कांग्रेस सांसद शशि थरूर मंगलवार दोपहर एक और पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। यह बैठक पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर हुई। बैठक का मकसद अगले हफ्ते शुरू होने वाले संसद सत्र की तैयारी को लेकर थी। जिसमें केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा और सत्तारूढ़ भाजपा से जी-राम-जी रोजगार गारंटी योजना के बारे में सवाल किए जाएंगे
इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी मौजूद थे। इनके अलावा पी. चिदंबरम, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी और मनीष तिवारी जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशि थरूर इस समय दुबई में एक साहित्य समारोह में गए हुए हैं। उन्होंने पार्टी को पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी। बताया गया है कि वे मंगलवार रात तक भारत लौट आएंगे।
पिछले चार दिनों में यह दूसरी बार है जब थरूर किसी बड़ी पार्टी बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। इससे पहले वे केरल में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर हुई बैठक में भी मौजूद नहीं थे। शशि थरूर कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं और साल 2009 से केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
पिछले हफ्ते सूत्रों ने बताया था कि केरल दौरे के दौरान राहुल गांधी के व्यवहार से शशि थरूर नाराज थे। उन्हें लगा कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया, जिससे पार्टी के भीतर अनिश्चितता की स्थिति बन गई।
मीडिया को पहले ही जानकारी दी गई थी कि थरूर बैठक में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, कुछ घंटों बाद उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि वे वीडियो कॉल के जरिए बैठक में जुड़ेंगे, क्योंकि वे कोच्चि में पहले से तय एक साहित्य उत्सव में व्यस्त थे और वहां से आ नहीं सकते थे। लेकिन जब बैठक शुरू हुई, तब भी शशि थरूर उसमें शामिल नहीं हुए। उस समय भी उन्होंने पार्टी को पहले ही बता दिया था कि वे बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे।
दरअसल, बाद में उन्होंने उस बैठक में अनुपस्थि रहने की बात को पूरी तरह नकार दी। उन्होंने पत्रकारों से साफ कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर पूरी चर्चा हो चुकी है और वह इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि, यह भी सामने आया है कि वह नवंबर और दिसंबर के बीच हुई तीन बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। पेशे से राजनयिक रहे शशि थरूर की स्थिति कांग्रेस में इस समय कुछ नाजुक मानी जा रही है। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ भाजपा की तारीफ में दिए गए उनके कुछ बयान हैं।
इन बयानों में 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ किए गए जवाबी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रधानमंत्री के तरीके की सराहना। साथ ही पार्टी और उसके नेतृत्व पर मीडिया में कभी-कभी की गई उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियां शामिल हैं।
इन बयानों के बाद कांग्रेस की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आई। पार्टी के कुछ नेताओं ने थरूर पर भाजपा में जाने की कोशिश करने तक के आरोप लगाए। हालांकि, थरूर ने ऐसी किसी भी बात से साफ इनकार किया। उन्होंने पिछले साल जून में मीडिया से कहा था कि वे पिछले 16 सालों से कांग्रेस के प्रति वफादार रहे हैं।
थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री की तारीफ करना किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की जल्दबाजी का संकेत नहीं है,जैसा कि कुछ लोग गलत तरीके से समझ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह देश की एकता को दिखाने वाला कदम है। इसके बावजूद, थरूर के पार्टी बदलने की अटकलें पूरी तरह से कभी खत्म नहीं हुईं।
दरअसल, नागपुर में भी विवाद देखने को मिला था। यहां थरूर ने इंडियन क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर के साथ एक सेल्फी सोशल मीडिया पर साझा की थी। गौतम गंभीर दिल्ली से भाजपा के पूर्व सांसद रह चुके हैं। थरूर ने गंभीर की तारीफ करते हुए कहा था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद देश का दूसरा सबसे कठिन पद संभाल रहे हैं।
इस पर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि जैसे क्रिकेट प्रशंसक गौतम गंभीर की कोचिंग और रणनीति पर सवाल उठाते हैं। वैसे ही विपक्ष प्रधानमंत्री के फैसलों पर सवाल उठाकर उन पर देश के हितों के खिलाफ काम करने के आरोप लगाता है।
थरूर सीपीआईएम में?
इस बीच, थरूर के कांग्रेस छोड़ने की अफवाहें केरल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) में शामिल होने की चर्चा में बदल गईं सोमवार को इस बारे में पूछे जाने पर थरूर ने टालमटोल भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने समाचार रिपोर्टें देखी हैं लेकिन इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता एमवी गोविंदन ने थरूर के पार्टी में शामिल होने की किसी भी बात को ‘अटकल’ बताकर खारिज कर दिया।
केरल चुनाव से पहले कांग्रेस कोशिश कर रही है कि पिछले महीने हुए नगर निगम चुनाव में मिली अप्रत्याशित जीत की रफ्तार बनी रहे। विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई मामला नहीं पता, जिससे लगे कि थारूर ने पार्टी के लिए कोई परेशानी खड़ी की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, थारूर और कांग्रेस के रिश्तों में तब से तनाव है, जब उन्होंने ‘जी-23’ समूह के समर्थन में हस्ताक्षर किए थे। यह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह है, जिसने 2022 में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी।
इसके बावजूद कांग्रेस थरूर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से बचती दिख रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी वजह केरल चुनाव से जुड़ा राजनीतिक गणित है।
केरल कांग्रेस में थरूर और राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच पहले से तनाव रहा है। वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी और गांधी व खड़गे के बाद पार्टी का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है। इसी कारण पार्टी थरूर के खिलाफ सख्त कदम उठाने से हिचक रही है। वहीं, थरूर की केरल के मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ है, जो चुनाव से पहले पार्टी के लिए अहम है।
यह भी पढ़ें- यूजीसी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया, जानें क्या बोले
