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बेबाक बोलः दोनों बदल गए- भगवा भरोसे

नवउदारवादी नीतियों के नतीजों से बढ़े भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी का हल खोजने में कांग्रेस नाकाम हुई तो जनता ने सब कुछ बदल देंगे जैसे नारे देने वाले नरेंद्र मोदी को देश की कमान सौंपी। लेकिन आज साढ़े तीन साल बाद बदला यह है कि कांग्रेस के नेता मंदिर के गर्भगृहों में रामनामी चादर ओढ़ कर और भगवा पताका लिए नदी परिक्रमा कर रहे हैं तो भ्रष्टाचार के दागी कांग्रेसी और अन्य दलों के नेता भाजपा वाशिंग पाउडर से अपने दाग धोकर कमल के नाम पर वोट मांग रहे हैं। गुजरात के इस चुनावी समय में जनता के सामने है राजेश मूणत से लेकर हार्दिक पटेल तक की कथित सीडी और रुपहले पर्दे पर पद्मावती बनी दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी। भाजपा आइटी सेल रॉबर्ट वाड्रा के जमीन घोटाले को भूल नेहरू की तस्वीरों से खेल कर उनके और हार्दिक के डीएनए को एक बनाने में जुटा है। 2014 के बाद राहुल के मुंह से निकलते जय माता दी और भाजपा में शामिल होते दागी पर इस बार का बेबाक बोल।

2014 के बाद राहुल के मुंह से निकलते जय माता दी और भाजपा में शामिल होते दागी पर इस बार का बेबाक बोल।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब कहते हैं कि हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता से बड़ा झूठ कुछ भी नहीं है तो इसके जवाबी वार के लिए दिग्विजय सिंह की तरफ देखने की परंपरा रही है। तो क्या दिखता है उधर देखने पर? दिग्विजय सिंह तो अपनी जीवनसंगिनी के साथ भगवा पताका उठाए नर्मदा नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। और, इसके लिए वे पार्टी से लंबे अवकाश पर भी हैं। सारे त्योहार नदी किनारे मनाए गए, करवा चौथ से लेकर दिवाली तक।
‘उसामा जी’ वाली धर्मनिरपेक्षता का हासिल यह भगवा पताका है, सेकुलर चेहरे के हाथों में आरती की थाली है। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस धार्मिक परिक्रमा में साथ देकर थोड़ी देर के लिए भगवा पताका अपने कंधों पर रख चुके हैं। मध्य प्रदेश में किसानों पर चली गोली की गूंज कांग्रेस ने इतनी जल्दी भुला दी। जब किसानों और कामगारों के साथ एक बड़े आंदोलन की जरूरत थी तो कांग्रेसी नेता आध्यात्मिक हल खोजने में जुटे हैं।

लोकतांत्रिक सरकार में राजपुरोहित रखने की सलाह देनेवाले गुरुदेव ने मध्य प्रदेश में हैपीनेस मंत्रालय खोलने की सलाह दी थी। वहीं इन दिनों अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे श्रीश्री रविशंकर विदर्भ के किसानों को लेकर बयान दे चुके हैं कि वहां के 512 गांवों की पदयात्रा के बाद उन्होंने पाया कि केवल गरीबी किसानों की खुदकुशी का कारण नहीं है, उनमें अध्यात्म की कमी भी होती है। उन्होंने सलाह दी कि किसानों में आत्महत्या की मनोवृत्ति खत्म करने के लिए योग और प्राणायाम जरूरी है। और, अब कांग्रेसी नेता भी किसानों और कारखानों की समस्या का हल नदी किनारे आरती और मंदिर के गर्भगृहों में ढूंढ़ रहे हैं।

अरुण शौरी के समीकरण के अनुसार भाजपा में गाय घटा दी जाए तो वह कांग्रेस हो जाती है। मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक क्या दिख रहा है? गुजरात में जिस तरह राहुल गांधी माथे पर माता का पटका लगा मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं आरोप है कि वह उदार हिंदुत्व का सहारा ले रहे हैं। जय भीम के साथ जय माता दी का उद्घोष कर उन्होंने बता दिया था कि वे किधर का रुख करनेवाले हैं। यानी कांग्रेस अब अपने साथ गाय को जोड़ने वाली है।

भाजपा ने कांग्रेसमुक्त भारत का आह्वान कर हर चुनाव जिताऊ कांग्रेसी को अपने में समा लिया। कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ इतनी नारेबाजी हुई कि भ्रष्टाचार का हर आरोपी भाजपाई बनने के लिए बेकरार हो गया। भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा मार पड़ी थी कमजोर तबकों पर। महंगाई उनके हिस्से आई थी, रोजगार से वे वंचित थे। उनके पास वोट की ताकत थी और उन्हें लगा था कि कांग्रेस के बाद जो पार्टी आएगी उन्हें रोजगार देगी, उनके अच्छे दिन लाएगी। लेकिन अच्छे दिन आए सुखराम और उनके बेटे के। शारदा-नारदा वाले दागी मुकल रॉय भी सीबीआइ से भागते-भागते सीधे भाजपा के प्रवेशद्वार पर रुके। भाजपा का तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का आख्यान सामने आ गया है कि जो भ्रष्टाचार का आरोपी है उसे भाजपा में शामिल कर लो।

भाजपा ने भ्रष्टाचारी अमीरों को जेल भेजने का सुहाना सपना दिखाया। ‘मेरा तो कोई रिश्तेदार नहीं, मैं किसके लिए कमाऊंगा’। जनता को लगा हां, यह है वो जो उसे जेल भेजेगा जो हमारे हिस्से का मार रहा है। लेकिन अब साढ़े तीन साल बाद दागियों के बारे में उनके पास जवाब है कि कानून अपना काम करेगा। कानून तो बहुत कुछ कानूनी संस्थाओं पर भी निर्भर करता है। और, अभी तक सीबीआइ के छापे के बाद जैसे हर कोई भाजपा शरणम् गच्छामि हो रहा है। यह देख कर लगता है कि कहीं लालू प्रसाद यादव भी भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए भाजपा वाशिंग पाउडर का इस्तेमाल न कर लें और उसके बाद सुशील मोदी को उन्हें गले लगाने में कोई गुरेज न होगा।

तो, 2014 के लोकसभा चुनावों में क्रांतिकारी बदलाव के बाद आज भाजपा और कांग्रेस में भी बदलाव चरम पर है। भाजपा की गाय कांग्रेस के पास है और कांग्रेस के भ्रष्टाचार के दाग भाजपा के पास। आम जनता के पास है वही बेरोजगारी और महंगाई। कल के शहजादे आज गुजरात के शाहजादे पर हल्ला बोल रहे हैं। लेकिन अब जमीन की कमाई वाले जमाई पर गजब की चुप्पी है। कांग्रेसकाल में जनता भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी थी तो आज भी किसान से लेकर मजदूर तक बेहाल हैं। लेकिन गुजरात चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के ऊपर सीडी हावी हो गई। कैमरे में कैद आपसी समझ से बने दो लोगों के निजी रिश्ते नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक पर बहस की दिशा बदलने में कामयाब हैं। जाहिर सी बात है कि इस सीडी आख्यान से न भाजपा को कोई दिक्कत है और न कांग्रेस को क्योंकि बेरोजगारी और महंगाई का जवाब दोनों में से किसी के पास नहीं है। आज मूणत की कथित सीडी तो कल हार्दिक की। किसी के घर में उसकी मर्जी के बगैर झांकना, किसी के निजी रिश्तों को बिना उसकी इजाजत के कैमरे में कैद करना अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन विडंबना है कि यह अपराध चुनावी राज्य में लोकविमर्श बना दिया गया है।

महंगाई और बेरोजगारी पर हावी सीडी के बाद बहस की जो जगह बचती है उसकी पूर्ति के लिए ‘पद्मावती’ हाजिर है। सब्जी महंगी क्यों, जब एक करोड़ लोगों ने सबसिडी छोड़ी तो बिना सबसिडी वाली रसोई गैस इतनी महंगी क्यों, अस्पतालों में बच्चों की मौत क्यों – इन सब पर प्रदर्शन के बजाए ‘पद्मावती क्यों’ पर प्रदर्शन हो रहे हैं। तमिलनाडु के किसान जंतर मंतर पर प्रदर्शन नहीं कर सकते, रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने लायक पैसे नहीं हैं। लेकिन सिनेमाघरों में पद्मावती के प्रदर्शन को रोकने के लिए जो प्रदर्शन हो रहे हैं उससे किन्हें फायदा हो रहा है। जिन स्मार्ट फोन पर जीएसटी और नोटबंदी की नाकामी के आंकड़े और चुटकुले आ रहे थे, अब उन पर खास तरह के संबंधों की सीडी देखी जा रही है।

संघ की जमीनी रिपोर्ट भाजपा को आगाह कर चुकी थी कि गुजरात में हालात ठीक नहीं हैं और चुनावों की राह बहुत आसान नहीं। इस चेतावनी का असर कांग्रेस की रैलियों में भीड़ के रूप में और गृह राज्य में प्रधानमंत्री के तूफानी दौरे के रूप में दिख रहा था। जनता 2014 के पहले भी परेशान थी और सत्ता बदलने के बाद भी हालात बदलते नजर नहीं आए। इन सबके बीच कांग्रेस और भाजपा में जो बदलाव दिख रहा है वह इस बात का इशारा कर रहा है कि आम जनता के लिए कांग्रेस का कुआं या भाजपा की खाई वाली स्थिति रहने वाली है। नवउदारवाद की नाकामियों से लड़ने का रोडमैप दोनों में से किसी के पास नहीं है। राष्ट्रीय का हल बहुराष्ट्रीय और सरकारी संस्थाओं की नाकामी का जवाब निजीकरण तो दोनों की नीतियों का हिस्सा रहा है।

मोदी के बाबा केदारनाथ की भक्ति के बीच राहुल गांधी गुजरात के सौराष्ट्र में द्वारकाधीश से शक्ति लेते पहले ही दिख चुके हैं। नामों के अक्षरों की नर्सरीनुमा व्याख्या का कॉपीराइट सिर्फ नरेंद्र मोदी के पास नहीं रहा राहुल गांधी ने भी उसमें मास्टरी कर ली है। सार्वजनिक तौर पर दिग्विजय योगी और शिवराज की बराबरी कर ही रहे हैं। बाकी एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए तेरी सीडी और मेरी सीडी तो है ही। किसानों, कामगारों और बेरोजागारों अभी थोड़ा और इंतजार करें। गुजरात से संदेश आ चुका है कि महंगाई, नौकरी, अस्पताल और सड़क व बिजली वाले चुनावों के लिए तो दिल्ली अभी दूर है। वो 2014 वाले अण्णा, भ्रष्टाचार और लोकपाल भुलाए जा चुके हैं। फिलहाल तो जनता को मंदिर, सीडी और पद्मावती में उलझाने की पूरी कोशिश है।

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