
देश में हार साल लाखों लोग रोजी-रोटी के लिए तो कभी विस्थापित होने पर गांवों से शहरों का रुख करते…

देश में हार साल लाखों लोग रोजी-रोटी के लिए तो कभी विस्थापित होने पर गांवों से शहरों का रुख करते…

सत्तर के दशक में एक फिल्म आई थी-‘माय लव’। तब इस फिल्म का एक गीत ‘वो तेरे प्यार का गम…

एक आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण भारत में 67 से 70 फीसद परिवार आज भी खाना पकाने के लिए लकड़िय़ों और…

सरकारी स्तर पर जागरूकता के प्रयासों के बावजूद सदियों से चले आ रहे रीति-रिवाजों और परंपराओं के तहत महिलाओं को…

न दशकों में गंगा की सफाई के नाम पर तीन हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन गंगा की…

भारतीय राजनीति में अगर किसी एक विधा का आज बोलबाला है तो वह है बयानबाजी। चाहे किसी भी प्रकार का…

बाबा-दादी की शादी की पचासवीं सालगिरह मनाने के बाद हंसी-खुशी के माहौल में ढेर सारे उपहार लिए हम देर रात…

अगर शिक्षा अपने वास्तविक अर्थ में सार्थक होती है तो वह हथियारों और हिंसा से क्रांति नहीं करती, वह तो…

निर्भया कांड और उसके चरम हिंसात्मक प्रतिबिंबों से दहला यह समाज अपनी प्रतिक्रिया से उसे हर संभव ऐतिहासिक बना गया,…

आज के जमाने में रोजगार के बिना रोटी का जुगाड़ संभव नहीं है। खेती घाटे का सौदा साबित हो रही…

आज जहां टीवी धारावाहिक ‘डर सबको लगता है’ के नारे के साथ भूत-प्रेत, नाग-नागिन के साथ दर्शकों को मनोरंजन की…

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में बैगा समुदाय भ्रमरमार और तेलियाकंद नामक दुर्लभ औषधि का उपयोग रक्त कैंसर की चिकित्सा में…