UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भारत की एक वैधानिक संस्था है। इसका काम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए मानक तय करना है। इसके अलावा यह उच्च शिक्षा संस्थानों को मान्यता देना, विश्वविद्यालयों को अनुदान देना, शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने का भी काम करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो यूजीसी की उच्च शिक्षा व्यवस्था में ठीक वैसी ही भूमिका है जैसी क्रिकेट के मैच में ‘रेफरी’ की होती है।
इन दिनों यूजीसी अपने एक नए विनियम की वजह से विवादों में है। नए कानून के तहत अब विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ने वाले ओबीसी, एससी, एसटी के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी अपने साथ होने वाले जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत सक्षम प्राधिकारी के सामने दर्ज करा सकेंगे। पहले सिर्फ जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें एससी और एसटी समाज के छात्रों तक ही सीमित थीं।
यूजीसी की नए विनियमों का विरोध कर रहे सामान्य वर्ग से जुड़े छात्रों का मानना है कि नए विनियम दमनकारी प्रकृति के हैं। इनमें पीड़ित की परिभाषा पहले से तय है जबकि कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसर में पीड़ित कोई भी हो सकता है।