
सांत्वना श्रीकांत की दो कविताएं


खुशी की तलाश में हम सभी भटकते हैं। फिर भी कितना इतराते हैं। झूठ ही सही, मगर जब लोग पूछते…

कभी-कभी देखता हूं किसी वृक्ष की डालों को इस तरह, मानो, उन्हें ‘पढ़’ रहा होऊं, या उन्हें किसी चित्र में…

महाभारत में ही राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम-कथा है। गंधर्व विवाह करने के बाद जब शकुंतला कुछ समय बाद…

असम में बिहू मनाने की प्रथा आज भी परंपरागत रूप से चल रही है। गांव और बस्तियों में थोड़ी बहुत…

ब्लर्ब: नव संवत्सर आते ही लगता है जैसे शुभ्र चांदनी नहीं, वरन स्वर्ग की स्वर्णमुखी अप्सराएं ही खेतों में लहलहाती…

स्त्री नदी की तरह होती है। वह चलती है तो कई जिंदगियां चलती हैं। वह हंसती हैं तो फूल झरते…


बाल श्रम ने एक नया रूप ले लिया है। सड़कों पर बच्चे भीख मांग रहे हैं। कभी पेन बेचते हैं…

नामवर सिंह अनंत में विलीन होकर अमर हो गए। उनसे जुड़ी अपनी यादों को साझा कर रहे हैं विराग गुप्ता।

मैं इस वक्त लास्ट कोच में सफर कर रहा हूं। यह कहानी है मेरी मित्र डॉ. उज्ज्वला की सहेली सुनंदा…
