Manmohan Singh

प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में की मनमोहन सिंह और नरेन्द्र मोदी की तुलना, दोनों के बीच बताया यह फर्क…

मुखर्जी ने इस बात का उल्लेख किया कि मोदी ‘‘जनता के लोकप्रिय पसंद’’ के रूप में देश के प्रधानमंत्री बने जबकि मनमोहन सिंह को इस पद के लिए ‘‘सोनिया गांधी की ओर से पेशकश की गई थी।’’

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बैक सीरीज़ के आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि यूपीए सरकारों ने बेहतरीन विकास किया और 140 मिलियन गरीबी दूर की।

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Manmohan Singh Birthday Special: साल 1948 में मनमोहन सिंह के पिता चाहते थे कि बेटा साइंस पढ़कर डॉक्टर बने। पिता की चाह का सम्मान रखते हुए मनमोहन ने दो महीने तक कोशिश की, पर वे पीछे हटे और इकनॉमिक्स की तरफ वापस लौटे। आज (26 सितंबर, 2020) उनका 88वां जन्मदिन है।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली ने कहा कि राव निश्चित तौर पर सम्मान के हकदार हैं लेकिन आर्थिक मोर्चे पर मनमोहन सिंह का योगदान भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जब नरसिम्हा ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी और देश की हालत खराब थी।

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पत्रकार कहती हैं कि मनमोहन सिंह साल 1991 में जब वित्त मंत्री बने, उन्होंने कई बड़े बदलाव किए।

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लेख में कहा गया है कि वास्तविक तौर पर संकटग्रस्त कर्जदारों के लिए, कम से कम एक बार पुनर्गठन की अनुमति देनी चाहिए। वहीं आदतन कर्ज ना चुकाने वालों को इसमें कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए।

दूसरी नजर: अर्थव्यवस्था के लिए मनमोहन नुस्खा

सरकार ने जिस तरीके से मुक्त व्यापार को खत्म कर डाला है, उससे दुनिया भर में एक गहरा संदेह पैदा हो गया है। भारत खुल कर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों को तोड़ने की बात कहता रहा है और बहुपक्षीय व द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के खिलाफ मोर्चा तान दिया है। आयात किए जाने वाले सामान का यहां निर्माण करना खुशहाली का नया (पुराना?) रास्ता है। मात्रात्मक प्रतिबंध, उच्च शुल्क और गैर शुल्क बाधाओं की वापसी हो रही है। मैं इसे ट्रंप का असर कहता हूं, सरकार इसे आत्मनिर्भर कहती है, जो 1960 से 1990 के बीच अपनाई गई तानाशाही नीतियों से कहीं अलग नहीं है।

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वहीं, इस सर्वे में मनमोहन सिंह सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से ज्यादा असरदार साबित होते नजर आ रहे हैं। 18 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मनमोहन सिंह कांग्रेस को दोबारा खड़ा कर सकते हैं।

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें इस देश का ‘महान सपूत’ बताया। तत्कालीन राव की सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कहा कि राव को वास्तव में भारत में आर्थिक सुधारों का जनक कहा जा सकता है।

पूर्व PM मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे संजय बारू के साथ शराब की होम डिलीवरी के नाम पर ठगी; आरोपी निकला कैब ड्राइवर

पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह और उसके साथी फर्जी नाम और पते से सिम कार्ड लेते हैं और फिर उन नंबरों से लोगों को कॉल कर ठगी करते हैं।

मनमोहन का चीन मसले पर पीएम मोदी पर निशाना- क्या बोल रहे हैं, उसके असर का पता होना चाहिए

सिंह ने कहा कि “इस वक्त हम इतिहास के ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जहां सरकार के फैसले और एक्शन का इतना गंभीर असर होगा, जिसके आधार पर हमारी भावी पीढ़ियां हमें आंकेंगी।

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सीने में दर्द की शिकायत के बाद कुछ दिनों पहले उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां वह कुछ दिन अस्पताल में भर्ती रहे और इलाज के दौरान आईसीयू में भी रहे।

कोरोना पैकेज में One Nation One Ration Card: मनमोहन सरकार में पड़ी थी नींव, रामविलास पासवान ने किया था ऐलान

वित्त मंत्री की इस घोषणा को अगर मोदी सरकार के अन्य मंत्री राम विलास पासवान के ऐलान से जोड़ कर देखें तो साफ होता है कि सरकार पहले तय किया गया अपना लक्ष्य पूरा करने में पिछड़ गई और उस पुराने लक्ष्य को कोरोना के मद्देनजर घोषित किए गए पैकेज का हिस्सा भी बना दिया।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को सीने में दर्द की शिकायत, एम्स में हुए भर्ती

पूर्व पीएम को एम्स में cardio-thoracic ward में उन्हें रखा गया है। डॉक्टर्स लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

पूर्व PM मनमोहन सिंह सीने में तकलीफ की शिकायत के बाद AIIMS में भर्ती

Manmohan Singh Health Update: मनमोहन सिंह, 87 साल के हैं। वह दिल के मरीज हैं और वह 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे हैं।

लॉकडाउन से निकलने की क्या है रणनीति? केंद्र सरकार से पूछिए, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने चार-चार मुख्यमंत्रियों का पढ़ाया सियासी पाठ

इस दौरान डॉ मनमोहन सिंह ने चार-चार मुख्यमंत्रियों को सियासी पाठ भी पढ़ाया और सरकार ने सवाल पूछने को कहा। सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्रियों को विचार करने और यह पूछने की आवश्यकता है कि देश को लॉकडाउन से बाहर निकालने के लिए भारत सरकार की क्या रणनीति है ?

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उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से , एक ऐसा वर्ग है जिसमें या तो इतिहास पढ़ने का धैर्य नहीं है या जो जानबूझकर अपने पूर्वाग्रहों से संचालित व दिशानिर्देशित होना चाहता है, वह नेहरू की गलत छवि पेश करने की यथासंभव कोशिश करता है।

अटल सरकार में ज्‍यादा तेज होते थे फैसले, कश्‍मीरी पंडितों का दर्द सुन बोल पड़े थे वाजपेयी- हरे राम, हरे राम…: पीएमओ के पूर्व जॉयंट सेक्रेटरी ने लिखा

एच डी देवेगौड़ा, आई के गुजराल, वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकार में संयुक्त सचिव रह चुके जरनैल सिंह ने कहा है कि वह (अटल) भी कश्मीरी पंडितों के दर्द को कम करने के लिए कोई भी समाधान प्रदान करने में असहाय लग रहा थे।

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