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय ‘कर नाटक’ का जो व्यंग्य चल रहा था उसका पटाक्षेप जद (सेकु)-कांग्रेस सरकार का पहला बजट पेश करने के...

राजकाजः बेबाक बोल – भ्रमजाल

अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस के उदारवादी चेहरे 2019 के चुनावी मैदान में नीतियों की बात आते ही परेशान हो जाते हैं।...

बेबाक बोल: बेलाज बादशाह

चुनावी मैदान में जनता के सामने हाथ जोड़ने वाले जनप्रतिनिधि सत्ता का ताज पहनते ही लोकतंत्र की लाज नहीं रखते हैं। जनप्रतिनिधियों का नागरिकों...