निगहबान पूंजीवाद मतदाता को बरगला कर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर रहा है। चुनाव को डिजिटल तरीके से फिक्स…
निगहबान पूंजीवाद मतदाता को बरगला कर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर रहा है। चुनाव को डिजिटल तरीके से फिक्स…
विचारकों ने अगाह किया है कि झूठ में लिप्त नागरिक अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति शिथिल होते जा…
स्वाद से जिंदगी का हर पहलू जुड़ा हुआ है। हमारे अनुभव खट्टे-मीठे होते हैं। हम अकसर किसी घटना या आयोजन…
हमारी उमंग भय-मुक्त होने की भी है। धर्म से टकराव और धर्मों में टकराव का कारण हमारे भय से अभय…
‘बाउजी, हमें गांव वापस जाना है। हमको गांव भिजवा दीजिए। यहां हम जी नहीं पा रहे हैं। इतने साल हो…
ब्राह्मण होने से कोई हिंदू नहीं हो जाता, भाई साहब। हां, मैं ब्राह्मण परिवार में पैदा जरूर हुआ था, इसलिए…
आशा खत्म हो गई है। कुछ अरसे से बीमार चल रही थी। बीच-बीच में ऐसा लगता था कि शायद उसकी…
वास्तव में नेहरू की सोच की खास बात यह थी कि वह व्यक्ति से निकल कर सामाजिक इंद्रधनुष को मुखरित…
बातचीत के दौरन यह साफ उभर कर आया कि मतदाता अपना फायदा पहले देख रहे थे, चाहे उससे अन्य नागरिकों…
लक्षद्वीप के साथ नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली स्थिति नहीं है। इसके विपरीत यह एक ऐसी जगह है, जो…
अन्य पुराने कालों की तरह यह नवजात काल भी नई चुनौतियां हमारे सामने पेश कर रहा है, पर बीते कालों…
भारत में पिछले तीस वर्षों में स्वतंत्र पत्रकारिता लगभग समाप्त हो गई है। अखबारों के दफ्तर मीडिया हाउस में परिवर्तित…