कोरोना से लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देने का जो ऐलान किया है, उसमें खामियाँ नजर आ रही हैं। पहले से घोषित योजनाओं, सरकार की ओर से दी जाने वाली गारंटी, कर्मचारियों का पीएफ़ कटौती को भी पैकेज का हिस्सा बताया जा रहा है। और तो और पुरानी योजनाओं को भी कोरोना काल में दी जा रही राहत के तहत गिना जा रहा है। एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड ऐसी ही एक योजना है।

14 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा, “एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड लागू किया जाएगा। अगस्त 2020 तक 23 राज्यों के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के 67 करोड़ लाभार्थी इस योजना का फायदा उठा सकेंगे।” वित्त मंत्री ने बताया कि यह संख्या कुल पीडीएस लाभार्थियों का 83 प्रतिशत है। उनके मुताबिक, मार्च 2021 तक सौ प्रतिशत लाभार्थियों के लिए यह सुविधा लागू हो जाएगी। बता दें कि एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना के तहत किसी व्यक्ति का राशन कार्ड पूरे देश में काम करेगा।

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वित्त मंत्री की इस घोषणा को अगर मोदी सरकार के अन्य मंत्री राम विलास पासवान के ऐलान से जोड़ कर देखें तो साफ होता है कि सरकार पहले तय किया गया अपना लक्ष्य पूरा करने में पिछड़ गई और उस पुराने लक्ष्य को कोरोना के मद्देनजर घोषित किए गए पैकेज का हिस्सा भी बना दिया। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने तो एक कदम और आगे बढ़ कर आज तक चैनल पर यह तक कह दिया कि वन नेशन, वन राशन कार्ड…लगभग 70 करोड़ लोगों के साथ देश के 23 राज्यों में इस तरह का प्रशासनिक वातावरण तैयार होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह सब हम ऐसे समय कर रहे हैं जब देश लॉकडाउन में है।

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पुरानी योजना समय से पूरी करने में पिछड़ी सरकार: ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना की घोषणा अगस्त 2019 में राम विलास पासवान ने की थी। उनका कहना था कि यह योजना 1 जून, 2020 तक पूरे देश में लागू हो जाएगी। एक मई, 2020 को पासवान ने ट्वीट कर बताया था कि इस योजना में शामिल होने के लिए आज 5 और राज्य सहमत हो गए हैं। इसके साथ ही योजना में शामिल होने वाले राज्यों की संख्या 17 हो गई है।

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अगर इससे भी पहले जाएं तो 2011 में UIDAI चेयरमैन नन्दन नीलकेणि की अध्यक्षता वाले टास्क फोर्स ने सलाह दी थी कि राशन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जाए और उसका डाटा एक सर्वर पर रखा जाए। हालांकि यह योजना परवान नहीं चढ़ी। यह टास्क फोर्स फरवरी 2011 में वित्त मंत्रालय ने गठित की थी। इसकी रिपोर्ट अक्तूबर 2011 में मनमोहन सिंह सरकार को सौंपी थी।

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